Ram Temple CEO Job Interview: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी संभालने के लिए पहली बार फुल-टाइम CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस पद के लिए देशभर से 5,300 से अधिक आवेदन मिलने के बाद 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के तीन पूर्व अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक पूर्व अधिकारी और चार पूर्व सैन्य अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CEO पद के लिए हुए इंटरव्यू में उम्मीदवारों से प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, बजट प्रबंधन और बड़े धार्मिक आयोजनों के संचालन से जुड़े सवाल तो पूछे ही गए, लेकिन उनकी धार्मिक आस्था और निजी आदतों से जुड़े सवाल भी चर्चा में रहे। रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीदवारों से जनेऊ पहनने, शिखा रखने, शाकाहारी या मांसाहारी भोजन करने और शराब के सेवन जैसे विषयों पर भी सवाल किए गए।
5,300 से ज्यादा आवेदन, 18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहली बार मंदिर प्रशासन के लिए एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने जा रहा है। इस पद के लिए देशभर से 5,300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। शुरुआती छंटनी के बाद 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशासनिक और नेतृत्व का अनुभव रखने वाले लोग शामिल हैं। तीन पूर्व IAS अधिकारियों, एक पूर्व IPS अधिकारी और चार पूर्व सैन्य अधिकारियों के अलावा अन्य अनुभवी उम्मीदवार भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
CEO की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और मंदिर से जुड़े प्रशासन, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, वित्तीय व्यवस्था तथा विभिन्न सुविधाओं के संचालन का दायरा भी बड़ा हो गया है।
इंटरव्यू में धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक आस्था से संबंधित कई सवाल पूछे गए। इनमें कथित तौर पर यह भी पूछा गया कि क्या उम्मीदवार शिखा रखते हैं और क्या जनेऊ पहनते हैं।
इसके अलावा उम्मीदवारों से यह जानने की कोशिश की गई कि वे खुद को हिंदू धार्मिक परंपराओं से किस तरह जोड़ते हैं और भगवान राम के प्रति उनकी आस्था कैसी है। कुछ रिपोर्ट्स में उम्मीदवारों से यह पूछे जाने का भी उल्लेख है कि वे खुद को पक्का या कट्टर हिंदू मानते हैं या नहीं।
हालांकि, इन सवालों और चयन में उनके वास्तविक महत्व को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इन दावों को मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या उम्मीदवार नॉन-वेज खाते हैं? शराब को लेकर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरव्यू में उम्मीदवारों के खान-पान से जुड़े सवाल भी पूछे गए। उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि वे पूरी तरह शाकाहारी हैं या मांसाहारी भोजन करते हैं।
इसके अलावा कुछ उम्मीदवारों से शराब के सेवन को लेकर भी सवाल किए जाने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CEO पद के लिए उम्मीदवारों की व्यक्तिगत आदतों और धार्मिक जीवनशैली से जुड़ी जानकारी भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा रही।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस पद के लिए उम्मीदवार से हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुरूप जीवनशैली की अपेक्षा की गई है। हालांकि, नियुक्ति के अंतिम मानदंड और प्रत्येक शर्त की आधिकारिक पुष्टि ट्रस्ट की ओर से विस्तार से सामने नहीं आई है।
Google Form में भी मांगी गई जानकारी
सूत्रों के मुताबिक, इंटरव्यू से पहले उम्मीदवारों से एक Google Form भी भरवाया गया था। इसमें उनके प्रशासनिक और पेशेवर अनुभव के साथ-साथ व्यक्तिगत और धार्मिक पृष्ठभूमि से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
चयन समिति ने उम्मीदवारों के CV में दी गई जानकारियों पर भी चर्चा की। उनके पिछले पदों, प्रशासनिक जिम्मेदारियों, नेतृत्व क्षमता, लोगों के साथ संवाद और जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को समझने के लिए सवाल किए गए।
राम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थल के प्रशासन में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में उम्मीदवारों के पिछले अनुभव में बड़े आयोजनों, भीड़ प्रबंधन और संकट की स्थिति को संभालने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बड़े धार्मिक आयोजनों और भीड़ प्रबंधन पर फोकस
राम मंदिर में प्रमुख त्योहारों और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ सकती है। ऐसे में CEO के सामने केवल मंदिर प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय, सुविधाओं का विस्तार और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाए रखने जैसी चुनौतियां भी होंगी।
इसी वजह से इंटरव्यू में उम्मीदवारों से उनके पुराने कार्यकाल के दौरान संभाली गई बड़ी भीड़ और कठिन प्रशासनिक परिस्थितियों के बारे में सवाल किए जाने की बात सामने आई है।
उम्मीदवारों से यह जानने की कोशिश की गई कि उन्होंने पहले कभी हजारों या लाखों लोगों से जुड़े कार्यक्रमों को किस तरह मैनेज किया, अचानक पैदा हुई प्रशासनिक चुनौती से कैसे निपटे और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया।
CEO पद के लिए उम्र और अन्य शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राम मंदिर CEO पद के लिए उम्र सीमा 50 से 70 वर्ष के बीच रखी गई है। उम्मीदवार से प्रशासनिक क्षमता के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक संदर्भों की समझ की भी अपेक्षा की जा रही है।
रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि उम्मीदवार के लिए हिंदू परंपराओं का पालन करने वाला होना, सख्त शाकाहारी होना और शराब से पूरी तरह दूर रहना जैसी शर्तें रखी गई हैं।
हालांकि, इन सभी शर्तों की आधिकारिक स्थिति को लेकर अंतिम पुष्टि ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट रूप से सामने आना बाकी है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी अंतिम शर्त को आधिकारिक घोषणा के बाद ही निश्चित माना जाना चाहिए।
पहली बार फुल-टाइम CEO की नियुक्ति क्यों अहम?
राम मंदिर के निर्माण के बाद मंदिर प्रशासन का दायरा लगातार बढ़ा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर परिसर में सुविधाओं, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन, दान और चढ़ावे की व्यवस्था तथा अलग-अलग प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन भी महत्वपूर्ण हो गया है।
ऐसे में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का उद्देश्य मंदिर से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए एक केंद्रीकृत प्रशासनिक नेतृत्व तैयार करना माना जा रहा है।
नए CEO की जिम्मेदारी में मंदिर प्रशासन, श्रद्धालु सुविधाएं, बड़े आयोजनों का प्रबंधन, विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय और मंदिर से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी शामिल हो सकती है।
मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों की निगरानी भी बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर के बढ़ते आकार और श्रद्धालुओं की संख्या के साथ आर्थिक गतिविधियों का दायरा भी बड़ा है। मंदिर को मिलने वाले दान, चढ़ावे और अन्य संसाधनों का पारदर्शी एवं व्यवस्थित प्रबंधन महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स में मंदिर से जुड़े नकदी, सोने और अन्य चढ़ावे की कथित चोरी या गबन से संबंधित मामलों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे माहौल में नए CEO के सामने वित्तीय प्रक्रियाओं को मजबूत करना और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना अहम चुनौती हो सकती है।
हालांकि, किसी भी कथित अनियमितता से जुड़े मामलों में संबंधित जांच और आधिकारिक निष्कर्ष को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
बंद कमरे में हुआ इंटरव्यू
CEO पद के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हुई। रिपोर्ट के अनुसार, पहले दिन 10 उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए गए, जबकि बाकी उम्मीदवारों के इंटरव्यू बुधवार को होने की संभावना जताई गई।
इंटरव्यू राम मंदिर परिसर के उत्तरी हिस्से में स्थित एक ग्रीनहाउस में बंद दरवाजों के पीछे आयोजित किए गए। चयन प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया ताकि उम्मीदवारों से बातचीत और मूल्यांकन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक न हो।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरव्यू सुबह 9 बजे शुरू हुए। पहला सत्र दोपहर 12 बजे तक चला, जबकि दूसरा सत्र दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित किया गया। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में इंटरव्यू की अवधि को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है।
चयन समिति में कौन-कौन शामिल?
राम मंदिर CEO के चयन के लिए बनाई गई समिति में पूर्व जज प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन एवं वैज्ञानिक सुरेश हावरे के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन भी इंटरव्यू के दौरान चयन समिति के साथ मौजूद रहे।
अब 18 शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में से किसे राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाता है, इस पर सबकी नजर है। अंतिम चयन में प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, धार्मिक-सामाजिक संदर्भों की समझ और इतने बड़े धार्मिक संस्थान को प्रभावी तरीके से संचालित करने की क्षमता अहम भूमिका निभा सकती है।
नोट: इस खबर में धार्मिक आस्था, खान-पान और निजी आदतों से जुड़े इंटरव्यू सवालों की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से दी गई है। इन दावों पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।


