Gold Silver Prices Today: सोने की कीमतों में लगातार सात कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर 13 अगस्त को ब्रेक लग गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर घरेलू कमोडिटी बाजार तक गोल्ड और सिल्वर दोनों पर दबाव देखने को मिला। इससे पहले सोने की कीमतें करीब दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गई थीं। ऐसे में मौजूदा गिरावट को बाजार में मुनाफावसूली से जोड़कर देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.90 फीसदी गिरकर 4,369 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की कीमत में भी कमजोरी रही और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 1.32 फीसदी गिरकर 64.43 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 13 अगस्त को करीब दोपहर 2 बजे सोने का भाव 0.81 फीसदी यानी 1,255 रुपये की गिरावट के साथ 1,53,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, चांदी के फ्यूचर्स में गिरावट इससे भी ज्यादा रही।
भारत में गोल्ड फ्यूचर्स पर दबाव
MCX पर 13 अगस्त को सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली। गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.81 फीसदी गिरकर 1,53,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। हाल के सत्रों में जिस तरह सोने की कीमतों में तेज उछाल आया था, उसके बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली स्वाभाविक मानी जा रही है।
सोने में लगातार तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर अपनी पोजीशन में मुनाफा बुक किया। इसका असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में दिखाई दिया। हालांकि, इस गिरावट को अभी बड़ी ट्रेंड रिवर्सल के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सोने के लिए कई अहम सपोर्टिंग फैक्टर अब भी बाजार में मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, महंगाई के आंकड़े और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक सोने की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिका में महंगाई का आंकड़ा उम्मीद के मुताबिक
सोने की कीमतों पर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का भी असर पड़ा है। जुलाई में अमेरिका का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI सालाना आधार पर 3.4 फीसदी बढ़ा, जबकि जून में यह आंकड़ा 3.5 फीसदी था।
महंगाई में अपेक्षित तेजी नहीं आने से अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों में भी बदलाव देखने को मिला है। महंगाई के अपेक्षाकृत नरम रहने से ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीद प्रभावित होती है और इसका सीधा असर डॉलर तथा गोल्ड जैसी सुरक्षित संपत्तियों पर पड़ सकता है।
हालांकि, महंगाई और ब्याज दरों की तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसलिए निवेशक आगे आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
सात सत्रों में करीब 12,400 रुपये चढ़ा था सोना
13 अगस्त की गिरावट को समझने के लिए पिछले सात कारोबारी सत्रों की तेजी पर नजर डालना जरूरी है। लगातार सात सत्रों में सोने की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी हुई थी। दिल्ली सर्राफा बाजार में इस दौरान सोने का भाव करीब 8.4 फीसदी यानी लगभग 12,400 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ा था।
इतनी तेज और लगातार तेजी के बाद बाजार में कुछ समय के लिए मुनाफावसूली आना सामान्य माना जाता है। कई निवेशक ऐसे समय पर अपनी पिछली खरीदारी से मुनाफा निकालते हैं, जिससे कीमतों पर अस्थायी दबाव बन सकता है।
यही वजह है कि 13 अगस्त की गिरावट को फिलहाल बाजार में कंसॉलिडेशन और प्रॉफिट बुकिंग के नजरिए से देखा जा रहा है। अगर आगे सोने में फिर से खरीदारी आती है तो हाल की तेजी का ट्रेंड दोबारा मजबूत हो सकता है। वहीं, लगातार कमजोरी रहने पर निवेशक अगले सपोर्ट स्तरों पर नजर रखेंगे।
चांदी में भी तेज गिरावट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी 13 अगस्त को दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 1.32 फीसदी गिरकर 64.43 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
घरेलू बाजार में MCX सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट और ज्यादा रही। करीब 2 बजे चांदी का भाव 3,546 रुपये यानी 1.46 फीसदी की गिरावट के साथ 2,34,289 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था।
चांदी को अक्सर गोल्ड के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली कमोडिटी माना जाता है। इसमें निवेश मांग के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डिमांड का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक मांग को लेकर उम्मीदों में बदलाव होने पर चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में ज्यादा तेजी या गिरावट देखने को मिल सकती है।
सोने और चांदी की कीमतों के लिए आगे क्या मायने रखेगा?
सोने और चांदी के निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में कई वैश्विक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे। सबसे पहले बाजार की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों पर रहेगी।
आमतौर पर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर गोल्ड को सपोर्ट मिल सकता है, क्योंकि इससे डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर असर पड़ता है। दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से मजबूत आंकड़े आते हैं और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना बढ़ती है तो सोने पर दबाव बन सकता है।
इसके अलावा, दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने की मांग बढ़ सकती है।
मध्यपूर्व तनाव और क्रूड ऑयल पर भी बाजार की नजर
मध्यपूर्व में जारी तनाव भी कमोडिटी बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर बना हुआ है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों पर बाजार की नजर है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक क्रूड ऑयल सप्लाई पर पड़ सकता है।
क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहने की स्थिति में वैश्विक महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर रणनीति महत्वपूर्ण हो जाती है और इसका अप्रत्यक्ष असर गोल्ड-सिल्वर सहित दूसरी कमोडिटीज पर पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच किसी बड़े समझौते के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसलिए भू-राजनीतिक जोखिम बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण अनिश्चितता बना हुआ है।
क्या सोने की तेजी खत्म हो गई?
13 अगस्त की गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की तेजी का दौर खत्म हो गया है। फिलहाल केवल एक कारोबारी सत्र की गिरावट के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
सोने में पिछले सात सत्रों के दौरान जिस तरह की तेजी आई थी, उसके बाद कुछ मुनाफावसूली होना सामान्य बाजार व्यवहार है। यदि कीमतें गिरावट के बाद महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के ऊपर बनी रहती हैं और दोबारा खरीदारी आती है तो इसे स्वस्थ कंसॉलिडेशन माना जा सकता है।
दूसरी तरफ, अगर आने वाले सत्रों में लगातार बिकवाली बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के नीचे चला जाता है, तो शॉर्ट टर्म में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेने के बजाय डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, फेड की ब्याज दरों की उम्मीद, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और घरेलू मांग जैसे प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोने और चांदी में हालिया तेजी के बाद 13 अगस्त की गिरावट निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि कीमतों में एकतरफा तेजी के बजाय अब उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। जिन निवेशकों ने हाल की तेजी में खरीदारी की है, उन्हें अपने जोखिम और निवेश अवधि के हिसाब से रणनीति बनानी चाहिए।
वहीं, जो निवेशक नई खरीदारी पर विचार कर रहे हैं, उनके लिए एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना जोखिम को नियंत्रित करने का विकल्प हो सकता है। हालांकि, किसी भी निवेश का फैसला व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
Gold Silver Prices Today: 13 अगस्त को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। सोने में लगातार सात सत्रों की तेजी के बाद आई यह कमजोरी मुख्य रूप से मुनाफावसूली और बाजार में कंसॉलिडेशन का संकेत देती है। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1,255 रुपये और सिल्वर फ्यूचर्स करीब 3,546 रुपये तक नीचे कारोबार कर रहे थे।
हालांकि, सोने और चांदी के बुनियादी सपोर्टिंग फैक्टर्स में अभी बड़ा बदलाव नहीं आया है। अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, महंगाई, डॉलर, मध्यपूर्व तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतें आगे भी कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों के लिए आने वाले कारोबारी सत्र काफी महत्वपूर्ण रहेंगे।


