Gold Silver Price Today: अगर आप सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं या कीमती धातुओं की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो आयात से जुड़ी यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार की ओर से कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद भारत में सोने और खासकर चांदी के आयात पर इसका असर दिखाई देने लगा है। जुलाई में चांदी के आयात में करीब 66 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोने के आयात की रफ्तार भी काफी धीमी हो गई।
वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महंगी होती कीमतों और बढ़े हुए आयात शुल्क ने विदेशी बाजार से कीमती धातुओं की खरीद को प्रभावित किया है। इसका असर सिर्फ आयात पर ही नहीं, बल्कि देश के चालू खाते के घाटे यानी Current Account Deficit (CAD) पर भी पड़ सकता है।
जुलाई में सोने का आयात कितना रहा?
जुलाई में भारत का सोने का आयात करीब 4.77 फीसदी बढ़कर 4.16 अरब डॉलर रहा। पहली नजर में यह बढ़ोतरी सकारात्मक लग सकती है, लेकिन पिछले महीनों की तुलना में इसकी रफ्तार में लगातार कमी आई है।
दरअसल, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में सोने के आयात में काफी तेज वृद्धि देखने को मिली थी। अप्रैल में सोने का आयात सालाना आधार पर 81.69 फीसदी बढ़ा था। मई में यह वृद्धि घटकर करीब 34 फीसदी रह गई। जून में यह सिर्फ 7 फीसदी रही और जुलाई में वृद्धि दर घटकर महज 4.77 फीसदी रह गई।
इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों और आयात पर बढ़े खर्च के कारण कारोबारी तथा खरीदार विदेशी बाजार से सोना मंगाने में पहले की तुलना में सावधानी बरत रहे हैं।
चांदी के आयात में 66.1% की गिरावट
चांदी के मामले में तस्वीर और भी ज्यादा स्पष्ट है। जुलाई में भारत का चांदी आयात 66.1 फीसदी गिरकर सिर्फ 17.16 करोड़ डॉलर रह गया।
वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जुलाई अवधि में चांदी का कुल आयात करीब 50.81 फीसदी घटकर 71.84 करोड़ डॉलर रह गया है।
चांदी के आयात में इतनी बड़ी गिरावट के पीछे दो प्रमुख वजहें मानी जा सकती हैं। पहली वजह अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में चांदी की ऊंची कीमतें हैं। दूसरी बड़ी वजह आयात पर बढ़ा हुआ शुल्क है। दोनों का असर मिलकर आयातकों की लागत बढ़ाता है और विदेशी बाजार से खरीदारी को महंगा बना देता है।
सरकार ने क्यों बढ़ाया था आयात शुल्क?
सरकार ने 13 मई से कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इसका उद्देश्य आयात पर अंकुश लगाने और घरेलू बाजार पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने से जुड़ा था।
हालांकि, शुल्क बढ़ने का सीधा असर आयात लागत पर पड़ता है। जब आयातक को विदेशी बाजार से सोना या चांदी खरीदने के बाद ज्यादा शुल्क देना पड़ता है, तो इसकी लागत अंततः घरेलू बाजार की कीमतों में भी दिखाई दे सकती है।
यही वजह है कि सोने-चांदी के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आयात शुल्क में बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दिल्ली में कहां पहुंचा सोने-चांदी का भाव?
ऊंचे आयात शुल्क के बीच घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतें भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सभी टैक्स समेत सोने का भाव करीब 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत करीब 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई।
इस तरह मौजूदा कीमतों को देखते हुए आम खरीदारों के लिए बड़ी मात्रा में सोना या चांदी खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है।
खास तौर पर चांदी की कीमतों में तेजी का असर इंडस्ट्रियल डिमांड, ज्वैलरी और निवेश से जुड़ी खरीदारी पर भी पड़ सकता है।
अप्रैल-जुलाई में सोने का कुल आयात कितना रहा?
वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जुलाई अवधि की बात करें तो भारत ने कुल 15.17 अरब डॉलर का सोना आयात किया। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 32.41 फीसदी ज्यादा है।
हालांकि, इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बात वृद्धि की घटती रफ्तार है। अप्रैल में आयात वृद्धि 81.69 फीसदी थी, जो जुलाई तक आते-आते 4.77 फीसदी रह गई।
इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में सोने की मांग खत्म हो रही है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है और शादी, त्योहार, निवेश तथा ज्वैलरी की मांग के कारण सोने की घरेलू जरूरत बनी रहती है। लेकिन कीमतों में तेजी और आयात शुल्क बढ़ने से खरीदारी का पैटर्न जरूर प्रभावित हो सकता है।
भारत सबसे ज्यादा सोना कहां से खरीदता है?
भारत अपनी घरेलू ज्वैलरी और निवेश की मांग को पूरा करने के लिए कई देशों से सोना आयात करता है। इनमें स्विट्जरलैंड सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
भारत के कुल सोना आयात में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी के आसपास बताई जाती है। इसके बाद UAE की हिस्सेदारी 16 फीसदी से ज्यादा और दक्षिण अफ्रीका की करीब 10 फीसदी है।
जुलाई में स्विट्जरलैंड से भारत का सोना आयात करीब 62.26 फीसदी बढ़कर 2 अरब डॉलर हो गया। इससे यह भी पता चलता है कि भले ही कुल आयात की वृद्धि धीमी हुई हो, लेकिन कुछ प्रमुख सप्लायर देशों से खरीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है।
सोने के आयात का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सोने और चांदी की घरेलू मांग के लिए आयात करता है। इसलिए कीमती धातुओं का आयात देश के व्यापार संतुलन पर सीधा असर डालता है।
जब सोने का आयात तेजी से बढ़ता है तो देश के आयात बिल में इजाफा होता है। इससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है और आगे चलकर चालू खाते के घाटे (CAD) पर भी दबाव बन सकता है।
इसके उलट, अगर ऊंची कीमतों और आयात शुल्क के कारण सोने-चांदी की विदेशी खरीद कम होती है, तो आयात बिल पर दबाव घट सकता है। सरकार के लिए यह विदेशी मुद्रा की बचत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या आगे और घट सकता है सोने-चांदी का आयात?
आने वाले समय में आयात का रुख मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करेगा—घरेलू कीमतें, अंतरराष्ट्रीय कीमतें और आयात शुल्क।
अगर वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आयात शुल्क भी मौजूदा स्तर पर रहता है, तो आयातकों के लिए विदेशी बाजार से खरीदारी महंगी बनी रहेगी। ऐसे में आयात की रफ्तार पर दबाव जारी रह सकता है।
हालांकि, भारत में त्योहारों और शादी के मौसम के दौरान सोने की मांग बढ़ने पर तस्वीर बदल भी सकती है। घरेलू मांग मजबूत रहने पर आयात में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।
खरीदारों के लिए क्या है इसका मतलब?
अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल आज की कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय वैश्विक कीमतों, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क और घरेलू मांग जैसे कारकों पर भी नजर रखना जरूरी है।
आयात शुल्क बढ़ने का मतलब यह है कि विदेशी बाजार से भारत में कीमती धातु लाने की लागत बढ़ गई है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मामूली बदलाव का असर भी घरेलू बाजार में अलग तरीके से दिखाई दे सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि सोने के आयात की वृद्धि जुलाई में लगभग थमने के करीब पहुंच गई है, जबकि चांदी के आयात में 66 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है। ऐसे में आने वाले महीनों में कीमती धातुओं की कीमतों और आयात के आंकड़ों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।


