Mutual Fund Holding: जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव देखने को मिला। फंड हाउसों ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स में अपना एक्सपोजर बढ़ाया, जबकि प्राइवेट बैंक, कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और कुछ अन्य क्षेत्रों में निवेश का वजन घटा। सेक्टर के साथ-साथ कई बड़े शेयरों में भी म्यूचुअल फंड होल्डिंग की वैल्यू में उल्लेखनीय बदलाव आया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की लेटेस्ट फंड फोलियो रिपोर्ट के मुताबिक, जून में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद जुलाई में टेक्नोलॉजी सेक्टर में म्यूचुअल फंड्स की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी। वहीं ऑटोमोबाइल और ई-कॉमर्स में भी लगातार निवेश बढ़ा। यह बदलाव ऐसे समय में आया जब जुलाई में निफ्टी 50 में 2.2% की तेजी रही और इंडेक्स 24,384 के स्तर पर बंद हुआ।
टेक स्टॉक्स में लौटा म्यूचुअल फंड्स का भरोसा
जुलाई में म्यूचुअल फंड्स ने सबसे ज्यादा जिन सेक्टर्स में अपना पोर्टफोलियो वेटेज बढ़ाया, उनमें टेक्नोलॉजी प्रमुख रहा। जून में टेक सेक्टर का वेटेज 5.9% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। जुलाई में यह 70 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 6.6% हो गया।
हालांकि, सालाना आधार पर टेक्नोलॉजी सेक्टर का वेटेज अभी भी 140 बेसिस प्वाइंट कम है। इसके बावजूद जुलाई की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि फंड मैनेजरों ने टेक शेयरों में दोबारा अवसर देखना शुरू किया है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में लगातार तीसरे महीने बढ़ा दांव
ऑटोमोबाइल सेक्टर भी म्यूचुअल फंड्स की पसंद में बना हुआ है। जुलाई में इस सेक्टर का पोर्टफोलियो वेटेज 30 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 8.9% हो गया।
खास बात यह है कि ऑटो सेक्टर में म्यूचुअल फंड्स का एक्सपोजर लगातार तीसरे महीने बढ़ा है। सालाना आधार पर भी इसका वेटेज 80 बेसिस प्वाइंट अधिक है। इससे पता चलता है कि फंड मैनेजर ऑटो सेक्टर में लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक नजर आ रहे हैं।
ई-कॉमर्स में निवेश रिकॉर्ड हाई पर
ई-कॉमर्स सेक्टर में भी जुलाई के दौरान म्यूचुअल फंड्स का भरोसा और मजबूत हुआ। सेक्टर का पोर्टफोलियो वेटेज 30 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 3.1% पर पहुंच गया।
यह ई-कॉमर्स के लिए अब तक का सबसे ऊंचा वेटेज है। लगातार तीसरे महीने इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सालाना आधार पर भी ई-कॉमर्स का वेटेज 80 बेसिस प्वाइंट बढ़ा है।
इसके अलावा हेल्थकेयर, NBFC-नॉन-लेंडिंग और टेलीकॉम जैसे सेक्टर्स में भी म्यूचुअल फंड्स का एक्सपोजर बढ़ा।
प्राइवेट बैंकों और कैपिटल गुड्स से कम किया निवेश
म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा सेक्टर वेटेज अभी भी प्राइवेट बैंकों का है। हालांकि जुलाई में इसका वजन घटकर 17.4% रह गया। महीने और साल दोनों आधार पर इसमें 50 बेसिस प्वाइंट की कमी आई।
कैपिटल गुड्स सेक्टर में भी जुलाई में निवेश का वजन कम हुआ। जून में इसका वेटेज 24 महीने के हाई 8.1% पर पहुंचा था, जो जुलाई में घटकर 7.6% रह गया। हालांकि, सालाना आधार पर कैपिटल गुड्स का वेटेज अभी भी 30 बेसिस प्वाइंट अधिक है।
म्यूचुअल फंड्स ने यूटिलिटीज, ऑयल एंड गैस, PSU बैंक, रिटेल, इंश्योरेंस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी अपना एक्सपोजर घटाया।
NBFC और हेल्थकेयर सबसे ज्यादा ओवरवेट
BSE 200 में शामिल कंपनियों की तुलना में म्यूचुअल फंड्स के सेक्टर आवंटन को देखें तो NBFC-नॉन-लेंडिंग और हेल्थकेयर सबसे ज्यादा ओवरवेट सेक्टर रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 15-15 फंड ऐसे थे जिनका इन दोनों सेक्टर्स में BSE 200 के मुकाबले कम से कम 1 प्रतिशत प्वाइंट अधिक वेटेज था। इसके बाद ई-कॉमर्स का नंबर रहा, जहां 10 फंड ओवरवेट थे।
कैपिटल गुड्स और केमिकल्स में 9-9 फंड ओवरवेट रहे। इससे संकेत मिलता है कि फंड मैनेजरों की पसंद केवल टेक और ऑटो तक सीमित नहीं रही, बल्कि चुनिंदा दूसरे सेक्टर्स में भी निवेश बढ़ाया गया।
ऑयल एंड गैस में सबसे ज्यादा फंड अंडरवेट
दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा फंड अंडरवेट रहे। कुल 19 फंड ऐसे थे, जिन्होंने BSE 200 में इस सेक्टर के वजन की तुलना में कम निवेश किया था।
प्राइवेट बैंक दूसरे स्थान पर रहे, जहां 15 फंड अंडरवेट थे। इसके अलावा कंज्यूमर में 14, PSU बैंक में 12 और यूटिलिटीज में 11 फंड अंडरवेट रहे।
Bharti Airtel और Infosys में सबसे ज्यादा बढ़ी होल्डिंग
स्टॉक स्तर पर देखें तो जुलाई में म्यूचुअल फंड होल्डिंग की वैल्यू सबसे ज्यादा Bharti Airtel में बढ़ी। इसके बाद Infosys, Bajaj Finance, ICICI Bank, M&M और Eternal (Zomato) का नंबर रहा।
इसके अलावा TCS, Torrent Pharma, HCL Technologies और Adani Enterprises में भी म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग वैल्यू बढ़ी।
इससे यह साफ होता है कि जुलाई में फंड मैनेजरों ने केवल किसी एक सेक्टर पर दांव नहीं लगाया, बल्कि टेक, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, फार्मा और टेलीकॉम से जुड़े बड़े शेयरों में भी निवेश बढ़ाया।
HDFC Bank और इन शेयरों में घटी होल्डिंग
जहां कुछ शेयर म्यूचुअल फंड्स की पसंद बने, वहीं कुछ बड़े शेयरों में होल्डिंग वैल्यू कम हुई। जुलाई में म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग वैल्यू सबसे ज्यादा HDFC Bank में घटी।
इसके बाद Axis Bank, L&T, Varun Beverages, Trent, Bharat Electronics, Dr Reddy’s Laboratories, Avenue Supermarts, Bank of Baroda और NTPC में होल्डिंग वैल्यू में कमी देखने को मिली।
यह जरूरी नहीं कि किसी शेयर में म्यूचुअल फंड होल्डिंग घटने का मतलब फंड मैनेजर उस कंपनी को लेकर पूरी तरह नकारात्मक हैं। पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग, शेयर की कीमत में बदलाव और दूसरे सेक्टर्स में बेहतर अवसर मिलने जैसे कई कारण इसके पीछे हो सकते हैं।
SIP निवेश ने भी बनाया मजबूत आधार
जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में SIP के जरिए निवेश मजबूत बना रहा। महीने के दौरान SIP के जरिए ₹31,960 करोड़ का निवेश आया। यह जून के मुकाबले 0.6% और पिछले साल के समान महीने की तुलना में 12.3% अधिक है।
इक्विटी स्कीम्स की बिक्री जुलाई में 2.3% बढ़कर ₹79,800 करोड़ रही। हालांकि, रिडेम्पशन भी 9.1% बढ़कर ₹53,600 करोड़ हो गया। इसके चलते जुलाई में नेट इक्विटी इनफ्लो ₹26,200 करोड़ रहा, जो जून के ₹28,900 करोड़ से कम है।
इस तरह जुलाई में एक तरफ पोर्टफोलियो के सेक्टर आवंटन में बदलाव देखने को मिला, वहीं दूसरी तरफ SIP के जरिए आने वाला नियमित निवेश मजबूत बना रहा।
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
म्यूचुअल फंड्स के जुलाई पोर्टफोलियो में हुए बदलाव से संकेत मिलता है कि फंड मैनेजरों ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में चुनिंदा अवसरों पर भरोसा बढ़ाया है। दूसरी ओर, प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस और कुछ डिफेंसिव या कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर्स में वजन कम किया गया है।
हालांकि, केवल म्यूचुअल फंड खरीद या बिक्री के आधार पर किसी शेयर में निवेश का फैसला करना सही रणनीति नहीं है। फंड होल्डिंग में बदलाव कई वजहों से हो सकता है और यह जरूरी नहीं कि आगे भी वही ट्रेंड जारी रहे। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, कमाई की संभावनाओं और अपने जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: newsjagran.in पर दी गई जानकारी और विचार केवल सूचनात्मक उद्देश्य से हैं। किसी भी शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें। निवेश का निर्णय लेने से पहले SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लेना उचित है।


