Tata Group Chairman Successor: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स ने नई चयन समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि नए चेयरमैन का नाम इस साल के अंत तक सामने आ सकता है।
टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स ने 13 अगस्त को टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए नई कमेटी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक टाटा समूह को नया चेयरमैन मिल सकता है।
एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह 20 फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे।
टाटा समूह के अंदर से चेयरमैन चुनने पर जोर
सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स की प्राथमिकता टाटा समूह के अंदर से ही किसी अनुभवी एग्जिक्यूटिव को नया चेयरमैन बनाने की हो सकती है। इसकी वजह यह है कि अंदर का व्यक्ति पहले से ही समूह की कार्यप्रणाली, बिजनेस स्ट्रक्चर और गवर्नेंस सिस्टम को अच्छी तरह समझता होगा।
वहीं, बाहरी उम्मीदवार को टाटा समूह की जटिल संरचना और अलग-अलग कंपनियों के कामकाज को समझने में अधिक समय लग सकता है।
चयन समिति के गठन के बाद नए चेयरमैन की तलाश में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लगने की संभावना जताई जा रही है।
इन नामों पर हो सकती है चर्चा
टाटा समूह में कई वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिनके नाम नए चेयरमैन के लिए चर्चा में आ सकते हैं।
इनमें प्रमुख नाम हैं:
- टीवी नरेंद्रन – टाटा स्टील के सीईओ और एमडी
- प्रवीर सिन्हा – टाटा पावर के सीईओ और एमडी
टीवी नरेंद्रन की उम्र 61 साल है और वह लंबे समय से टाटा समूह के साथ जुड़े हुए हैं। वहीं प्रवीर सिन्हा 64 साल के हैं और ऊर्जा क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं।
हालांकि, अंतिम फैसला चयन समिति और टाटा ट्रस्ट्स की मंजूरी के बाद ही होगा।
कानूनी अड़चन बन सकती है चुनौती
टाटा संस के नए चेयरमैन की नियुक्ति प्रक्रिया में एक संभावित कानूनी चुनौती भी सामने आ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) से जुड़े मामले के कारण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के निर्देश के बाद ट्रस्ट की बैठक बुलाने पर रोक लगी हुई है। टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को एकतरफा बताया था और कहा था कि एसआरटीटी को नोटिस दिए बिना यह निर्देश जारी किया गया।
एसआरटीटी टाटा के दो प्रमुख ट्रस्ट्स में से एक है, इसलिए इस मामले का असर चेयरमैन चयन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
पहले भी बनाई गई थी चयन समिति
टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए पहले भी चयन समितियां बनाई जा चुकी हैं।
2010 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इसमें टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधियों के अलावा टाटा संस के निदेशक और स्वतंत्र सदस्य शामिल थे।
इसके बाद 2016 में साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद दोबारा चेयरमैन चयन समिति बनाई गई। इस समिति की अध्यक्षता रतन टाटा ने की थी। इसी समिति ने एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का नया चेयरमैन चुना था।
टाटा कंपनियों के शेयरों पर दिखा दबाव
उत्तराधिकारी की खबरों के बीच 14 अगस्त को टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।
दोपहर 12:15 बजे:
- TCS का शेयर करीब 0.96% गिरकर ₹2,352 पर कारोबार कर रहा था।
- Titan का शेयर 0.18% बढ़कर ₹5,072 पर था।
- Tata Steel का शेयर 1.24% गिरकर ₹182.55 पर पहुंच गया।
- Tata Motors CV का शेयर 0.85% बढ़कर ₹478.90 पर था।
- Tata Motors PV का शेयर करीब 4.91% गिरकर ₹332 पर कारोबार कर रहा था।
- Tata Consumer Products का शेयर 0.41% गिरकर ₹1,086 पर था।
निवेशकों की नजर अब नए चेयरमैन के नाम पर
टाटा समूह भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक है। ऐसे में नए चेयरमैन का चुनाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि समूह की भविष्य की रणनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है।
निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि टाटा ट्रस्ट्स किस नाम पर सहमति बनाते हैं और नया नेतृत्व समूह की कंपनियों को किस दिशा में आगे ले जाता है।


