Shiprocket IPO: शिपरॉकेट के आईपीओ को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिल रही है। 12 अगस्त को खुला यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका है। खास तौर पर रिटेल निवेशकों ने इसमें काफी दिलचस्पी दिखाई है। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए आरक्षित हिस्सा करीब 4.5 गुना सब्सक्राइब हो गया है। वहीं, अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में भी शेयर प्रीमियम पर कारोबार करता नजर आ रहा है।
शिपरॉकेट का आईपीओ 14 अगस्त तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए 92 से 97 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू के जरिए कंपनी करीब 1,617.5 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। ऐसे में निवेशकों के बीच यह सवाल भी है कि अगर आईपीओ में आवेदन किया जाता है तो लिस्टिंग पर कितना मुनाफा हो सकता है और क्या सिर्फ GMP के आधार पर इसमें निवेश करना सही रहेगा।
13 अगस्त को 35% के आसपास GMP
अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में शिपरॉकेट के शेयर को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। इनवेस्टरगेन के मुताबिक, 13 अगस्त को शेयर का GMP करीब 35% था। कंपनी के आईपीओ का अपर प्राइस बैंड 97 रुपये है। इस हिसाब से GMP के आधार पर शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत करीब 131 रुपये मानी जा सकती है।
अगर यह अनुमान लिस्टिंग के समय कायम रहता है तो 97 रुपये के इश्यू प्राइस की तुलना में निवेशकों को करीब 34 रुपये प्रति शेयर का संभावित लिस्टिंग गेन मिल सकता है। यानी मौजूदा GMP के आधार पर करीब 35 फीसदी के आसपास का रिटर्न दिख रहा है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि GMP कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। ग्रे मार्केट में प्रीमियम तेजी से बदल सकता है और इसका वास्तविक लिस्टिंग प्राइस से सीधा संबंध होना जरूरी नहीं है। इसलिए निवेशकों को संभावित मुनाफे का अनुमान लगाते समय GMP को केवल एक संकेत के तौर पर देखना चाहिए।
14 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन
शिपरॉकेट का आईपीओ 12 अगस्त को खुला है और इसमें 14 अगस्त तक निवेशक बोली लगा सकते हैं। कंपनी ने आईपीओ के लिए 92-97 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है।
कंपनी इस इश्यू से कुल 1,617.5 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इसमें करीब 885.5 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसके अलावा मौजूदा निवेशक ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए करीब 732 करोड़ रुपये के शेयर बेचेंगे।
इस तरह आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, क्योंकि OFS से जुटाई गई राशि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी। वहीं, फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने कारोबारी विस्तार और अन्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए कर सकती है।
बड़े संस्थागत निवेशकों ने भी लगाया दांव
शिपरॉकेट के आईपीओ को एंकर निवेशकों की तरफ से भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। एंकर निवेशकों के लिए इश्यू 11 अगस्त को खुला था।
एंकर निवेशकों में Nomura, Ashoka WhiteOak, Goldman Sachs और Societe Generale जैसे बड़े नाम शामिल रहे। इसके अलावा SBI Mutual Fund और HDFC AMC समेत कई बड़े म्यूचुअल फंड हाउसों ने भी इश्यू में निवेश किया है।
बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी किसी आईपीओ के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है, लेकिन इसे भी निवेश का अकेला आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन, कारोबारी मॉडल और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं को भी देखना चाहिए।
क्या काम करती है Shiprocket?
शिपरॉकेट गुड़गांव स्थित कंपनी है, जो ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी का प्लेटफॉर्म ऑनलाइन कारोबार करने वाले MSME और बड़े रिटेलर्स को लॉजिस्टिक्स से लेकर फुलफिलमेंट तक कई तरह की सेवाएं उपलब्ध कराता है।
कंपनी की सेवाओं में लॉजिस्टिक्स, चेकआउट, पेमेंट्स, फुलफिलमेंट और क्रॉस-बॉर्डर कॉमर्स शामिल हैं। ई-कॉमर्स सेक्टर के विस्तार के साथ इस तरह की सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना है, जो कंपनी के लिए लंबी अवधि में अवसर पैदा कर सकती है।
हालांकि, कंपनी अभी मुनाफे में नहीं है। वित्त वर्ष 2026 में शिपरॉकेट को करीब 79.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2025 में उसका घाटा करीब 74.4 करोड़ रुपये था। यानी रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी के घाटे में कमी नहीं आई।
दूसरी ओर, कंपनी के ऑपरेशंस से आने वाले रेवेन्यू में अच्छी वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2026 में यह करीब 24 फीसदी बढ़कर 2,204 करोड़ रुपये रहा। इससे पता चलता है कि कंपनी के कारोबार का विस्तार हो रहा है, लेकिन अभी ग्रोथ को मुनाफे में बदलना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
निवेशकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
शिपरॉकेट के आईपीओ में निवेश से पहले सिर्फ GMP देखकर फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। ग्रे मार्केट में दिख रहा प्रीमियम लिस्टिंग के दिन वास्तविक कीमत में बदलना जरूरी नहीं है। बाजार की स्थिति, आईपीओ की मांग और लिस्टिंग के समय निवेशकों की धारणा के आधार पर शेयर की कीमत GMP के अनुमान से काफी अलग हो सकती है।
इसके अलावा कंपनी फिलहाल घाटे में है। ऐसे में निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनी आने वाले वर्षों में रेवेन्यू ग्रोथ के साथ अपनी लागत को कितना नियंत्रित कर पाती है और कब तक मुनाफे में आ सकती है।
आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए लिस्टिंग गेन और लॉन्ग टर्म निवेश दो अलग-अलग रणनीतियां हैं। अगर किसी निवेशक का उद्देश्य सिर्फ लिस्टिंग पर मुनाफा कमाना है तो GMP एक संकेत दे सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। वहीं, लंबे समय के निवेश के लिए कंपनी की ग्रोथ, प्रतिस्पर्धा, वैल्यूएशन और प्रॉफिटेबिलिटी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।
तो क्या Shiprocket IPO में निवेश करना चाहिए?
शिपरॉकेट आईपीओ को रिटेल निवेशकों की मजबूत मांग और ग्रे मार्केट में प्रीमियम का फायदा मिल रहा है। 97 रुपये के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले करीब 35 फीसदी GMP निवेशकों को संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। हालांकि, कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण जोखिम यह है कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद वह अभी घाटे में है।
इसलिए सिर्फ GMP के आधार पर आईपीओ में पैसा लगाना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी के वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन, आईपीओ से मिलने वाली रकम के इस्तेमाल और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं को समझने के बाद ही फैसला लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश की सलाह न माना जाए। आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP), वित्तीय आंकड़ों और जोखिमों को ध्यान से पढ़ें तथा जरूरत पड़ने पर सेबी-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लें।


