Success Story of Abhijeet Anand: बिहार के भागलपुर से आने वाले अभिजीत आनंद ने IIT धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद करीब 8.5 साल तक मल्टीनेशनल कंपनी में अलग-अलग देशों में काम किया। अच्छी कॉर्पोरेट नौकरी होने के बावजूद उनके मन में अपना कारोबार शुरू करने का विचार आया। आखिरकार 2022 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने सपने पर काम शुरू किया। आज उनका कॉफी स्टार्टअप abcoffee करीब ₹75 करोड़ के ARR (Annual Recurring Revenue) पर पहुंच चुका है और देश के 6 प्रमुख शहरों में 95 से ज्यादा आउटलेट संचालित कर रहा है।
रोमानिया में शुरू हुई कॉफी बिजनेस की कहानी

अभिजीत आनंद ने IIT धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में करीब 8.5 साल तक नौकरी की और इस दौरान कई देशों में काम किया।
रोमानिया में रहने के दौरान उन्हें रोज कॉफी पीने की आदत लग गई। लेकिन 2021 में भारत लौटने के बाद उन्होंने एक बड़ा अंतर महसूस किया। भारत में अच्छी कॉफी पीने के लिए अक्सर ₹200-300 तक खर्च करने पड़ते थे।
अभिजीत को लगा कि कॉफी की कीमत में सिर्फ कॉफी का खर्च नहीं होता, बल्कि कैफे के स्पेस, वाई-फाई और एंबिएंस का खर्च भी ग्राहक से वसूला जाता है। यहीं से उन्हें किफायती लेकिन अच्छी क्वालिटी की कॉफी उपलब्ध कराने का बिजनेस आइडिया मिला।
12 राज्यों के 20 शहरों में किया रिसर्च

सिर्फ आइडिया के भरोसे कारोबार शुरू करने के बजाय अभिजीत ने पहले बाजार को समझने का फैसला किया। उन्होंने भारत के 12 राज्यों के करीब 20 शहरों में लगभग 800 किलोमीटर खुद कार चलाकर यात्रा की और 10,000 से ज्यादा लोगों से बातचीत की।
इस रिसर्च से उन्हें पता चला कि भारत में कॉफी की मांग काफी ज्यादा है। समस्या मांग की नहीं, बल्कि कीमत की थी। महंगी कॉफी की वजह से बड़ी संख्या में लोग इसे रोजाना की आदत नहीं बना पा रहे थे।
यही वह गैप था जिसे अभिजीत ने अपने बिजनेस मॉडल का आधार बनाया।
₹13 लाख की सेविंग से शुरू किया पहला आउटलेट

मार्केट रिसर्च के बाद अभिजीत ने अपनी जमा पूंजी में से करीब ₹13 लाख लगाकर जून 2022 में मुंबई के वर्सोवा में abcoffee का पहला आउटलेट शुरू किया।
हालांकि शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही। पहले महीने में कई दिनों में सिर्फ 6 से 20 कप कॉफी ही बिकती थी। पहले महीने का कुल रेवेन्यू लगभग ₹1 लाख रहा।
अभिजीत खुद सुबह 6 बजे से लेकर आधी रात तक स्टोर पर मौजूद रहते थे। वह शटर खोलने से लेकर बंद करने तक का काम देखते और ग्राहकों से सीधे फीडबैक लेते थे।
इस दौरान कई लोग उनसे सवाल करते थे कि IIT से पढ़ाई करने और कॉर्पोरेट नौकरी का अनुभव होने के बाद वह यह काम क्यों कर रहे हैं। लेकिन अभिजीत ने अपने फैसले पर भरोसा बनाए रखा।
उनका मानना था कि अगर किसी प्रोडक्ट की खपत को बड़े स्तर पर बढ़ाना है तो सिर्फ देश के छोटे से हिस्से को टारगेट करने के बजाय बड़ी आबादी की जरूरत और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखना होगा।
‘Grab-and-Go’ मॉडल बना बिजनेस की ताकत

abcoffee ने अपने लिए एक ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार किया जिसमें ग्राहकों को कैफे में लंबे समय तक बैठने के बजाय जल्दी से कॉफी लेने की सुविधा मिलती है। कंपनी का मॉडल ‘Grab-and-Go’ कॉन्सेप्ट पर आधारित है।
इसकी मेनू रेंज करीब ₹97 से शुरू होती है। इसमें हॉट और कोल्ड क्लासिक्स के अलावा सिग्नेचर ब्रू, मैचा रेंज और प्रोटीन ड्रिंक्स जैसे विकल्प शामिल हैं।
ग्राहकों को जोड़ने के लिए कंपनी ने लॉयल्टी प्रोग्राम और सब्सक्रिप्शन मॉडल भी पेश किया है। सब्सक्रिप्शन के जरिए ग्राहक रियायती कीमत पर पहले से कॉफी बुक कर सकते हैं।
इस मॉडल ने कंपनी को ग्राहकों के बीच दोबारा खरीदारी बढ़ाने और कॉफी को रोजमर्रा की आदत बनाने में मदद की।
95 से ज्यादा आउटलेट, हर महीने 3.5 लाख कप कॉफी
कुछ ही वर्षों में अभिजीत का स्टार्टअप तेजी से विस्तार कर चुका है। कंपनी के दिल्ली-NCR में करीब 38 और मुंबई में करीब 50 आउटलेट हैं। इसके अलावा यह बेंगलुरु समेत 6 प्रमुख शहरों में भी मौजूद है।
कंपनी के सभी आउटलेट्स से हर महीने करीब 3.5 लाख कप कॉफी बिकने का दावा किया गया है।
तेजी से विस्तार के बावजूद कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती थी—हर आउटलेट पर कॉफी का स्वाद और क्वालिटी एक जैसी बनाए रखना।
इसके लिए कंपनी अपने पार्टनर्स को करीब 14 दिनों की ट्रेनिंग देती है। साथ ही इन-हाउस टेक्नोलॉजी के जरिए अलग-अलग आउटलेट्स के ऑपरेशंस की निगरानी की जाती है।
निवेशकों का भी मिला भरोसा
abcoffee को अपने विस्तार के लिए निवेशकों का समर्थन भी मिला है। कंपनी ने Nexus Venture Partners और Tanglin Venture Partners जैसे निवेशकों से करीब 1.1 करोड़ डॉलर की फंडिंग हासिल की है।
कंपनी के रेवेन्यू में भी तेजी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसका रेवेन्यू करीब ₹5 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग ₹20 करोड़ हो गया।
अब कंपनी करीब ₹75 करोड़ के ARR पर काम कर रही है।
₹100 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य
अभिजीत आनंद अब कंपनी को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 तक करीब ₹100 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है।
इसके बाद उनकी नजर सिर्फ भारत तक सीमित रहने पर नहीं है। अभिजीत अगले पांच वर्षों में abcoffee को एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
उनकी कहानी यह दिखाती है कि किसी बड़े संस्थान से पढ़ाई और अच्छी कॉर्पोरेट नौकरी सफलता का अंतिम पड़ाव नहीं है। सही बाजार की समस्या पहचानकर, उस पर गहराई से रिसर्च करके और शुरुआती मुश्किलों के बावजूद लगातार काम करने से एक साधारण आइडिया को भी बड़े कारोबार में बदला जा सकता है।


