MRF Share Price: टायर बनाने वाली दिग्गज कंपनी MRF के शेयरों में जून तिमाही के कमजोर ऑपरेटिंग प्रदर्शन के बाद दबाव देखने को मिल रहा है। बुधवार, 12 अगस्त को भी कंपनी के शेयर में हल्की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, शेयर में हालिया कमजोरी के बावजूद विदेशी ब्रोकरेज फर्म CLSA का रुख सकारात्मक बना हुआ है। CLSA ने MRF पर अपनी ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए ₹1,65,240 का टारगेट प्राइस दिया है।
मंगलवार के बंद भाव के मुकाबले यह टारगेट करीब 26 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत देता है। ब्रोकरेज का मानना है कि कच्चे माल की लागत में तेज बढ़ोतरी के कारण जून तिमाही में कंपनी के मार्जिन पर दबाव पड़ा, लेकिन आने वाली तिमाहियों में कीमतों में बढ़ोतरी और लागत का बेहतर पास-थ्रू कंपनी की कमाई को सहारा दे सकता है।
बुधवार को भी MRF के शेयर में रही गिरावट
MRF के शेयर में बुधवार, 12 अगस्त को 0.26 फीसदी की गिरावट आई और यह ₹1,30,785 के भाव पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले मंगलवार को कंपनी द्वारा Q1 FY27 के नतीजे जारी किए जाने के बाद शेयर में करीब 2.04 फीसदी की गिरावट आई थी।
यानी लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में स्टॉक दबाव में रहा। निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से कंपनी के मुनाफे और ऑपरेटिंग मार्जिन में आई गिरावट को लेकर है।
साल 2026 में अब तक MRF के शेयर का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है। इस अवधि में स्टॉक करीब 13.4 फीसदी नीचे है, जबकि इसी दौरान बेंचमार्क Nifty 50 में करीब 6.5 फीसदी की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹55,450 करोड़ बताया गया है।
हालांकि, शेयर में कमजोरी के बावजूद CLSA का मानना है कि मौजूदा दबाव लंबे समय तक जारी नहीं रह सकता और आने वाली तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की गुंजाइश है।
CLSA ने क्यों बरकरार रखी ‘Outperform’ रेटिंग?
CLSA ने MRF पर ‘Outperform’ रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹1,65,240 का टारगेट प्राइस तय किया है। मौजूदा स्तर से देखें तो यह लगभग 26 फीसदी ऊपर का लक्ष्य है।
CLSA ने अपनी रिपोर्ट में जून तिमाही के दौरान कंपनी के मार्जिन पर पड़े दबाव को प्रमुख चिंता के तौर पर बताया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, MRF का EBITDA मार्जिन तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 453 बेसिस पॉइंट्स गिरा और यह उसके अनुमान से भी कम रहा।
मार्जिन में गिरावट का एक बड़ा कारण कंपनी के ग्रॉस मार्जिन पर पड़ा दबाव था। इसमें क्रमिक आधार पर करीब 566 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई। इसका मुख्य कारण कच्चे माल की लागत में लगभग 16-18 फीसदी की तेज बढ़ोतरी रही।
इससे साफ है कि कंपनी की बिक्री में वृद्धि होने के बावजूद लागत का दबाव कमाई पर भारी पड़ा। यही वजह है कि निवेशकों ने तिमाही नतीजों के बाद शेयर में बिकवाली की।
आगे मार्जिन में सुधार की उम्मीद क्यों?
कमजोर Q1 नतीजों के बावजूद CLSA को आने वाली तिमाहियों में MRF के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा कारण टायर कंपनियों द्वारा की गई कीमतों में बढ़ोतरी है।
ब्रोकरेज के अनुसार, टायर इंडस्ट्री पहले ही कीमतों में लगभग 7-9 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर चुकी है। इसके अलावा Q2 FY27 के दौरान भी कीमतों में और बढ़ोतरी किए जाने की योजना है।
इसका फायदा यह हो सकता है कि कच्चे माल की बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके। यदि कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरी तिमाही की बिक्री पर दिखाई देता है, तो कंपनी के मार्जिन में क्रमिक सुधार हो सकता है।
CLSA का मानना है कि MRF को आगे चलकर कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा तिमाही लाभ मिल सकता है। इसके अलावा ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी OEMs पर बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ट्रांसफर किए जाने से भी मार्जिन को फायदा मिलने की संभावना है।
Q1 FY27 में MRF की कमाई कैसी रही?
MRF ने जून तिमाही में राजस्व में वृद्धि दर्ज की, लेकिन बढ़ती लागत के कारण EBITDA और मार्जिन में गिरावट देखने को मिली।
कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.64 फीसदी बढ़कर ₹8,415.50 करोड़ हो गया। इसका मतलब है कि कंपनी की बिक्री में अच्छी वृद्धि हुई। लेकिन इसी दौरान खर्च में तेज बढ़ोतरी ने ऑपरेटिंग मुनाफे को प्रभावित किया।
MRF का EBITDA सालाना आधार पर 7.46 फीसदी घटकर ₹990.63 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹1,070.43 करोड़ था।
EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 13.95 फीसदी से घटकर 11.77 फीसदी रह गया। यानी कंपनी की बिक्री बढ़ने के बावजूद प्रत्येक ₹100 की बिक्री पर ऑपरेटिंग स्तर पर कम कमाई हुई।
यह आंकड़ा निवेशकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टायर कंपनियों के मुनाफे में कच्चे माल की कीमतों का काफी असर होता है। रबर, क्रूड-आधारित केमिकल्स और अन्य इनपुट की कीमतों में बदलाव सीधे कंपनी की लागत और मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
कच्चे माल की महंगाई बनी बड़ी चुनौती
MRF के Q1 प्रदर्शन को समझने के लिए कच्चे माल की लागत को देखना जरूरी है। कंपनी को तिमाही के दौरान इनपुट लागत में तेज बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा।
जब कच्चे माल की कीमत तेजी से बढ़ती है और कंपनियां तुरंत अपने उत्पादों की कीमत नहीं बढ़ा पातीं, तो उसका सीधा असर ग्रॉस मार्जिन और EBITDA मार्जिन पर पड़ता है।
MRF के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कच्चे माल की लागत में 16-18 फीसदी की बढ़ोतरी ने कंपनी के मार्जिन पर दबाव बनाया। हालांकि, टायर उद्योग की ओर से कीमतों में 7-9 फीसदी तक की बढ़ोतरी किए जाने के बाद आगे चलकर लागत का असर कम होने की उम्मीद है।
अगर आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी होती है और इनपुट कॉस्ट स्थिर रहती है, तो MRF जैसी कंपनियों को मार्जिन रिकवरी का फायदा मिल सकता है।
MRF शेयर में निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
MRF के शेयर को लेकर फिलहाल तस्वीर दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक तरफ Q1 के कमजोर मार्जिन और मुनाफे में दबाव निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। दूसरी तरफ CLSA जैसे ब्रोकरेज को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में ऑपरेटिंग प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।
निवेशकों को आगे मुख्य रूप से कुछ अहम संकेतकों पर नजर रखनी होगी। इनमें कच्चे माल की कीमतें, टायरों की कीमतों में आगे होने वाली बढ़ोतरी, OEM मांग, रिप्लेसमेंट मार्केट की स्थिति और कंपनी का EBITDA मार्जिन प्रमुख हैं।
यदि कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा लाभ कंपनी की कमाई में दिखाई देता है और कच्चे माल की लागत का दबाव कम होता है, तो मार्जिन में सुधार संभव है। इसके उलट यदि इनपुट कॉस्ट लगातार ऊंची रहती है और कीमतों में बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं होती, तो मुनाफे पर दबाव जारी रह सकता है।
CLSA का ₹1.65 लाख का टारगेट कितना अहम है?
₹1,65,240 का CLSA टारगेट मौजूदा ₹1.30 लाख से अधिक के स्तर से करीब 26 फीसदी संभावित तेजी दर्शाता है। इससे पता चलता है कि ब्रोकरेज का मानना है कि Q1 की कमजोरी को बाजार ने काफी हद तक कीमत में शामिल कर लिया है और भविष्य में कमाई में सुधार होने पर स्टॉक को दोबारा रेटिंग मिल सकती है।
हालांकि, किसी ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस को निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। बाजार की स्थिति, कंपनी के अगले तिमाही नतीजे, कच्चे माल की कीमतें और ऑटो सेक्टर की मांग जैसे कई कारक MRF के शेयर की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
MRF के Q1 FY27 नतीजों में सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती लागत के कारण EBITDA और मार्जिन में आई गिरावट रही। कंपनी का रेवेन्यू करीब 9.64 फीसदी बढ़ा, लेकिन EBITDA 7.46 फीसदी घट गया और EBITDA मार्जिन 13.95 फीसदी से गिरकर 11.77 फीसदी रह गया।
इसके बावजूद CLSA ने MRF पर ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹1,65,240 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि टायर कीमतों में पहले की गई और आगे होने वाली बढ़ोतरी से कंपनी को आने वाली तिमाहियों में मार्जिन सुधार का फायदा मिलेगा।
इसलिए फिलहाल MRF के लिए अगली कुछ तिमाहियां बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी बढ़ी हुई लागत को कितनी तेजी से ग्राहकों तक पास ऑन कर पाती है और क्या इससे EBITDA मार्जिन में वास्तविक सुधार देखने को मिलता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में शेयर बाजार और निवेश से जुड़ी जानकारी दी गई है। यह निवेश की सलाह नहीं है। ब्रोकरेज की रेटिंग और टारगेट प्राइस उनके अपने अनुमान होते हैं और इनमें बदलाव संभव है। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


