Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अगस्त को सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। सोने का भाव ₹800 गिरकर ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी रही।
13 अगस्त से पहले सोने में लगातार सात कारोबारी सत्रों तक तेजी देखने को मिली थी। इस दौरान सोने की कीमत में ₹12,000 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा का उछाल आया था। इतनी तेज बढ़त के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशक ऊंचे स्तरों पर नई खरीदारी से बच रहे हैं, जिसका असर सोने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर संकेतों का असर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेतों का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर पड़ा है। अमेरिका के प्रोड्यूसर प्राइस डेटा उम्मीद से बेहतर रहने के बावजूद सोने में तेजी कायम नहीं रह सकी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह हालिया तेजी के बाद हुई मुनाफावसूली है। निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया है, जिससे खरीदारी का दबाव कम हुआ है।
सात दिन की तेजी के बाद सोने में गिरावट
सोने में 13 अगस्त से पहले लगातार सात कारोबारी सत्रों तक तेजी रही थी। इस तेजी के कारण सोना ₹12,000 से अधिक महंगा हो गया था।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी एसेट में कम समय में तेज उछाल आता है तो उसमें करेक्शन आना सामान्य प्रक्रिया है। फिलहाल निवेशक नए निवेश के लिए कीमतों में और गिरावट का इंतजार कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी देखी गई। सोना करीब 4,351 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
हालांकि, चांदी में तेजी देखने को मिली और इसका भाव 0.33 फीसदी बढ़कर 64.68 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, औद्योगिक मांग और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण चांदी को सपोर्ट मिल रहा है।
क्रूड ऑयल की तेजी से बढ़ी महंगाई की चिंता
14 अगस्त को क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी जारी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो महंगाई बढ़ने का दबाव बढ़ सकता है।
महंगाई बढ़ने की स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। इसका असर सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों पर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव से क्रूड सप्लाई पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसका असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
अगर इस क्षेत्र में तनाव बना रहता है और तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। महंगा कच्चा तेल वैश्विक अर्थव्यवस्था और सोने की कीमतों दोनों को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोने में हालिया गिरावट को विशेषज्ञ सामान्य करेक्शन मान रहे हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर नई खरीदारी करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
बाजार की अगली दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल, फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी।


