Youth-First Policy: भारत को दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है। ऐसे में कंपनियों के वर्कफोर्स में युवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी भी बदलते कॉर्पोरेट कल्चर की तस्वीर दिखाती है। अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता एल्युमिनियम मेटल इसी वजह से चर्चा में है। कंपनी के कर्मचारियों की औसत उम्र करीब 31 वर्ष है, जबकि उसके कुल वर्कफोर्स में 65% कर्मचारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं।
31 साल है कर्मचारियों की औसत उम्र
नई दिल्ली: भारत में युवाओं की बड़ी आबादी को देखते हुए कंपनियां भी अपनी हायरिंग रणनीति में युवा प्रतिभाओं पर तेजी से फोकस कर रही हैं। वेदांता एल्युमिनियम मेटल इसका एक उदाहरण है। कंपनी में कर्मचारियों की औसत उम्र 31 वर्ष बताई गई है। इसके अलावा, कंपनी के वर्कफोर्स का करीब 65% हिस्सा 35 वर्ष से कम उम्र के कर्मचारियों का है।
यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब देश में कंपनियां तकनीक, ऑटोमेशन और डिजिटल बदलाव के साथ अपने कार्यस्थल को तेजी से बदल रही हैं।
इंटरनेशनल यूथ डे पर सामने आए आंकड़े
12 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस (International Youth Day) के अवसर पर युवाओं और रोजगार से जुड़ा यह आंकड़ा सामने आया। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, वेदांता एल्युमिनियम मेटल भारत के युवा औद्योगिक नियोक्ताओं में शामिल है।
कंपनी ने हाल ही में 1,500 से अधिक युवा प्रोफेशनल्स को IIT, IIM और NIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जोड़ा है। इन युवाओं को फुल-टाइम नौकरियों के साथ-साथ इंटर्नशिप के जरिए भी कंपनी में अवसर दिए गए हैं।
कंपनी की युवा-केंद्रित रणनीति का उद्देश्य सिर्फ नई भर्तियां करना नहीं, बल्कि ऐसे प्रोफेशनल्स को तैयार करना भी है जो बदलती इंडस्ट्री की तकनीकी जरूरतों को समझ सकें।
मेटल और एनर्जी सेक्टर में युवाओं की बढ़ती जरूरत क्यों?
परंपरागत रूप से मेटल, ऑयल एंड गैस और इलेक्ट्रिसिटी जैसे सेक्टर में अनुभव को काफी महत्व दिया जाता रहा है। इन उद्योगों में परिचालन विशेषज्ञता और लंबे समय का अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लेकिन अब इन सेक्टर में भी तेजी से डिजिटल बदलाव हो रहा है। कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, ऑटोमेशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपने कामकाज में शामिल कर रही हैं।
इसके साथ ही सस्टेनेबिलिटी और ऊर्जा दक्षता पर भी जोर बढ़ा है। ऐसे माहौल में उन प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है, जो पारंपरिक इंडस्ट्री की समझ के साथ नई तकनीकों का इस्तेमाल करना जानते हों।
युवा कर्मचारियों के पास डिजिटल टूल्स, नई तकनीक और डेटा आधारित काम करने की क्षमता होने के कारण कंपनियां उन्हें तेजी से अपने वर्कफोर्स का हिस्सा बना रही हैं।
कैंपस स्ट्रेटेजी पर कंपनी का जोर
वेदांता ग्रुप की चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर नेहा शर्मा के मुताबिक, युवाओं को कंपनी से जोड़ने में ग्रुप की कैंपस स्ट्रेटेजी अहम भूमिका निभा रही है।
हाल के कैंपस सीजन के दौरान वेदांता ने 15,000 से अधिक विद्यार्थियों के साथ संपर्क किया। इसके लिए लीडरशिप इंटरैक्शन, प्रतियोगिताओं, करियर से जुड़े सेशन और दूसरी कैंपस गतिविधियों का सहारा लिया गया।
इन गतिविधियों के जरिए छात्रों को कंपनी के कारोबार के बड़े पैमाने और उसकी जटिलताओं को समझने का मौका मिला। वहीं, कंपनी को भी ऐसे युवाओं की पहचान करने में मदद मिली, जिनके पास तेजी से तकनीक आधारित हो रहे कार्यक्षेत्र के लिए जरूरी क्षमताएं हैं।
93% नई भर्तियां फ्रेशर्स या शुरुआती करियर वालों की
वेदांता की पिछली भर्ती प्रक्रिया में भी युवाओं को प्राथमिकता देने की तस्वीर दिखाई दी। कंपनी की नई भर्तियों में 93% लोग फ्रेश ग्रेजुएट्स या अपने करियर के शुरुआती चरण में मौजूद प्रोफेशनल्स थे।
इससे पता चलता है कि कंपनी अनुभवी कर्मचारियों के साथ-साथ नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को भी बड़े पैमाने पर अपने संगठन का हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है।
युवा कर्मचारियों को शुरुआत से ही बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स और तकनीकी वातावरण का अनुभव मिलने से उनके करियर के विकास के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
भारत में युवा आबादी बड़ी ताकत
भारत की सबसे बड़ी ताकतों में उसकी युवा आबादी को भी शामिल किया जाता है। देश की करीब 65% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की बताई जाती है।
18 से 29 वर्ष की उम्र के मतदाताओं की हिस्सेदारी भी कुल मतदाताओं में करीब 22.8% बताई गई है। ऐसे में रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा और उद्यमिता जैसे मुद्दों में युवाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है। बड़ी युवा आबादी कंपनियों को व्यापक टैलेंट पूल उपलब्ध कराती है, जबकि युवाओं को नई तकनीक और तेजी से बदलते उद्योगों में रोजगार के नए अवसर मिलते हैं।
Youth-First Policy से बदल रहा कॉर्पोरेट वर्कफोर्स
वेदांता एल्युमिनियम का उदाहरण दिखाता है कि भारत में औद्योगिक क्षेत्र का वर्कफोर्स भी बदल रहा है। जहां पहले भारी उद्योगों में लंबे अनुभव वाले कर्मचारियों पर अधिक निर्भरता होती थी, वहीं अब तकनीकी बदलाव के कारण युवा और डिजिटल स्किल वाले प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है।
कर्मचारियों की 31 वर्ष की औसत उम्र, 35 वर्ष से कम उम्र के 65% कर्मचारी, कैंपस से हजारों छात्रों तक पहुंच और नई भर्तियों में 93% फ्रेशर्स या शुरुआती करियर प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी कंपनी की युवा-केंद्रित हायरिंग रणनीति को दर्शाती है।
आने वाले वर्षों में AI, ऑटोमेशन और डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इंडस्ट्री में ऐसे युवा प्रोफेशनल्स की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।


