SEBI New Rules: शेयर बाजार नियामक सेबी ने एक्रेडिटेड इन्वेस्टर (Accredited Investor) के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए प्रस्ताव के तहत अगर किसी व्यक्ति के पास सिक्योरिटीज मार्केट में कम से कम ₹5 करोड़ का निवेश या संपत्ति है, तो वह एक्रेडिटेड इन्वेस्टर बनने के योग्य हो सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए ₹2 करोड़ की सालाना आय या ₹7.5 करोड़ की नेटवर्थ की मौजूदा शर्त जरूरी नहीं होगी।
सेबी ने क्या प्रस्ताव दिया?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक्रेडिटेड इन्वेस्टर के लिए पात्रता नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ऐसे व्यक्ति जिनके पास सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े एसेट्स में कम से कम ₹5 करोड़ का निवेश है, उन्हें एक्रेडिटेड इन्वेस्टर का दर्जा देने पर विचार किया गया है।
वहीं, कंपनियों और ट्रस्ट जैसे संस्थानों के लिए यह सीमा ₹20 करोड़ रखने का प्रस्ताव है। सेबी का मानना है कि इस बदलाव से बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक इस श्रेणी में आ सकेंगे, जिनके पास पर्याप्त बाजार निवेश है, लेकिन वे मौजूदा आय या नेटवर्थ की शर्त पूरी नहीं करते।
अभी एक्रेडिटेड इन्वेस्टर बनने के क्या नियम हैं?
मौजूदा व्यवस्था में एक्रेडिटेड इन्वेस्टर बनने के लिए मुख्य रूप से वित्तीय क्षमता से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं। इनमें से एक रास्ता कम से कम ₹2 करोड़ की सालाना आय है।
दूसरे विकल्प के तहत निवेशक की कुल नेटवर्थ कम से कम ₹7.5 करोड़ होनी चाहिए। इसके अलावा नेटवर्थ और आय से जुड़ी निर्धारित शर्तों के संयोजन के आधार पर भी पात्रता तय की जाती है।
अब सेबी का नया प्रस्ताव उन निवेशकों के लिए एक अलग रास्ता खोल सकता है, जिनके पास शेयर बाजार और उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में पर्याप्त निवेश है।
क्या है एक्रेडिटेड इन्वेस्टर?
एक्रेडिटेड इन्वेस्टर ऐसे निवेशक होते हैं जिन्हें उनकी वित्तीय क्षमता और निवेश से जुड़े अनुभव के आधार पर कुछ विशेष निवेश अवसरों तक पहुंच दी जा सकती है।
ऐसे निवेशक AIF (Alternative Investment Fund) और PMS (Portfolio Management Services) जैसे अपेक्षाकृत जटिल और जोखिम वाले निवेश विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। इन उत्पादों में जोखिम सामान्य निवेश विकल्पों की तुलना में अधिक हो सकता है, इसलिए इनके लिए निवेशक की वित्तीय क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
₹5 करोड़ के निवेश में कौन-कौन से एसेट शामिल होंगे?
सेबी के प्रस्ताव के अनुसार सिक्योरिटीज मार्केट में रखे गए कई तरह के निवेश को इस गणना में शामिल किया जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डीमैट खाते में रखे शेयर और बॉन्ड।
- म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश।
- REITs और InvITs की यूनिट्स।
- AIF की यूनिट्स।
- अनलिस्टेड सिक्योरिटीज।
- विदेशों में रखे गए पात्र शेयर और अन्य सिक्योरिटीज।
इसका मतलब यह है कि केवल बैंक बैलेंस या मकान जैसी संपत्तियों पर निर्भर रहने के बजाय निवेशक की वास्तविक सिक्योरिटीज मार्केट होल्डिंग को पात्रता के आधार के रूप में देखा जा सकता है।
करीब 3.7 लाख नए निवेशक आ सकते हैं दायरे में
सेबी के अनुमान के मुताबिक प्रस्तावित बदलाव से करीब 3.7 लाख अतिरिक्त निवेशक एक्रेडिटेड इन्वेस्टर के दायरे में आ सकते हैं।
वर्तमान में इस श्रेणी में लगभग 96,000 निवेशक बताए जाते हैं। प्रस्ताव लागू होने पर पात्र निवेशकों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है। इससे AIF, PMS और दूसरे वैकल्पिक निवेश उत्पादों के लिए निवेशकों का आधार भी बढ़ सकता है।
वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी होगी आसान
नए प्रस्ताव के तहत निवेशक को अपनी पात्रता साबित करने के लिए वित्तीय दस्तावेज देने होंगे। इसके लिए eCAS (डिमैट समरी स्टेटमेंट), ब्रोकर स्टेटमेंट या चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाणपत्र इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे निवेशक के पास मौजूद पात्र सिक्योरिटीज और उनके मूल्य को सत्यापित करने में मदद मिलेगी। प्रस्ताव में NRI और विदेशी निवेशकों के लिए भी एक्रेडिटेड इन्वेस्टर फ्रेमवर्क को आसान बनाने की बात कही गई है।
अभी प्रस्ताव है, नियम लागू नहीं हुआ
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सेबी का यह बदलाव अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। नियामक ने इस प्रस्ताव पर आम जनता और बाजार से जुड़े विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं।
सेबी ने सुझाव और टिप्पणियां देने के लिए 3 सितंबर तक का समय दिया है। प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर प्रस्ताव में बदलाव किए जा सकते हैं और इसके बाद ही अंतिम नियम लागू होगा।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन निवेशकों को मिल सकता है जिनके पास बाजार में बड़ी रकम निवेश है, लेकिन उनकी सालाना आय या कुल नेटवर्थ मौजूदा मानकों के मुताबिक नहीं है।
उदाहरण के लिए, किसी निवेशक के पास शेयर, म्यूचुअल फंड, REITs और अन्य पात्र सिक्योरिटीज में कुल ₹5 करोड़ का निवेश है, लेकिन उसकी सालाना आय ₹2 करोड़ नहीं है। प्रस्ताव लागू होने के बाद वह केवल अपनी बाजार निवेश क्षमता के आधार पर एक्रेडिटेड इन्वेस्टर बनने के योग्य हो सकता है।
हालांकि, एक्रेडिटेड इन्वेस्टर का दर्जा मिलने का मतलब यह नहीं है कि निवेश पर मुनाफा तय है। AIF और PMS जैसे उत्पादों में जोखिम बना रहता है। इसलिए किसी भी निवेश से पहले उसके जोखिम, फीस, लॉक-इन और रिटर्न की संभावनाओं को समझना जरूरी है।


