Gen Z Salary Spending: Gen Z को लेकर अक्सर एक धारणा बनाई जाती है कि यह पीढ़ी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा घूमने-फिरने, महंगे गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़ों, ऑनलाइन शॉपिंग और दिखावे पर खर्च करती है। सोशल मीडिया पर लगातार नजर आने वाली लग्जरी लाइफस्टाइल की तस्वीरों ने इस धारणा को और मजबूत किया है। लेकिन एक नई स्टडी इस तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक, युवा प्रोफेशनल्स की कमाई का बड़ा हिस्सा किसी लग्जरी लाइफस्टाइल के बजाय रोजमर्रा की जरूरतों, बिलों, वित्तीय सेवाओं और खाने-पीने जैसी कैटेगरी में जा रहा है।
एआई और यूपीआई आधारित एंप्लॉय फाइनेंशियल बेनेफिट्स प्लेटफॉर्म SalarySe की रिपोर्ट में 5.2 लाख से अधिक सैलरी पाने वाले Gen Z यूजर्स के करोड़ों यूपीआई लेन-देन का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में 18 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं के खर्च करने के पैटर्न को देखा गया है। आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट के दौर में पली-बढ़ी यह पीढ़ी अपनी कमाई को कई जरूरी खर्चों में बांट रही है।
हालांकि, इस तरह की स्टडी को पूरे Gen Z वर्ग की आदतों का सार्वभौमिक प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता। फिर भी, इतने बड़े ट्रांजैक्शन डेटाबेस से सामने आए पैटर्न युवा भारतीय वर्कफोर्स की बदलती वित्तीय प्राथमिकताओं की एक दिलचस्प तस्वीर जरूर पेश करते हैं।
Gen Z की सैलरी आखिर जा कहां रही है?
रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z के खर्च का बड़ा हिस्सा पांच प्रमुख कैटेगरी में जाता है। इनमें बिल और सब्सक्रिप्शन सबसे ऊपर हैं, जबकि किराना, वित्तीय सेवाएं, शॉपिंग और खाना भी बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा लेते हैं।
इन पांच कैटेगरी को जोड़ने पर कुल खर्च का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा कवर होता है। यानी युवा कर्मचारियों की कमाई का बड़ा हिस्सा ऐसी चीजों पर जा रहा है, जिन्हें सिर्फ ‘फिजूलखर्ची’ कहना सही नहीं होगा।
1. बिल और सब्सक्रिप्शन पर 20.1% खर्च
Gen Z के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा बिल भुगतान और सब्सक्रिप्शन का है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खर्च में इसकी हिस्सेदारी 20.1 फीसदी है।
इसमें बिजली, पानी, इंटरनेट, मोबाइल जैसे नियमित बिलों के साथ-साथ अलग-अलग डिजिटल सेवाओं के सब्सक्रिप्शन भी शामिल हो सकते हैं। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने इस कैटेगरी को युवाओं के मासिक बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
आज के दौर में एक युवा के पास मोबाइल रिचार्ज, ब्रॉडबैंड, क्लाउड स्टोरेज, OTT प्लेटफॉर्म, म्यूजिक स्ट्रीमिंग और दूसरी डिजिटल सेवाओं के लिए अलग-अलग भुगतान हो सकते हैं। इनमें से कई भुगतान ऑटो-पे या रिकरिंग पेमेंट के जरिए अपने आप हो जाते हैं।
यानी कई बार सैलरी आने के बाद पैसा खर्च होने का एहसास भी नहीं होता और छोटे-छोटे ऑटोमैटिक पेमेंट मिलकर बड़ा खर्च बन जाते हैं।
2. किराना और घरेलू सामान पर 15.7%
दूसरे नंबर पर किराना और घरेलू सामान हैं। रिपोर्ट में इस कैटेगरी की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी बताई गई है।
यह आंकड़ा खास इसलिए है क्योंकि Gen Z को अक्सर केवल ऑनलाइन शॉपिंग और लाइफस्टाइल खर्च से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन वास्तविक जीवन में राशन, घरेलू उपयोग की चीजें और रोजमर्रा की जरूरतें उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा ले रही हैं।
ऑनलाइन ग्रॉसरी ऐप्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के विस्तार ने भी इस तरह के खर्चों को डिजिटल बना दिया है। पहले जहां किराना खरीदने के लिए नकद भुगतान आम था, वहीं अब यूपीआई के जरिए कुछ मिनटों में सामान ऑर्डर किया जा सकता है।
इससे खर्च करना आसान हुआ है, लेकिन साथ ही छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन बढ़ने की वजह से महीने के अंत में कुल खर्च का हिसाब लगाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
3. वित्तीय सेवाओं पर 12.2%
Gen Z की वित्तीय आदतों से जुड़ा सबसे दिलचस्प आंकड़ा फाइनेंशियल सर्विसेज का है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कैटेगरी में 12.2 फीसदी खर्च होता है।
इसमें लोन की EMI, इंश्योरेंस, SIP और दूसरी वित्तीय सेवाओं से जुड़े भुगतान शामिल हो सकते हैं।
यह संकेत देता है कि युवा कमाने के साथ-साथ अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को भी संभाल रहे हैं। खासकर शुरुआती नौकरी करने वाले युवाओं के लिए EMI, बीमा और निवेश जैसे खर्च अब मासिक बजट का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि हर Gen Z निवेशक नहीं है और न ही रिपोर्ट का यह आंकड़ा सीधे तौर पर यह साबित करता है कि पूरी Gen Z अपनी आय का 12.2 फीसदी निवेश कर रही है। फाइनेंशियल सर्विसेज कैटेगरी में कई तरह के भुगतान शामिल हैं।
फिर भी, यह आंकड़ा बताता है कि युवा वर्ग के खर्चों में वित्तीय उत्पादों की भूमिका बढ़ रही है।
4. शॉपिंग पर 11.9%
चौथे नंबर पर शॉपिंग आती है। Gen Z की कुल खर्च हिस्सेदारी में शॉपिंग का आंकड़ा 11.9 फीसदी है।
इसमें कपड़े, व्यक्तिगत सामान और दूसरी खरीदारी शामिल है। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स के दौर में शॉपिंग युवाओं की लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
फिर भी, 11.9 फीसदी का आंकड़ा यह बताता है कि कुल खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा शॉपिंग नहीं है। यानी Gen Z को केवल ऑनलाइन शॉपिंग और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पर पैसा उड़ाने वाली पीढ़ी मानना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
5. खाने-पीने पर 11.5%
पांचवें स्थान पर खाना है, जिसकी हिस्सेदारी 11.5 फीसदी बताई गई है।
इसमें बाहर खाना, रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड डिलीवरी जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं। कामकाजी युवाओं के लिए बाहर खाना या ऐप से खाना मंगाना अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
खासकर बड़े शहरों में ऑफिस, लंबी यात्रा और व्यस्त जीवनशैली के कारण फूड डिलीवरी पर खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, एक तरफ यह सुविधा देता है, वहीं दूसरी तरफ छोटे-छोटे ऑर्डर मिलकर महीने का बड़ा बजट बना सकते हैं।
क्या Gen Z सच में ट्रैवल पर खूब पैसा खर्च करती है?
Gen Z के बारे में सबसे लोकप्रिय धारणाओं में से एक है कि युवा अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा ट्रैवल और एक्सपीरियंस पर खर्च करते हैं। सोशल मीडिया पर ट्रैवल फोटो और वीडियो इस धारणा को और मजबूत करते हैं।
लेकिन SalarySe की स्टडी के मुताबिक, इस विश्लेषण में शामिल युवा प्रोफेशनल्स अपने बजट का करीब 5 फीसदी हिस्सा ट्रैवल पर खर्च करते हैं।
यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीर से काफी अलग नजर आता है। हालांकि, यहां भी यह समझना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की जिंदगी का वही हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है जिसे वह शेयर करना चाहता है। इसलिए ऑनलाइन दिखाई देने वाली ट्रैवल लाइफस्टाइल को किसी पूरी पीढ़ी की वास्तविक वित्तीय आदत मानना सही नहीं होगा।
OTT और म्यूजिक पर भी Gen Z का खर्च
मनोरंजन की बात करें तो Gen Z की डिजिटल-first आदतें यहां साफ नजर आती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रिकरिंग सब्सक्रिप्शन में प्रमुख प्लेटफॉर्म्स की हिस्सेदारी में JioHotstar 12.4 फीसदी, Netflix 10.7 फीसदी और Spotify 5.6 फीसदी पर हैं।
इसका मतलब है कि युवा वर्ग मनोरंजन के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन को अपनी नियमित खर्च की आदतों में शामिल कर चुका है।
यह बदलाव केवल OTT तक सीमित नहीं है। म्यूजिक स्ट्रीमिंग, डिजिटल कंटेंट, इंटरनेट और दूसरी सेवाओं के लिए ऑटो-पे का इस्तेमाल बढ़ने से युवाओं के मासिक खर्च का एक हिस्सा नियमित रूप से कटता रहता है।
यही वजह है कि कई लोगों के लिए छोटे-छोटे डिजिटल सब्सक्रिप्शन महीने के अंत में बड़ा खर्च बन जाते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ बदल जाता है खर्च का पैटर्न
रिपोर्ट में 18 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं को अलग-अलग आयु समूहों में देखकर खर्च के पैटर्न का विश्लेषण किया गया है। इसमें एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आता है।
18 से 23 वर्ष के युवाओं और 24 से 29 वर्ष के युवाओं के बीच discretionary यानी इच्छा-आधारित खर्च का हिस्सा लगभग 32 फीसदी पर स्थिर रहता है।
लेकिन जरूरी खर्चों का हिस्सा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, 18-23 साल के आयु वर्ग में अनिवार्य खर्च करीब 50 फीसदी है, जो 24-29 साल की उम्र में बढ़कर 59 फीसदी तक पहुंच जाता है।
इस बदलाव के पीछे बढ़ती जिम्मेदारियां एक बड़ी वजह हो सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ किराया, परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियां, EMI, बीमा और दूसरी नियमित वित्तीय प्रतिबद्धतियां बढ़ सकती हैं।
यानी नौकरी के शुरुआती वर्षों में जहां युवा अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपनी पसंद पर खर्च कर सकता है, वहीं उम्र और जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ बजट में जरूरी खर्चों का वजन बढ़ने लगता है।
UPI ने कैसे बदल दी खर्च करने की आदत?
Gen Z के खर्च पैटर्न को समझने के लिए UPI और डिजिटल पेमेंट की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस पीढ़ी ने कैश की तुलना में मोबाइल आधारित पेमेंट को ज्यादा सहजता से अपनाया है।
एक कप चाय से लेकर किराने के सामान, रेस्टोरेंट बिल, मोबाइल रिचार्ज, OTT सब्सक्रिप्शन और EMI तक, बड़ी संख्या में भुगतान डिजिटल तरीके से किए जा सकते हैं।
इसका फायदा यह है कि लेन-देन तेज और सुविधाजनक हो जाता है। लेकिन दूसरी तरफ, डिजिटल पेमेंट खर्च करने की प्रक्रिया को इतना आसान बना देता है कि कई बार छोटे खर्चों पर ध्यान नहीं जाता।
यही वजह है कि युवाओं के लिए सिर्फ कमाई बढ़ाना ही नहीं, बल्कि अपने डिजिटल खर्चों को ट्रैक करना भी जरूरी होता जा रहा है।
Gen Z के लिए सबसे बड़ा सबक क्या है?
SalarySe की स्टडी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश शायद यह है कि Gen Z को केवल ‘फिजूलखर्च’ पीढ़ी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। उनके खर्चों में जरूरतें, बिल, वित्तीय सेवाएं, भोजन और घरेलू सामान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हां, शॉपिंग, OTT, म्यूजिक और बाहर खाने जैसे discretionary खर्च भी बजट का हिस्सा हैं। लेकिन रिपोर्ट के आंकड़ों से यह संकेत नहीं मिलता कि पूरा युवा वर्ग अपनी सैलरी सिर्फ दिखावे और घूमने-फिरने पर खर्च कर रहा है।
इसके बजाय डिजिटल युग में खर्चों का स्वरूप बदल गया है। पहले जहां कई सेवाओं के लिए अलग-अलग बिल या नकद भुगतान होते थे, अब वही खर्च UPI, ऑटो-पे और डिजिटल सब्सक्रिप्शन के जरिए हो रहे हैं।
युवा कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी सैलरी का सिर्फ बड़ा खर्च नहीं, बल्कि छोटे-छोटे नियमित खर्च भी ट्रैक करें। खासकर OTT सब्सक्रिप्शन, फूड डिलीवरी, ऑनलाइन शॉपिंग और ऑटो-पे जैसी कैटेगरी महीने के अंत में बजट पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
Gen Z की सैलरी की पूरी कहानी
कुल मिलाकर, SalarySe के आंकड़े Gen Z की वित्तीय जिंदगी की एक अलग तस्वीर दिखाते हैं। जहां सोशल मीडिया पर यह पीढ़ी ट्रैवल, फैशन और मनोरंजन से जुड़ी दिखाई देती है, वहीं वास्तविक ट्रांजैक्शन डेटा में बिल, किराना, वित्तीय सेवाएं और भोजन जैसे खर्च भी बहुत बड़ा हिस्सा रखते हैं।
20.1 फीसदी बिल और सब्सक्रिप्शन, 15.7 फीसदी किराना, 12.2 फीसदी वित्तीय सेवाएं, 11.9 फीसदी शॉपिंग और 11.5 फीसदी खाने पर खर्च यह बताता है कि युवा भारतीय वर्कफोर्स की सैलरी कई छोटी-बड़ी जरूरतों में बंट रही है।
और शायद यही इस स्टडी का सबसे दिलचस्प पहलू है—Gen Z सिर्फ पैसा खर्च नहीं कर रही, बल्कि डिजिटल तरीके से अपनी वित्तीय जिंदगी को मैनेज करने की कोशिश भी कर रही है। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे इस पीढ़ी की आय, जिम्मेदारियां और निवेश बढ़ेंगे, उनकी खर्च करने की आदतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
SalarySe के सह-संस्थापक पीयूष बगारिया के मुताबिक, भारत की Gen Z ऐसी पीढ़ी है जो अपनी वित्तीय जिंदगी के कई पहलुओं को डिजिटल-first इकोसिस्टम के जरिए संभाल रही है। उनके अनुसार, UPI की व्यापक पहुंच ने युवाओं के खर्च करने और पैसे मैनेज करने के तरीके को बदल दिया है। यह बदलाव भविष्य में बैंक, नियोक्ता और वित्तीय संस्थानों के लिए नए तरह के प्रोडक्ट डिजाइन करने का आधार बन सकता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट और आंकड़ों पर आधारित है। SalarySe की स्टडी में शामिल यूजर्स के खर्च पैटर्न को पूरी Gen Z आबादी का प्रतिनिधि मानना जरूरी नहीं है। वित्तीय सेवाओं, निवेश या किसी अन्य वित्तीय निर्णय से पहले अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लें। NewsJagran किसी निवेश या वित्तीय उत्पाद में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


