दुनिया में किसी बिजनेस की सफलता सिर्फ उसकी कमाई, प्रोडक्ट या ग्राहकों पर निर्भर नहीं करती। साइबर सुरक्षा से लेकर युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और बदलते नियमों तक कई ऐसे जोखिम हैं, जो किसी भी कंपनी के कारोबार को अचानक प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि दुनियाभर की कंपनियां अब इन खतरों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो रही हैं।
हाल ही में जारी Allianz Risk Barometer 2026 में दुनिया के कारोबारियों और रिस्क एक्सपर्ट्स की चिंताओं की तस्वीर सामने आई है। इस सर्वे में 97 देशों के 3,338 रिस्क एक्सपर्ट्स की राय शामिल की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अटैक लगातार पांचवें साल दुनियाभर के कारोबार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। हालांकि, इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ा खतरा तेजी से बढ़ा है और यह पहली बार शीर्ष जोखिमों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
साइबर अटैक बना कंपनियों का सबसे बड़ा डर
सर्वे में शामिल 42 फीसदी रिस्क एक्सपर्ट्स ने साइबर अटैक को अपने बिजनेस के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। यानी कंपनियों को अब सिर्फ डेटा चोरी की चिंता नहीं है, बल्कि साइबर हमले के कारण पूरे कारोबार के ठप पड़ने, ग्राहकों का भरोसा टूटने और आर्थिक नुकसान का खतरा भी दिखाई दे रहा है।
पिछले कुछ समय में दुनिया की कई बड़ी कंपनियां साइबर हमलों की चपेट में आ चुकी हैं। Jaguar Land Rover, Salesforce Ecosystem, Marks & Spencer, SK Telecom और Qantas जैसी कंपनियों से जुड़े साइबर हमलों ने यह दिखाया है कि बड़े और स्थापित कारोबारी भी डिजिटल हमलों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
आज कंपनियों का कारोबार तेजी से डिजिटल हो रहा है। ऐसे में एक साइबर हमला सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। इससे सप्लाई चेन, पेमेंट सिस्टम, ग्राहक डेटा और रोजमर्रा के ऑपरेशन तक प्रभावित हो सकते हैं।
AI का खतरा अचानक इतना क्यों बढ़ गया?
इस सर्वे की सबसे दिलचस्प बात AI से जुड़ी चिंता है। पिछले साल AI से संबंधित जोखिम इस सूची में दसवें स्थान पर था, लेकिन 2026 में यह सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
सर्वे में 32 फीसदी विशेषज्ञों ने AI को बिजनेस के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना। इसका मतलब है कि कंपनियां AI को केवल नई तकनीक और अवसर के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि इससे जुड़े संभावित जोखिमों को भी गंभीरता से ले रही हैं।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को गलत या भ्रामक आउटपुट, डेटा सुरक्षा, साइबर हमलों में AI के इस्तेमाल, बौद्धिक संपदा और कर्मचारियों द्वारा AI के गलत इस्तेमाल जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि आने वाले समय में AI गवर्नेंस और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों की प्राथमिकताओं में और ऊपर जा सकते हैं।
बिजनेस इंटरप्शन तीसरे नंबर पर
कंपनियों की चिंता सिर्फ साइबर हमलों और AI तक सीमित नहीं है। 29 फीसदी विशेषज्ञों ने बिजनेस इंटरप्शन को सबसे बड़ा जोखिम बताया और यह सूची में तीसरे स्थान पर रहा।
किसी कंपनी का उत्पादन रुकना, सप्लाई चेन में बाधा आना, लॉजिस्टिक्स प्रभावित होना या किसी महत्वपूर्ण सिस्टम के काम न करने से कारोबार को बड़ा नुकसान हो सकता है। खासकर वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनियों के लिए एक देश में पैदा हुई समस्या दूसरे देशों के कारोबार को भी प्रभावित कर सकती है।
नए नियम और कानून भी बड़ी चुनौती
दुनियाभर की सरकारें डिजिटल इकोनॉमी, AI, डेटा प्राइवेसी, पर्यावरण और कारोबार से जुड़े नियमों में बदलाव कर रही हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए बदलते कानूनों के साथ तालमेल बैठाना भी चुनौती बनता जा रहा है।
सर्वे में 26 फीसदी विशेषज्ञों ने नए नियमों और कानूनों को बिजनेस के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया। कंपनियों को नियमों में बदलाव के कारण अपनी रणनीति, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल सिस्टम में बदलाव करना पड़ सकता है।
प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन का असर
प्राकृतिक आपदाएं भी कंपनियों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई हैं। 21 फीसदी विशेषज्ञों ने प्राकृतिक आपदाओं को अपने कारोबार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बताया।
बाढ़, तूफान, भूकंप, अत्यधिक गर्मी और अन्य प्राकृतिक घटनाएं फैक्ट्रियों, गोदामों, परिवहन नेटवर्क और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन का असर लंबे समय में कारोबार की लागत और ऑपरेशन पर भी पड़ सकता है।
सर्वे में 19 फीसदी विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को बिजनेस के लिए सबसे बड़ा खतरा माना। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अब क्लाइमेट रिस्क को केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि कारोबारी जोखिम के रूप में भी देख रही हैं।
युद्ध और राजनीतिक हिंसा भी चिंता का विषय
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध का असर वैश्विक कारोबार पर भी पड़ रहा है। ईरान से जुड़े संघर्षों और अन्य भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने ऊर्जा, शिपिंग, सप्लाई चेन और व्यापारिक गतिविधियों पर असर डालने की आशंकाएं बढ़ाई हैं।
सर्वे में 15 फीसदी रिस्क एक्सपर्ट्स ने युद्ध और राजनीतिक हिंसा को बिजनेस के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। किसी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने पर कंपनियों को कच्चे माल की सप्लाई, परिवहन लागत, बीमा और बाजार तक पहुंच जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
आग, आर्थिक बदलाव और मार्केट स्विंग्स का भी डर
रिपोर्ट के मुताबिक, 14 फीसदी विशेषज्ञों ने मैक्रोइकोनॉमिक बदलावों को कारोबार के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना। ब्याज दरों, महंगाई, आर्थिक विकास और वैश्विक मांग में बदलाव कंपनियों की कमाई और निवेश योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं 13 फीसदी विशेषज्ञों ने आग और धमाकों को प्रमुख कारोबारी जोखिम माना। इतने ही यानी 13 फीसदी विशेषज्ञों ने मार्केट स्विंग्स को सबसे बड़ा खतरा बताया।
इससे साफ है कि कंपनियों के सामने जोखिमों की तस्वीर अब काफी व्यापक हो गई है। एक तरफ डिजिटल दुनिया से जुड़े साइबर अटैक और AI हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अस्थिरता जैसे पारंपरिक जोखिम भी मौजूद हैं।
कंपनियों के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक?
Allianz Risk Barometer 2026 के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों को अब किसी एक खतरे से निपटने की तैयारी करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें साइबर सुरक्षा मजबूत करने के साथ AI के सुरक्षित इस्तेमाल, सप्लाई चेन की मजबूती, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और बदलते नियमों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।
सबसे खास बदलाव AI को लेकर देखने को मिला है। एक साल में दसवें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचना बताता है कि कंपनियां AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर कितनी गंभीर हो गई हैं। वहीं साइबर अटैक का लगातार पांचवें साल नंबर-1 जोखिम बने रहना यह संकेत देता है कि डिजिटल सुरक्षा आने वाले समय में भी कंपनियों के एजेंडे में सबसे ऊपर रहने वाली है।
कुल मिलाकर, दुनिया की कंपनियों के लिए जोखिम अब सिर्फ युद्ध या आर्थिक मंदी तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल खतरे, AI, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक तनाव मिलकर कारोबारी दुनिया की नई चुनौती बन चुके हैं।


