Highlights
- MMDR Amendment Bill 2026 में कैप्टिव माइंस से खनिज बिक्री की 50% सीमा हटाई गई।
- लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
- वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सरकार के इस कदम को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा फैसला बताया।
नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र में पास हुआ Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill 2026 (MMDR Amendment Bill 2026) माइनिंग सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया है। इस बिल के पास होने के बाद वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सरकार के फैसले की सराहना की है।
इस नए कानून से माइनिंग कंपनियों को कई तरह की राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन कंपनियों को जिनके पास कैप्टिव माइंस (Captive Mines) हैं। सबसे बड़ा बदलाव कैप्टिव माइंस से खनिज बिक्री पर लगी 50% सीमा हटाना है।
क्या है कैप्टिव माइंस और 50% सीमा हटने का मतलब?
कैप्टिव माइंस वे खदानें होती हैं जिनका इस्तेमाल कोई कंपनी अपने खुद के उद्योग के लिए करती है। उदाहरण के तौर पर स्टील, एल्युमिनियम, पावर और मेटल कंपनियां अपनी जरूरतों के लिए खदानों से खनिज निकालती हैं।
पहले नियमों के तहत कैप्टिव माइंस से निकाले गए खनिज का केवल एक सीमित हिस्सा ही बाजार में बेचा जा सकता था। अब यह सीमा हटने से कंपनियां अतिरिक्त उत्पादन को खुले बाजार में बेच सकेंगी।
इससे:
- कंपनियों की आय बढ़ सकती है।
- खदानों का बेहतर इस्तेमाल होगा।
- उत्पादन क्षमता बढ़ाने को प्रोत्साहन मिलेगा।
- देश में खनिजों की सप्लाई मजबूत होगी।
अनिल अग्रवाल ने सरकार को क्यों दी बधाई?
MMDR Amendment Bill 2026 पास होने के बाद वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के इस कदम की तारीफ की।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारत की जमीन के नीचे मौजूद खनिज संसाधनों में बहुत बड़ी क्षमता है। इन सुधारों से कारोबार को आसान बनाने, उत्पादन बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
वेदांता देश की प्रमुख माइनिंग कंपनियों में शामिल है और इसका कारोबार एल्युमिनियम, जिंक, कॉपर, आयरन ओर समेत कई खनिज क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे में माइनिंग नियमों में बदलाव का कंपनी के कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्रिटिकल मिनरल्स पर सरकार का बड़ा फोकस
नए कानून का एक बड़ा उद्देश्य क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज और उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इनमें शामिल हैं:
- लिथियम
- ग्रेफाइट
- निकेल
- कोबाल्ट
- सोना
- चांदी
ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और आधुनिक तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं।
भारत लंबे समय से इन खनिजों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
माइनिंग लीज में भी मिलेगी ज्यादा आजादी
MMDR Amendment Bill 2026 के तहत माइनिंग लीज धारकों को मौजूदा खदानों में दूसरे खनिजों को शामिल करने की सुविधा दी गई है।
अगर किसी खदान में नए खनिज मिलते हैं तो कंपनियां राज्य सरकार से अनुमति लेकर उन्हें भी निकाल सकेंगी।
खास बात यह है कि:
- लिथियम, ग्रेफाइट, निकेल, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को जोड़ने पर अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा।
- अन्य खनिजों के लिए लागू रॉयल्टी के बराबर राशि देनी होगी।
- नीलामी वाली खदानों में अतिरिक्त खनिजों पर ऑक्शन प्रीमियम लागू हो सकता है।
नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का विस्तार
बिल में National Mineral Exploration Trust (NMET) के दायरे को भी बढ़ाया गया है।
अब यह संस्था केवल खनिज खोज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि:
- खदानों के विकास,
- खनिज उत्पादन,
- नए संसाधनों की पहचान
जैसे क्षेत्रों में भी फंड उपलब्ध करा सकेगी।
इसके साथ ही इसका नाम बदलकर National Mineral Exploration and Development Trust किया जाएगा।
गहरी खदानों के लिए क्षेत्र बढ़ाने की सुविधा
नए नियमों के तहत 200 मीटर से ज्यादा गहराई में मौजूद खनिजों के लिए खदान क्षेत्र बढ़ाने की अनुमति भी दी गई है।
इसके अनुसार:
- कंपोजिट लाइसेंस क्षेत्र में 30% तक वृद्धि हो सकती है।
- माइनिंग लीज क्षेत्र में 10% तक विस्तार संभव होगा।
इससे गहरे क्षेत्रों में मौजूद खनिज संसाधनों का इस्तेमाल आसान हो सकता है।
Mineral Exchange बनाने की तैयारी
सरकार ने खनिजों और धातुओं की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के लिए Mineral Exchange को रेगुलेट करने वाली व्यवस्था बनाने का भी प्रस्ताव रखा है।
इससे खनिज व्यापार में पारदर्शिता बढ़ाने और एक संगठित बाजार विकसित करने में मदद मिल सकती है।
वेदांता जैसी कंपनियों को क्या फायदा होगा?
MMDR Amendment Bill 2026 से बड़ी माइनिंग कंपनियों को कई संभावित फायदे मिल सकते हैं:
- उत्पादन बढ़ाने की स्वतंत्रता
कंपनियां अपनी खदानों का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल कर पाएंगी। - अतिरिक्त खनिज बेचने का मौका
कैप्टिव माइंस से अतिरिक्त उत्पादन बाजार में बेचकर आय बढ़ाई जा सकती है। - नई खदानों की खोज में तेजी
क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस बढ़ने से नए अवसर पैदा होंगे। - निवेश को बढ़ावा
आसान नियमों से घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है।
सरकार का मानना है कि MMDR Amendment Bill 2026 से देश में खनिज संसाधनों की खोज और उत्पादन को गति मिलेगी।
वहीं, वेदांता जैसी कंपनियों के लिए यह बदलाव कारोबार विस्तार और नए अवसरों का रास्ता खोल सकता है। यही वजह है कि अनिल अग्रवाल ने इस सुधार को माइनिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक कदम बताया है।


