Independence Day 2026: भारत हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है। इस दिन देश के प्रधानमंत्री नई दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। लाल किले से होने वाला यह ध्वजारोहण आज भारतीय लोकतंत्र, आजादी और राष्ट्रीय गौरव की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाल किले की प्राचीर पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज किसने फहराया था और यह कार्यक्रम 15 अगस्त के बजाय 16 अगस्त 1947 को क्यों हुआ था?
15 अगस्त 2026 को भारत अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाएगा। हालांकि, स्वतंत्रता प्राप्त किए हुए 79 वर्ष पूरे होंगे और देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। वर्ष 2025 तक वह लाल किले से 12 बार स्वतंत्रता दिवस संबोधन कर चुके हैं और 2026 में उनका 13वां ध्वजारोहण होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक 2025 में नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपना 12वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन दिया था।
लाल किले पर पहली बार किसने फहराया था तिरंगा?
लाल किले की प्राचीर पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने का श्रेय भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को जाता है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है जिसे अक्सर गलत तरीके से बताया जाता है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर पहली बार तिरंगा 15 अगस्त 1947 को नहीं, बल्कि 16 अगस्त 1947 को फहराया था। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में भी स्पष्ट रूप से दर्ज है कि नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को पहली बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
इसका कारण यह था कि भारत की स्वतंत्रता का औपचारिक समारोह 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि के आसपास हुआ था। 15 अगस्त को देश के अलग-अलग स्थानों पर स्वतंत्रता समारोह आयोजित किए गए, लेकिन लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण की वह परंपरा, जिसे आज हम जानते हैं, अगले दिन यानी 16 अगस्त 1947 को शुरू हुई।
15 अगस्त 1947 को फिर कहां फहराया गया था तिरंगा?
भारत को आधिकारिक रूप से 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली। उस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े कई समारोह हुए। संविधान सभा में स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा और सत्ता हस्तांतरण से जुड़े कार्यक्रम मध्यरात्रि में आयोजित हुए थे।
इसके बाद 15 अगस्त को भी देशभर में तिरंगा फहराया गया। उदाहरण के लिए, चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में 15 अगस्त 1947 की सुबह 5:30 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। इस ऐतिहासिक ध्वज को आज भी फोर्ट सेंट जॉर्ज म्यूजियम में संरक्षित किया गया है। PIB के अनुसार यह स्वतंत्र भारत में 15 अगस्त 1947 को फहराए गए शुरुआती राष्ट्रीय ध्वजों में से एक है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अगस्त 1947 को भारत में कहीं भी तिरंगा नहीं फहराया गया था। सही तथ्य यह है कि लाल किले की प्राचीर पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को फहराया था।
कैसे बनी लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा?
स्वतंत्रता के बाद लाल किला देश की संप्रभुता और स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। मुगल काल से जुड़े इस ऐतिहासिक किले की लाहौरी गेट वाली प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने की परंपरा धीरे-धीरे स्वतंत्रता दिवस समारोह का अभिन्न हिस्सा बन गई।
आज हर साल 15 अगस्त की सुबह प्रधानमंत्री लाल किले पहुंचते हैं। वहां उन्हें तीनों सेनाओं और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टुकड़ी द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान और राष्ट्रीय सलामी का आयोजन होता है तथा इसके बाद प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं। PIB के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में भी लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्र को संबोधित करने की यही परंपरा दर्ज है।
नेहरू ने सबसे ज्यादा बार फहराया तिरंगा
लाल किले की प्राचीर से सबसे ज्यादा बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले प्रधानमंत्रियों की सूची में पंडित जवाहरलाल नेहरू सबसे ऊपर हैं।
PIB के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक नेहरू ने कुल 17 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। उनकी बेटी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 16 बार ध्वजारोहण के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने छह बार, जबकि राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव ने पांच-पांच बार लाल किले से तिरंगा फहराया।
इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री ने 1964 और 1965 में, मोरारजी देसाई ने 1977 और 1978 में तथा चौधरी चरण सिंह ने 1979 में लाल किले से ध्वजारोहण किया था। वी.पी. सिंह ने 1990, एच.डी. देवगौड़ा ने 1996 और इंद्र कुमार गुजराल ने 1997 में यह परंपरा निभाई थी।
किन प्रधानमंत्रियों ने नहीं फहराया लाल किले पर तिरंगा?
भारत के कुछ प्रधानमंत्रियों को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अवसर नहीं मिला। PIB के रिकॉर्ड के अनुसार गुलजारी लाल नंदा ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने दोनों छोटे कार्यकालों के दौरान लाल किले से तिरंगा नहीं फहराया। इसी तरह चंद्रशेखर भी लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण नहीं कर सके।
इसका मुख्य कारण उनका बहुत छोटा प्रधानमंत्री कार्यकाल और स्वतंत्रता दिवस की तारीख के साथ कार्यकाल का मेल न होना था।
नरेंद्र मोदी कितनी बार फहरा चुके हैं तिरंगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया था। इसके बाद वह लगातार हर साल लाल किले से देश को संबोधित करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार 2025 में नरेंद्र मोदी का लाल किले से 12वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन था। इसलिए 15 अगस्त 2026 को वह लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।
हालांकि, प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले से ध्वजारोहण की संख्या के मामले में अभी भी पंडित जवाहरलाल नेहरू सबसे आगे हैं। नेहरू के 17 ध्वजारोहण के रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए नरेंद्र मोदी को अभी कुछ और वर्षों तक यह परंपरा जारी रखनी होगी।
22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था राष्ट्रीय ध्वज
भारत के तिरंगे का इतिहास भी स्वतंत्रता दिवस से कुछ सप्ताह पहले का है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास में विशेष महत्व वाला दिन बताया है।
आज तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होता है। सफेद पट्टी के बीच गहरे नीले रंग का अशोक चक्र होता है। यह तिरंगा देश की एकता, साहस, शांति और विकास की भावना का प्रतीक माना जाता है।
15 अगस्त और लाल किले का रिश्ता क्यों है खास?
भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले का स्थान सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत होने की वजह से नहीं है। आजादी के बाद यह स्थान देश की संप्रभुता और लोकतांत्रिक सत्ता के प्रतीक के रूप में स्थापित हुआ। हर साल प्रधानमंत्री द्वारा इसी प्राचीर से तिरंगा फहराना उस ऐतिहासिक संघर्ष और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का अवसर देता है।
दिलचस्प बात यह है कि पहली बार लाल किले पर तिरंगा फहराने और आज की 15 अगस्त की परंपरा के बीच तारीख का यह अंतर अक्सर लोगों के सामने नहीं आता। इतिहास के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, जबकि आज हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री इसी प्राचीर से ध्वजारोहण करते हैं।
15 अगस्त 2026 को क्या होगा?
15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे। यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां आजादी के शुरुआती दिनों में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर एक ऐसी परंपरा की नींव रखी, जो करीब आठ दशक बाद भी देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोहों में से एक बनी हुई है।
इस तरह, अगर सवाल पूछा जाए कि “लाल किले पर पहली बार तिरंगा किसने फहराया था?”, तो जवाब है—पंडित जवाहरलाल नेहरू। लेकिन तारीख याद रखना भी उतना ही जरूरी है: लाल किले की प्राचीर पर उनका पहला ध्वजारोहण 16 अगस्त 1947 को हुआ था, जबकि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह की परंपरा बाद में इसी स्थान से स्थापित हुई।


