GMR Airports Shares: जीएमआर एयरपोर्ट्स ने जून 2026 तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी कंसोलिडेटेड स्तर पर घाटे से निकलकर मुनाफे में आ गई, जबकि रेवेन्यू और EBITDA में भी मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसके बावजूद गुरुवार को कंपनी के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। आखिर अच्छे नतीजों के बाद भी निवेशक शेयर क्यों बेच रहे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की निगेटिव इक्विटी, भारी डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट को माना जा रहा है।
बीएसई पर आज GMR Airports के शेयर करीब 1.01% की गिरावट के साथ ₹103.15 पर कारोबार कर रहे थे। कारोबार के दौरान शेयर 1.44% तक फिसलकर ₹102.70 पर भी पहुंच गया। हालांकि, लंबी अवधि में शेयर ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। 22 सितंबर 2025 को बीएसई पर इसका भाव ₹84.02 के एक साल के निचले स्तर पर था। वहां से करीब 10 महीने में शेयर 37.59% चढ़कर 7 जुलाई 2026 को ₹115.60 के एक साल के उच्च स्तर तक पहुंच गया था।
जून तिमाही में घाटे से मुनाफे में पहुंची कंपनी
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में GMR Airports ने कंसोलिडेटेड स्तर पर मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी को जून 2025 तिमाही में ₹212 करोड़ का घाटा हुआ था, जो जून 2026 तिमाही में बदलकर ₹91 करोड़ के मुनाफे में आ गया।
कंपनी के मुनाफे में वापसी के पीछे बढ़ा हुआ रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन प्रमुख कारण रहे। जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 24% बढ़कर ₹3,205 करोड़ से ₹3,964 करोड़ हो गया।
ऑपरेटिंग स्तर पर भी कंपनी की स्थिति मजबूत हुई है। जून 2026 तिमाही में EBITDA करीब 24% बढ़कर ₹1,165 करोड़ से ₹1,447 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 36.3% से मामूली सुधार के साथ 36.5% हो गया।
इससे साफ है कि एयरपोर्ट बिजनेस के ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार हुआ है। लेकिन शेयर बाजार केवल EBITDA और मुनाफे को नहीं देखता, बल्कि कंपनी की बैलेंस शीट, कर्ज, ब्याज लागत और भविष्य की फंडिंग जरूरतों को भी ध्यान में रखता है।
शानदार नतीजों के बावजूद क्यों गिरा GMR Airports का शेयर?
GMR Airports के शेयर में गिरावट की एक बड़ी वजह कंपनी की बैलेंस शीट से जुड़ी चिंताएं हैं। कंपनी की कुल इक्विटी जून तिमाही के अंत में ₹1,428.65 करोड़ निगेटिव थी।
कंपनी के मुताबिक, ऑपरेशंस से कैश फ्लो और ऑपरेटिंग प्रदर्शन में सुधार के बावजूद निगेटिव इक्विटी बनी हुई है। इसका एक कारण अनरियलाइज्ड फॉरेन-एक्सचेंज उतार-चढ़ाव से हुआ नुकसान है। इसके अलावा पिछले वर्षों में कई प्रोजेक्ट्स के कैपिटलाइजेशन के बाद बढ़ी डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट का भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा है।
यानी कंपनी का ऑपरेटिंग बिजनेस बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन नीचे की लाइन पर भारी खर्च अभी भी दबाव बना रहे हैं।
₹937.93 करोड़ की फाइनेंस कॉस्ट बनी बड़ी चिंता
कंपनी के EBITDA में मजबूत वृद्धि के बावजूद फाइनेंस कॉस्ट काफी ज्यादा है। जून 2026 तिमाही में कंपनी की फाइनेंस कॉस्ट ₹937.93 करोड़ रही।
इसके अलावा डेप्रिसिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन का खर्च भी ₹455.60 करोड़ रहा। इसका मतलब है कि ऑपरेटिंग स्तर पर ₹1,447 करोड़ के EBITDA के बावजूद डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट जैसे खर्च मुनाफे पर बड़ा असर डाल रहे हैं।
यही कारण है कि निवेशक केवल कंपनी के EBITDA और रेवेन्यू में बढ़ोतरी को देखकर उत्साहित नहीं हुए। बाजार में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि कंपनी अपने भारी वित्तीय खर्च और देनदारियों को किस तरह मैनेज करेगी।
कंपनी जुटाएगी ₹5,000 करोड़ तक की पूंजी
GMR Airports ने अपनी फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के बोर्ड ने एक या अधिक किश्तों में ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है।
कंपनी यह रकम शेयर, बॉन्ड्स, वारंट्स और अन्य माध्यमों के जरिए जुटा सकती है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी की वित्तीय जरूरतों और देनदारियों को पूरा करने में किया जा सकता है।
हालांकि, बाजार के नजरिए से यह फैसला दो तरह से देखा जा सकता है। एक तरफ इससे कंपनी को भविष्य की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और बैलेंस शीट पर दबाव कम करने का रास्ता खुल सकता है। दूसरी तरफ, अगर इक्विटी के जरिए बड़ी रकम जुटाई जाती है तो मौजूदा शेयरधारकों के लिए संभावित डायल्यूशन की चिंता पैदा हो सकती है।
इसी वजह से ₹5,000 करोड़ की फंड जुटाने की योजना भी शेयर पर तत्काल सकारात्मक असर डालने के बजाय निवेशकों के बीच सावधानी का कारण बन सकती है।
टैरिफ ऑर्डर से कंपनी को आगे फायदा मिलने की उम्मीद
GMR Airports को आने वाले समय में दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट और GMR हैदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े टैरिफ ऑर्डर से फायदा मिलने की उम्मीद है।
कंपनी का मानना है कि आने वाले कंसेशन पीरियड के लिए टैरिफ ऑर्डर मिलने के बाद रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार हो सकता है। अगर कंपनी अपने एयरपोर्ट ऑपरेशंस से मजबूत कैश फ्लो बनाए रखने में सफल रहती है, तो इससे वित्तीय दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन कितनी तेजी से कंपनी की कुल वित्तीय स्थिति में सुधार करता है।
निवेशकों के लिए क्या है तस्वीर?
GMR Airports के जून तिमाही के नतीजे ऑपरेशनल स्तर पर निश्चित तौर पर मजबूत रहे हैं। कंपनी घाटे से निकलकर मुनाफे में आई है, रेवेन्यू 24% बढ़ा है और EBITDA में भी करीब 24% की वृद्धि हुई है।
लेकिन दूसरी तरफ निगेटिव इक्विटी, ₹937.93 करोड़ की फाइनेंस कॉस्ट, ₹455.60 करोड़ का डेप्रिसिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन खर्च और ₹5,000 करोड़ तक पूंजी जुटाने की योजना ऐसी बातें हैं, जिन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
इसलिए शेयर में आज की कमजोरी को केवल खराब तिमाही नतीजों के तौर पर देखना सही नहीं होगा। कंपनी के ऑपरेशनल नंबर मजबूत हैं, लेकिन निवेशक उसकी बैलेंस शीट और भविष्य की फंडिंग जरूरतों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। आगे शेयर की दिशा इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि कंपनी एयरपोर्ट बिजनेस से कैश फ्लो बढ़ाने, वित्तीय लागत को नियंत्रित करने और निगेटिव इक्विटी की स्थिति सुधारने में कितनी सफल रहती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता है।


