Gold Silver Price: ग्लोबल बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का असर बुधवार, 12 अगस्त को घरेलू बुलियन मार्केट में भी देखने को मिला। MCX पर सोने का अक्टूबर वायदा 0.66% बढ़कर करीब ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 1.50% की तेजी के साथ करीब ₹2.39 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी में करीब ₹3,600 की तेजी ने निवेशकों का ध्यान खास तौर पर इस कीमती धातु की ओर खींचा है।
कीमती धातुओं में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार कई महत्वपूर्ण संकेतों पर नजर रख रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में सोने को पारंपरिक तौर पर सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट माना जाता है। दूसरी ओर, चांदी को निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक उपयोग से भी समर्थन मिलता है।
सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह क्या है?
सोने की कीमतों को इस समय सबसे बड़ा सहारा वैश्विक अनिश्चितता से मिल रहा है। जब बाजार में जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है या आर्थिक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता होती है, तो निवेशक अक्सर ऐसे एसेट की तरफ रुख करते हैं जिन्हें वैल्यू स्टोर करने के लिए बेहतर माना जाता है। सोना इस स्थिति में निवेशकों के पसंदीदा विकल्पों में शामिल रहता है।
इसके अलावा अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा भी सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण है। निवेशक अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले कदम के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर महंगाई में नरमी आती है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है, तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है। इसके उलट, महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहने पर ब्याज दरों में नरमी की संभावना कमजोर पड़ सकती है, जिससे बुलियन पर दबाव देखने को मिल सकता है।
पश्चिम एशिया का तनाव और महंगा क्रूड भी अहम
पश्चिम एशिया और उसके आसपास शिपिंग से जुड़े नए तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को भी प्रभावित किया है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ रहा था, जबकि अमेरिकी क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था।
महंगा क्रूड वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है। यही वजह है कि निवेशक तेल की कीमतों के साथ-साथ अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर भी नजर रख रहे हैं। अगर तेल की कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति पर इसका असर पड़ सकता है।
ऐसे वातावरण में सोने की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमतें हर परिस्थिति में लगातार बढ़ती रहेंगी। मौजूदा स्तरों पर मुनाफावसूली और उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना हुआ है।
सोने से ज्यादा तेजी चांदी में क्यों?
बुधवार के घरेलू कारोबार में चांदी ने सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। MCX पर सितंबर वायदा करीब 1.50% मजबूत हुआ। चांदी की खासियत यह है कि इसकी मांग सिर्फ निवेश के लिए नहीं होती, बल्कि उद्योगों में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल होता है। इसलिए वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद चांदी की कीमतों के लिए अतिरिक्त सकारात्मक संकेत बन सकती है।
यही कारण है कि चांदी को कई बार सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव वाली कीमती धातु माना जाता है। तेजी के दौर में इसमें सोने से अधिक रिटर्न देखने को मिल सकता है, लेकिन गिरावट के समय जोखिम भी अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई के मुताबिक सोने और चांदी को लगातार मजबूत सपोर्ट मिल रहा है और यह कीमती धातुओं में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। उनके अनुसार, कीमतें ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद दोनों धातुओं की फिजिकल मांग बनी हुई है।
देसाई का मानना है कि निवेश की दिलचस्पी और औद्योगिक मांग चांदी को भी सहारा दे रही है। हालांकि, तेज तेजी के बाद कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन और प्रॉफिट-बुकिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसका मतलब है कि निवेशकों को सिर्फ तेजी देखकर बाजार में जल्दबाजी में एंट्री करने के बजाय कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
Gold और Silver ETF में निवेश की रफ्तार धीमी
बुलियन मार्केट में ETF के जरिए निवेश का प्रवाह भी सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, इसकी रफ्तार में कुछ कमी देखने को मिली है। मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, सिल्वर ETF में जुलाई के दौरान करीब ₹1,285 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि जून में यह आंकड़ा करीब ₹4,286 करोड़ था।
इस आंकड़े से संकेत मिलता है कि चांदी में निवेशकों की दिलचस्पी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन नए निवेश की गति पिछले महीने की तुलना में धीमी हुई है। ऐसे में ETF फ्लो भी आने वाले दिनों में बुलियन की मांग को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक रहेगा।
निवेशकों को अब किन बातों पर फोकस करना चाहिए?
मौजूदा समय में सोने और चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों को केवल घरेलू कीमतों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव भी भारतीय बुलियन कीमतों को प्रभावित करते हैं।
सबसे पहले अमेरिकी CPI यानी महंगाई के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके बाद फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर अमेरिकी महंगाई नरम रहती है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो सोने और चांदी को फायदा मिल सकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण फैक्टर जियोपॉलिटिकल तनाव है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर सेफ-हेवन मांग सोने को सपोर्ट कर सकती है। वहीं, तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेगा।
तीसरा फैक्टर चांदी की औद्योगिक मांग है। अगर वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी से जुड़े क्षेत्रों में मांग मजबूत रहती है, तो चांदी को सोने के मुकाबले अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है।
क्या मौजूदा स्तर पर निवेश करना सही है?
सोने और चांदी दोनों ही इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं। इसलिए निवेशकों को एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद बुलियन एक्सपोजर को ध्यान में रखना चाहिए।
तेजी के बाद कीमतों में कंसोलिडेशन या प्रॉफिट-बुकिंग आना सामान्य बाजार व्यवहार है। इसलिए केवल तेजी देखकर खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति पर विचार किया जा सकता है। वहीं, जो निवेशक पहले से सोने या चांदी में निवेश कर चुके हैं, उनके लिए पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन और मुनाफावसूली की रणनीति महत्वपूर्ण हो सकती है।
कुल मिलाकर, सोने के लिए जियोपॉलिटिकल तनाव, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और महंगाई के आंकड़े प्रमुख ट्रिगर बने हुए हैं। चांदी को इन कारकों के अलावा औद्योगिक मांग से भी सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, दोनों धातुओं में तेज तेजी के बाद अस्थिरता बढ़ सकती है। इसलिए निवेशकों को शॉर्ट टर्म में कीमतों के पीछे भागने के बजाय ग्लोबल संकेतों, ETF फ्लो और अपनी निवेश रणनीति पर फोकस करना चाहिए।
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