Sensex-Nifty Closes Red: घरेलू शेयर बाजार में बुधवार, 12 अगस्त 2026 को शुरुआती और इंट्रा-डे गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे कारोबारी दिन लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ाई। इसके अलावा टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर ने भी सेंटीमेंट पर दबाव बनाया।
कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 650 अंक से अधिक टूट गया था, जबकि निफ्टी भी 24,250 के आसपास पहुंच गया। हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से दोनों प्रमुख इंडेक्स ने अपनी गिरावट का बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया। सरकारी बैंकों में आई मजबूत खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया। इसके बावजूद आईटी, एफएमसीजी और ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टर्स में दबाव के कारण बाजार हरे निशान में नहीं लौट सका।
सेंसेक्स 187 अंक टूटा, निफ्टी में 36 अंकों की गिरावट
कारोबार के अंत में Sensex 187.90 अंक यानी 0.24 फीसदी की गिरावट के साथ 77,966.35 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 35.75 अंक यानी 0.15 फीसदी फिसलकर 24,435.95 के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि क्लोजिंग के आंकड़े इंट्रा-डे की गिरावट की तुलना में काफी बेहतर रहे। दिन के कारोबार में सेंसेक्स एक समय 656.32 अंक टूटकर 77,497.93 के स्तर तक पहुंच गया था। इसी तरह निफ्टी में भी करीब 205.75 अंकों की गिरावट आई और यह 24,265.95 के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया।
इससे साफ है कि बाजार ने निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी की, लेकिन निवेशकों की ओर से ऊंचे स्तरों पर सतर्कता बनी रही। खासकर ग्लोबल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बाजार में जोखिम बढ़ा हुआ नजर आया।
निचले स्तरों पर खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

बुधवार के कारोबार की सबसे अहम बात यह रही कि तेज गिरावट के बाद बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली। सुबह से ही बिकवाली का दबाव था और दिन के दौरान गिरावट और गहरी हो गई थी। हालांकि जैसे-जैसे इंडेक्स निचले स्तरों पर पहुंचे, कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी बढ़ी।
सरकारी बैंकों के शेयरों में आई तेजी ने भी बाजार की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Nifty PSU Bank Index 2 फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ। सरकारी बैंकिंग शेयरों में मजबूत प्रदर्शन ने व्यापक बाजार में कुछ हद तक भरोसा लौटाया।
प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी शुरुआती दबाव से बाहर निकलकर अंत में हरे निशान में बंद होने में सफल रहा। हालांकि आईटी और एफएमसीजी जैसे सेक्टर्स की कमजोरी के कारण प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स अपनी पूरी रिकवरी बरकरार नहीं रख सके।
निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स में कैसा रहा प्रदर्शन?

सेक्टरवार कारोबार की बात करें तो बुधवार को बाजार में काफी अंतर देखने को मिला। एक तरफ सरकारी बैंकों में जबरदस्त खरीदारी हुई, वहीं दूसरी तरफ आईटी और एफएमसीजी सेक्टर पर बिकवाली का दबाव रहा।
Nifty IT Index में डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में कमजोरी ने निफ्टी पर दबाव बढ़ाया। एफएमसीजी इंडेक्स भी आधे फीसदी से अधिक कमजोर रहा।
ऑटो सेक्टर की बात करें तो Nifty Auto करीब 0.32 फीसदी गिरकर बंद हुआ। दूसरी ओर सरकारी बैंकिंग शेयरों में तेजी ने बाजार की गिरावट को सीमित करने का काम किया।
इस तरह बुधवार के कारोबार में निवेशकों का फोकस मुख्य रूप से सेक्टर रोटेशन पर रहा। जहां कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी दिखाई दी, वहीं कई हैवीवेट शेयरों में बिकवाली ने इंडेक्स की रिकवरी को सीमित कर दिया।
BSE Market Cap में ₹1.60 लाख करोड़ की गिरावट
शेयर बाजार में गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा। बुधवार को बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹1.60 लाख करोड़ घट गया।
11 अगस्त 2026 को BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,93,81,760.58 करोड़ था। 12 अगस्त को कारोबार खत्म होने के बाद यह घटकर ₹4,92,20,172.75 करोड़ रह गया।
इस हिसाब से एक कारोबारी दिन में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹1,61,587.83 करोड़ की कमी आई।
यानी बाजार में भले ही इंट्रा-डे लो से मजबूत रिकवरी हुई हो, लेकिन क्लोजिंग के स्तर पर निवेशकों की कुल संपत्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
Sensex के सिर्फ 9 शेयर हरे निशान में बंद
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से बुधवार को सिर्फ 9 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि बाकी शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
सेंसेक्स के प्रमुख गेनर्स में SBI, Bharti Airtel और UltraTech Cement शामिल रहे। इन शेयरों में खरीदारी ने इंडेक्स को निचले स्तरों से रिकवर करने में मदद की।
दूसरी तरफ TCS, M&M और Tata Steel सबसे ज्यादा दबाव में रहे। इन शेयरों में गिरावट ने सेंसेक्स की रिकवरी को सीमित किया।
इससे बाजार की मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी होने के बावजूद व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था।
मिडकैप इंडेक्स ने की पूरी रिकवरी
ब्रोडर मार्केट की बात करें तो बुधवार को निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स का प्रदर्शन प्रमुख बेंचमार्क से अलग रहा।
Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.28 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसका मतलब है कि मिडकैप शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी मजबूत रही और इंडेक्स ने शुरुआती कमजोरी से पूरी तरह रिकवरी कर ली।
इसके विपरीत Nifty Smallcap 100 में 0.18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यानी छोटे शेयरों में सेंटीमेंट अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है।
मिडकैप शेयरों का हरे निशान में बंद होना बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन स्मॉलकैप में कमजोरी बताती है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा शेयरों में ही जोखिम लेने को तैयार हैं।
BSE पर 1,867 शेयर चढ़े, 2,462 में गिरावट
बुधवार को बीएसई पर कुल 4,525 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें से 1,867 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,462 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं 196 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
इस आंकड़े से पता चलता है कि बाजार में गिरावट सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं थी, बल्कि बड़ी संख्या में शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
हालांकि इसके बावजूद कुछ शेयरों ने बाजार के दबाव के बीच नया 52-वीक हाई बनाया। बीएसई पर 172 शेयर अपने एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। वहीं 134 शेयर 52-वीक लो पर आ गए।
इसके अलावा 8 शेयर अपर सर्किट पर पहुंचे, जबकि 42 शेयर लोअर सर्किट में बंद हुए।
यह आंकड़े बताते हैं कि बाजार में एकतरफा गिरावट के बजाय काफी ज्यादा स्टॉक-स्पेसिफिक मूवमेंट देखने को मिला।
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई बाजार की चिंता
बुधवार के कारोबार में ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण रहा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है। बुधवार को भी इसी वजह से बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव देखने को मिला।
Tata Sons से जुड़ी खबर ने भी बढ़ाया दबाव
बाजार की नजर टाटा समूह से जुड़ी खबरों पर भी रही। Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर से निवेशकों के बीच चर्चा तेज हुई और टाटा समूह से जुड़े शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
बाजार में पहले से ही ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल और सेक्टोरल कमजोरी को लेकर चिंता थी। ऐसे में कॉरपोरेट स्तर की इस बड़ी खबर ने निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी।
लगातार दूसरे दिन लाल निशान में बंद हुआ बाजार
बुधवार की क्लोजिंग के साथ सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट में बंद हुए। हालांकि दोनों इंडेक्स ने इंट्रा-डे लो से अच्छी रिकवरी की, लेकिन क्लोजिंग के समय भी बिकवाली पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
आने वाले कारोबार में निवेशकों की नजर अब ग्लोबल मार्केट संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर रहेगी। इसके अलावा सेक्टोरल रोटेशन भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल बुधवार के कारोबार से यह संकेत मिला कि 24,250-24,300 के आसपास निफ्टी में खरीदारी देखने को मिली, लेकिन ऊपरी स्तरों पर बिकवाली अभी भी बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। सेंसेक्स में भी 77,500 के आसपास से आई रिकवरी महत्वपूर्ण रही।
कुल मिलाकर बाजार ने भारी गिरावट से खुद को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन ग्लोबल तनाव और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली के कारण दिन का अंत लाल निशान में हुआ। निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹1.60 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट इसका सीधा असर रही।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं देता है।


