Reliance Communications Bank Guarantee: अनिल अंबानी की दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दूरसंचार विभाग ने कंपनी की करीब ₹801.91 करोड़ की बैंक गारंटी भुना ली है। यह गारंटी स्पेक्ट्रम नीलामी के तहत सरकार को किए जाने वाले भुगतान की किस्तों को सुरक्षित करने के लिए जमा की गई थी।
HighLights
- दूरसंचार विभाग ने रिलायंस कम्युनिकेशंस की ₹801.91 करोड़ की बैंक गारंटी भुनाई।
- बैंक गारंटी स्पेक्ट्रम भुगतान की वार्षिक किस्तों से जुड़ी थी।
- RCOM जून 2019 से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में है।
- कंपनी ने कहा कि इस कार्रवाई का उसकी देनदारियों और दावों पर वित्तीय असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली। कभी देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल रही अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी को अब दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से बड़ा झटका लगा है। विभाग ने अलग-अलग स्पेक्ट्रम नीलामियों से जुड़ी करीब ₹801.91 करोड़ की फाइनेंशियल बैंक गारंटी (FBG) भुना ली है।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में बताया कि उसे दूरसंचार विभाग की ओर से इस संबंध में जानकारी मिली है। DoT ने विभिन्न बैंकों को RCOM की ओर से जमा की गई बैंक गारंटियों को भुनाने के निर्देश दिए हैं। ये गारंटियां कंपनी की ओर से स्पेक्ट्रम भुगतान की किस्तों को सुरक्षित करने के लिए दी गई थीं।
स्पेक्ट्रम भुगतान में चूक के बाद हुई कार्रवाई
रिलायंस कम्युनिकेशंस के मुताबिक, बैंक गारंटी भुनाने की यह कार्रवाई उन वार्षिक किस्तों के भुगतान में कथित चूक से जुड़ी है, जिन्हें कंपनी को विभिन्न स्पेक्ट्रम नीलामियों के तहत सरकार को चुकाना था।
टेलीकॉम कंपनियां स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए सरकार को बड़ी रकम का भुगतान करती हैं। कई मामलों में इस भुगतान को सुरक्षित रखने के लिए बैंक गारंटी जैसी वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। यदि निर्धारित शर्तों के तहत भुगतान में चूक होती है, तो संबंधित विभाग बैंक गारंटी को भुना सकता है।
RCOM के मामले में भी DoT ने इसी व्यवस्था के तहत कार्रवाई की है। इससे पहले से वित्तीय संकट में फंसी कंपनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
चार बैंकों से जुड़ी गारंटी हुई एनकैश
दूरसंचार विभाग ने RCOM की ओर से दी गई बैंक गारंटियों को चार प्रमुख बैंकों के माध्यम से भुनाया है। इनमें यस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़ी गारंटियां भी शामिल हैं।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कुल बैंक गारंटी की राशि करीब ₹801.91 करोड़ है। यह रकम अब कंपनी की वित्तीय स्थिति और दिवाला प्रक्रिया में चल रहे विभिन्न दावों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
बैंक गारंटी के एनकैश होने का सीधा मतलब यह है कि संबंधित बैंक ने गारंटी के तहत निर्धारित रकम का भुगतान कर दिया है। इसके बाद यह राशि कंपनी की ओर से सरकार के दावे के निपटारे में इस्तेमाल हो सकती है।
दिवाला प्रक्रिया में पहले से फंसी है RCOM
रिलायंस कम्युनिकेशंस की वित्तीय स्थिति लंबे समय से खराब रही है। कंपनी जून 2019 से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के तहत है। ऐसे में कंपनी से जुड़े वित्तीय दावों, संपत्तियों और देनदारियों का निपटारा दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत किया जा रहा है।
वर्तमान में कंपनी का प्रबंधन और संचालन नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की प्रक्रिया के तहत नियुक्त रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) अनीश निरंजन नानावटी द्वारा किया जा रहा है।
दिवाला प्रक्रिया का उद्देश्य कंपनी के कर्ज और देनदारियों का समाधान करना तथा उपलब्ध संपत्तियों के आधार पर संबंधित दावों का निपटारा करना होता है। ऐसे में अब ₹801.91 करोड़ की बैंक गारंटी का भुनाया जाना इस प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
कंपनी के दावों और देनदारियों पर पड़ सकता है असर
RCOM ने कहा है कि बैंक गारंटी के एनकैश होने से कंपनी की देनदारियों और विभिन्न वित्तीय दावों पर असर पड़ सकता है। कंपनी फिलहाल इस कार्रवाई के कानूनी और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा कर रही है।
कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि वह लागू कानूनों और दिवाला एवं दिवालियापन संहिता के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिवाला प्रक्रिया के दौरान किसी कंपनी से जुड़े बड़े वित्तीय दावे उसके समाधान की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, बैंक गारंटी भुनाए जाने के अंतिम प्रभाव का आकलन संबंधित कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अनिल अंबानी की कंपनियां क्यों चर्चा में रही हैं?
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले कारोबारी समूह की कई कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय संकट और कर्ज से जुड़ी चुनौतियों के कारण चर्चा में रही हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस भी टेलीकॉम सेक्टर में भारी प्रतिस्पर्धा और वित्तीय दबाव के बीच कमजोर होती गई।
कभी देश के प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटरों में शामिल रही RCOM को बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कर्ज के दबाव और कारोबार से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के बाद मामला दिवाला समाधान प्रक्रिया तक पहुंच गया।
अब DoT की ओर से ₹801.91 करोड़ की बैंक गारंटी भुनाए जाने से कंपनी की चल रही दिवाला प्रक्रिया में एक नया वित्तीय घटनाक्रम जुड़ गया है।
JP Associates से अलग है RCOM का मामला
दिवाला प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों के मामलों में हाल के वर्षों में JP Associates समेत कई बड़े कॉरपोरेट नाम चर्चा में रहे हैं। हालांकि, प्रत्येक कंपनी का दिवाला मामला अलग होता है और उसके समाधान की प्रक्रिया संबंधित कर्ज, संपत्तियों, दावों और कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
RCOM का मामला भी फिलहाल CIRP के तहत चल रहा है। इसलिए बैंक गारंटी के एनकैश होने का प्रभाव कंपनी के कुल दावों और समाधान प्रक्रिया में किस तरह पड़ेगा, यह आगे की कानूनी और वित्तीय प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।
आगे क्या होगा?
अब RCOM इस कार्रवाई के कानूनी और वित्तीय प्रभावों की समीक्षा कर रही है। कंपनी को दिवाला संहिता के तहत उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार आगे कदम उठाना होगा।
₹801.91 करोड़ की बैंक गारंटी का भुनाया जाना ऐसे समय हुआ है जब कंपनी पहले से ही दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत है। इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस रकम को कंपनी की देनदारियों और दावों की प्रक्रिया में किस तरह शामिल किया जाता है और इसका समाधान योजना पर क्या असर पड़ता है।
फिलहाल कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह मामले की समीक्षा कर रही है और कानून व IBC के प्रावधानों के तहत उचित कदम उठाएगी।
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