RBI Loan Pricing Proposal: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन की ब्याज दर तय करने के तरीके को और पारदर्शी बनाने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य फ्लोटिंग रेट लोन, स्प्रेड और कुल कर्ज लागत को लेकर ग्राहकों को ज्यादा स्पष्ट जानकारी देना है।
RBI के प्रस्तावित “RBI (Interest Rate on Loans and Advances) Directions, 2026” के तहत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), को-ऑपरेटिव बैंक, ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और NBFC (हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित) आएंगे। प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना है।
हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट है और अंतिम नियम आने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी।
फ्लोटिंग रेट लोन के लिए तय होगा रीसेट फ्रेमवर्क
RBI के नए प्रस्ताव के अनुसार, लोन की ब्याज दर तय करने के लिए लेंडर्स को इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क के साथ रिस्क-बेस्ड स्प्रेड का इस्तेमाल करना होगा।
लोन एग्रीमेंट में ग्राहक को पहले से जानकारी देनी होगी कि:
- लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है।
- ब्याज दर कितनी अवधि में रीसेट होगी।
- रीसेट की तारीख क्या होगी।
फ्लोटिंग रेट लोन के लिए बेंचमार्क रीसेट अवधि अधिकतम तीन महीने से ज्यादा नहीं हो सकती। हालांकि, कुछ छोटी रेगुलेटेड संस्थाओं जैसे बेस लेयर NBFC को इसमें छूट मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्राहकों को यह समझने में आसानी होगी कि उनकी EMI में बदलाव किस वजह से हो रहा है।
EMI कम नहीं होगी, लेकिन ब्याज बदलाव समझना आसान होगा
RBI के नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि फ्लोटिंग रेट लोन लेने वालों की EMI हमेशा स्थिर रहेगी।
अगर RBI रेपो रेट या संबंधित बेंचमार्क बढ़ता है तो लोन महंगा हो सकता है और EMI भी बढ़ सकती है।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ब्याज दर में बदलाव की प्रक्रिया को स्पष्ट बनाना है, ताकि ग्राहक अचानक होने वाले बदलाव से बच सकें।
लोन स्प्रेड बदलने पर लगेगी पाबंदी
RBI ने लोन स्प्रेड को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित किए हैं।
लोन की कुल ब्याज दर में कई हिस्से शामिल होते हैं:
- क्रेडिट रिस्क प्रीमियम
- ऑपरेटिंग कॉस्ट
- टर्म प्रीमियम
- बिजनेस स्ट्रैटेजी से जुड़े चार्ज
प्रस्ताव के अनुसार:
- क्रेडिट रिस्क प्रीमियम में बदलाव ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल बदलने पर किया जा सकता है।
- फ्लोटिंग रेट लोन में स्प्रेड के अन्य हिस्सों को तीन साल तक बदला नहीं जा सकेगा।
तीन साल की अवधि लोन मिलने की तारीख या पिछली बार स्प्रेड बदलने की तारीख (जो भी बाद में हो) से शुरू होगी।
इससे ग्राहकों को अपनी EMI और भविष्य की लागत का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
₹50,000 तक के छोटे लोन के लिए APR सीमा का प्रस्ताव
RBI ने छोटे लोन लेने वालों के लिए भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है।
₹50,000 तक के पर्सनल लोन और माइक्रोफाइनेंस लोन के लिए लेंडर्स को Annual Percentage Rate (APR) की सीमा तय करनी पड़ सकती है।
APR में केवल ब्याज ही नहीं बल्कि सभी अतिरिक्त चार्ज और फीस भी शामिल होंगे।
इसका फायदा यह होगा कि ग्राहक अलग-अलग लोन ऑफर की वास्तविक लागत की तुलना आसानी से कर सकेंगे।
कई बार कम ब्याज दर दिखाकर लोन दिया जाता है, लेकिन प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के कारण वास्तविक लागत काफी ज्यादा हो जाती है। नए नियम इस समस्या को कम कर सकते हैं।
ब्याज गणना का तरीका होगा एक जैसा
RBI ने ब्याज की गणना के लिए भी एक समान तरीका प्रस्तावित किया है।
ज्यादातर लोन में:
- ब्याज रोजाना घटते बैलेंस के आधार पर कैलकुलेट होगा।
- Actual/Actual Day Count Convention का इस्तेमाल किया जाएगा।
- ब्याज गणना में पारदर्शिता बढ़ेगी।
कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ लोन में अलग नियम लागू हो सकते हैं।
मौजूदा लोन 2029 तक नए नियमों में आएंगे
RBI ने सुझाव दिया है कि मौजूदा बेंचमार्क-लिंक्ड फ्लोटिंग रेट लोन को भी नए फ्रेमवर्क में शामिल किया जाए।
इसके लिए:
- 1 अप्रैल 2029 तक सभी मौजूदा लोन को नए सिस्टम में मैप किया जा सकता है।
- ग्राहक की मंजूरी जरूरी होगी।
- बदलाव के लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी।
- नई ब्याज दर पुरानी लागू दर से ज्यादा नहीं हो सकती।
इससे बैंकों और NBFC को अपने सिस्टम अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
NBFC के फ्लोटिंग लोन अपने-आप रेपो रेट से लिंक नहीं होंगे
RBI के प्रस्ताव को लेकर एक बड़ी गलतफहमी यह है कि सभी फ्लोटिंग रेट लोन सीधे रेपो रेट से जुड़ जाएंगे।
ऐसा नहीं है।
प्रस्ताव के अनुसार:
- कमर्शियल बैंकों को फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन और MSME लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना होगा।
- NBFC, RRB, को-ऑपरेटिव बैंक और कुछ अन्य संस्थाओं के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ना वैकल्पिक रहेगा।
इसलिए NBFC से फ्लोटिंग रेट लोन लेने वालों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि उनका लोन सीधे RBI रेपो रेट के अनुसार बदल जाएगा।
कर्ज लेने वालों के लिए क्या बदलेगा?
RBI के इस प्रस्ताव से ग्राहकों को संभावित रूप से ये फायदे मिल सकते हैं:
- ब्याज दर बदलाव की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी।
- EMI में बदलाव के कारण समझना आसान होगा।
- छोटे लोन की वास्तविक लागत सामने आएगी।
- लोन स्प्रेड में अचानक बदलाव पर रोक लगेगी।
- अलग-अलग लोन ऑफर की तुलना करना आसान होगा।
हालांकि, अंतिम असर RBI के फाइनल नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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