US Tariff News: अमेरिका ने भारत समेत 40 देशों पर चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचाने के लिए कथित “शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क” चलाने का आरोप लगाया है। अमेरिका का कहना है कि चीन अपने सामान को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाकर भारी टैरिफ से बचने की कोशिश कर रहा है।
Highlights
- अमेरिका ने भारत समेत 40 देशों पर लगाए आरोप।
- चीन पर तीसरे देशों के जरिए सामान भेजने का दावा।
- ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क पकड़ने के लिए AI का इस्तेमाल करेगा अमेरिका।
- भारत सरकार की ओर से आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत सहित 40 देशों पर आरोप लगाया है कि वे चीन के सामान को अमेरिकी टैरिफ से बचाने में मदद कर रहे हैं। अमेरिका के अनुसार, चीन कथित तौर पर एक “शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क” के जरिए अपने उत्पादों को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका तक पहुंचा रहा है।
अमेरिका का दावा है कि इस प्रक्रिया में सामान की पैकेजिंग, लेबल, इनवॉइस और रूट बदलकर ऐसा दिखाया जाता है कि उत्पाद किसी अन्य देश से आया है, जबकि उसकी असली सप्लाई चीन से जुड़ी होती है।
पीटर नवारो की रिपोर्ट में लगाए गए आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2018 के बाद इस तरह की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, जब अमेरिका ने चीन पर पहली बार सेक्शन 301 के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे।
नवारो के मुताबिक, चीन ने अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए कई देशों का इस्तेमाल किया। इन देशों में मामूली प्रोसेसिंग, री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग, री-इनवॉइसिंग या सिर्फ शिपिंग रूट बदलने जैसी गतिविधियों के जरिए सामान की असली उत्पत्ति छिपाने की कोशिश की गई।
भारत समेत कई बड़े देशों के नाम शामिल
अमेरिका की सूची में भारत के अलावा मेक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कई बड़े व्यापारिक साझेदारों के नाम शामिल हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर साल तीसरे देशों के जरिए अमेरिका पहुंचने वाले कथित अवैध ट्रांस-शिपमेंट वाले सामान की कीमत करीब 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर तक हो सकती है।
हालांकि, रिपोर्ट में शामिल सभी देशों पर सीधे तौर पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया गया है, बल्कि अमेरिका ने उन देशों को संभावित ट्रांस-शिपमेंट रूट के रूप में चिन्हित किया है।
क्या भारत बन रहा है चीन की ढाल?
अमेरिकी आरोपों के बाद भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारत और चीन के बीच लंबे समय से व्यापार असंतुलन और सीमा विवाद जैसे मुद्दे रहे हैं। ऐसे में अमेरिका का यह आरोप नई कूटनीतिक चुनौती पैदा कर सकता है।
हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत पहले भी कई मौकों पर कह चुका है कि वह वैश्विक व्यापार नियमों का पालन करता है और निर्यात से जुड़े सभी नियमों को सख्ती से लागू करता है।
AI से पकड़े जाएंगे संदिग्ध शिपमेंट
अमेरिका ने ट्रांस-शिपमेंट गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ नाम का सिस्टम शिपमेंट डेटा, रूटिंग हिस्ट्री, प्रोडक्ट क्लासिफिकेशन, कंपनियों के स्वामित्व संबंध, उत्पादन क्षमता और अन्य संकेतों का विश्लेषण करेगा।
इस सिस्टम को अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि संदिग्ध व्यापारिक गतिविधियों की पहचान की जा सके।
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का नया मोर्चा
चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक विवाद पिछले कई वर्षों से जारी है। ट्रंप प्रशासन ने पहले भी चीन पर अनुचित व्यापारिक तरीकों का आरोप लगाते हुए कई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए थे।
अब अमेरिका की नजर उन रास्तों पर है जिनके जरिए चीन कथित तौर पर इन टैरिफ को दरकिनार कर सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी असर डाल सकता है।


