Defence Stocks: एलारा सिक्योरिटीज का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए ऑर्डर फ्लो तेज हो सकता है। ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, ड्रोन, QRSAM, फाइटर ट्रेनर, कार्वेट और सबमरीन जैसे प्रोग्राम से कई कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
Defence Stocks: भारतीय डिफेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही अहम साबित हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म एलारा सिक्योरिटीज के मुताबिक, इस अवधि में डिफेंस कंपनियों के लिए कई बड़े ऑर्डर और टेंडर सामने आ सकते हैं। इनमें ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, फाइटर ट्रेनर, क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल यानी QRSAM, अगली पीढ़ी के कार्वेट और सबमरीन जैसे प्रोग्राम शामिल हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स में तेजी आने से सिर्फ बड़ी डिफेंस कंपनियों की ऑर्डरबुक ही मजबूत नहीं होगी, बल्कि उनसे जुड़ी सप्लाई चेन में काम करने वाली कंपनियों को भी नए बिजनेस अवसर मिल सकते हैं।
HAL, BEL और Astra Microwave को मिल सकता है फायदा
एलारा सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट हर्षित कपाड़िया के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में डिफेंस ऑर्डर बढ़ने से Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Bharat Electronics Limited (BEL) और Astra Microwave जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है।
डिफेंस सेक्टर में बड़े प्लेटफॉर्म बनाने वाली कंपनियों के साथ-साथ रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरो-स्ट्रक्चर और दूसरे महत्वपूर्ण कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां भी बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स से लाभ उठा सकती हैं। यही वजह है कि संभावित ऑर्डर पाइपलाइन को केवल एक-दो कंपनियों तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है।
एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार, आने वाले प्रोग्राम भारत के घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और मजबूत कर सकते हैं।
₹1 लाख करोड़ का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट टेंडर अहम
डिफेंस सेक्टर के लिए सबसे बड़े संभावित अवसरों में इंडियन एयरफोर्स के लिए 60 मल्टी-रोल मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद शामिल है। इस प्रस्ताव की अनुमानित वैल्यू करीब ₹1 लाख करोड़ बताई जा रही है।
यह प्रोग्राम भारतीय कंपनियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसमें केवल एयरक्राफ्ट की खरीद ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे पहलुओं पर भी जोर दिया जा सकता है।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती Request for Information (RFI) चरण में है। यानी इसे अंतिम ऑर्डर में बदलने में समय लग सकता है। एलारा सिक्योरिटीज के आकलन के मुताबिक, इस तरह के प्रोग्राम को वास्तविक ऑर्डर में बदलने में करीब दो से तीन साल लग सकते हैं।
Mahindra, Tata और HAL हो सकते हैं संभावित दावेदार
इस एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए Mahindra, Tata और HAL संभावित दावेदारों में शामिल हो सकते हैं। अलग-अलग कंपनियों ने विदेशी एयरोस्पेस कंपनियों के साथ अपनी साझेदारियां भी बनाई हैं।
Mahindra ने Embraer के साथ समझौता किया है, जबकि Tata की Lockheed Martin के साथ साझेदारी है। दूसरी ओर, HAL ने अभी तक इस संभावित प्रोग्राम के लिए किसी पार्टनर के नाम की घोषणा नहीं की है।
अगर यह प्रोग्राम आगे बढ़ता है तो इसके प्रभाव केवल मुख्य एयरक्राफ्ट निर्माता तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। एयरक्राफ्ट निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार, एयरो-स्ट्रक्चर और प्रिसिजन कंपोनेंट्स की मांग भी बढ़ सकती है।
Tata-Airbus C-295 प्रोग्राम से मिल सकता है संकेत
भारत में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने की दिशा में Tata-Airbus C-295 प्रोग्राम को एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। इस प्रोग्राम के तहत कुल 56 एयरक्राफ्ट का कॉन्ट्रैक्ट है। इनमें से 16 एयरक्राफ्ट की डिलीवरी पहले ही हो चुकी है, जबकि बाकी 40 एयरक्राफ्ट भारत में बनाए जाने हैं।
एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार, नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम में भी इसी तरह का मॉडल अपनाया जा सकता है। इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी और उत्पादन से जुड़ी विशेषज्ञता भी बढ़ सकती है।
सरकार की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा डिफेंस इंपोर्ट पर निर्भरता घटाना और देश को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाना है। ऐसे में घरेलू उत्पादन से जुड़े बड़े प्रोग्राम भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए लंबे समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
BEL से लेकर Dynamatic Technologies तक को अवसर
बड़े एयरक्राफ्ट प्रोग्राम का फायदा केवल मुख्य निर्माता को नहीं मिलता। इसके आसपास एक लंबी सप्लाई चेन तैयार होती है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार, स्ट्रक्चरल पार्ट्स और दूसरे कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां शामिल होती हैं।
एलारा सिक्योरिटीज के मुताबिक, Bharat Electronics (BEL) को इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार सिस्टम की संभावित मांग से फायदा मिल सकता है।
इसी तरह Dynamatic Technologies और BEML को एयरो-स्ट्रक्चर से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। वहीं Azad Engineering, Aequs और AXISCADES Technologies जैसी कंपनियां एयरक्राफ्ट के विभिन्न प्रिसिजन पार्ट्स और इंजीनियरिंग से जुड़े कामों से लाभ उठा सकती हैं।
इस तरह एक बड़े एयरक्राफ्ट प्रोग्राम से मुख्य कंपनी के अलावा कई टियर-1 और टियर-2 सप्लायर्स के लिए भी बिजनेस के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
डिफेंस कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 2026-27 का दूसरा हाफ?
भारतीय डिफेंस कंपनियों की ऑर्डरबुक पहले से ही निवेशकों के लिए एक प्रमुख फोकस एरिया रही है। आने वाले महीनों में अगर बड़े टेंडर और प्रोक्योरमेंट प्रोग्राम आगे बढ़ते हैं तो कंपनियों की भविष्य की रेवेन्यू विजिबिलिटी बेहतर हो सकती है।
ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, रडार, एयरक्राफ्ट और नेवल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर सरकार का जोर है। ऐसे में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ स्पेशलाइज्ड कंपोनेंट और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए भी लंबी अवधि के अवसर बन सकते हैं।
हालांकि, किसी संभावित टेंडर को सीधे कंपनी के पक्के ऑर्डर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। RFI, RFP, तकनीकी मूल्यांकन, बोली प्रक्रिया और अंतिम कॉन्ट्रैक्ट जैसे कई चरणों के बाद ही किसी कंपनी को वास्तविक ऑर्डर मिलता है।
किन Defence Stocks पर नजर?
एलारा सिक्योरिटीज के आकलन के आधार पर संभावित लाभार्थियों में HAL, BEL और Astra Microwave जैसी प्रमुख डिफेंस कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट सप्लाई चेन में Dynamatic Technologies, BEML, Azad Engineering, Aequs और AXISCADES Technologies जैसी कंपनियों को भी संभावित अवसर मिल सकते हैं।
इन कंपनियों के शेयरों में निवेश से पहले केवल संभावित डिफेंस ऑर्डर को आधार नहीं बनाना चाहिए। कंपनी की मौजूदा ऑर्डरबुक, वैल्यूएशन, मुनाफा, कैश फ्लो, कर्ज, मार्जिन और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का भी आकलन जरूरी है।
निष्कर्ष
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के लिए ऑर्डर फ्लो के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, ड्रोन, QRSAM, फाइटर ट्रेनर और नेवल प्रोग्राम जैसे संभावित प्रोजेक्ट्स से डिफेंस कंपनियों के साथ-साथ उनकी सप्लाई चेन में मौजूद कंपनियों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
HAL, BEL और Astra Microwave जैसे नाम सीधे तौर पर चर्चा में हैं, जबकि Dynamatic Technologies, BEML, Azad Engineering, Aequs और AXISCADES Technologies जैसी कंपनियां सप्लायर इकोसिस्टम के जरिए अवसर हासिल कर सकती हैं। हालांकि, इनमें से किसी भी कंपनी के शेयर में निवेश करने से पहले स्वतंत्र रिसर्च और प्रमाणित वित्तीय सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: newsjagran.in पर दिए गए विचार और जानकारी निवेश सलाह नहीं हैं। ये संबंधित ब्रोकरेज/विशेषज्ञ के विचारों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी के फंडामेंटल और वैल्यूएशन का अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार की सलाह लें।


