Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार को ग्लोबल संकेत मिले-जुले नजर आ रहे हैं। एक तरफ GIFT Nifty में मामूली बढ़त दिखाई दे रही है, जिससे घरेलू बाजार की शुरुआत सपाट से हल्की मजबूती के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं। दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से पहले निवेशकों की सतर्कता बाजार की तेजी पर दबाव डाल सकती है।
मंगलवार को गिरावट के बाद आज निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार शुरुआती बढ़त को कायम रख पाता है या नहीं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की गतिविधियां, क्रूड ऑयल की कीमत और एशियाई बाजारों का रुख भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
GIFT Nifty से क्या मिल रहे हैं संकेत?
बुधवार सुबह करीब 7:50 बजे GIFT Nifty 40 अंक या 0.16 फीसदी की बढ़त के साथ 24,555.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि Nifty 50 की शुरुआत मंगलवार के 24,471.70 के बंद स्तर से ऊपर हो सकती है।
हालांकि GIFT Nifty में बढ़त बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में इसे बाजार में मजबूत तेजी का संकेत नहीं माना जा सकता। निवेशक ग्लोबल बाजारों और क्रूड की चाल पर नजर रखते हुए कारोबार कर सकते हैं।
मंगलवार को घरेलू बाजार में दबाव देखने को मिला था। Sensex 388.19 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 78,154.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 112.10 अंक यानी 0.46 फीसदी टूटकर 24,471.70 पर बंद हुआ।
FIIs की चाल भी महत्वपूर्ण
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रही हैं। कैश मार्केट में FIIs की हल्की खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वायदा कारोबार में बिकवाली का रुख बना रहा।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों के नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशक अभी भारतीय बाजार में आक्रामक तेजी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों के साथ-साथ FIIs की पोजीशन पर नजर रखना आज के कारोबार में अहम रहेगा।
US महंगाई के आंकड़ों पर बाजार की नजर
ग्लोबल निवेशकों की नजर जुलाई के US Consumer Price Inflation यानी CPI आंकड़ों पर है। यह आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं तो ब्याज दरों में कटौती को लेकर बाजार की उम्मीद प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत, महंगाई में नरमी से फेड के लिए दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ सकती है।
इसी वजह से अमेरिकी महंगाई रिपोर्ट से पहले निवेशक बड़े दांव लगाने से बच सकते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार समेत दूसरे उभरते बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
बुधवार को एशियाई बाजारों में भी स्पष्ट दिशा नहीं दिखाई दी। निवेशक पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से पहले सतर्क नजर आए।
MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज करीब 0.4 फीसदी ऊपर रहा। दक्षिण कोरिया का टेक्नोलॉजी आधारित Kospi करीब 2.8 फीसदी उछला, जिसे मजबूत कॉरपोरेट नतीजों से समर्थन मिला।
जापान का Topix करीब 0.4 फीसदी चढ़ा, जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स में करीब 0.3 फीसदी की कमजोरी रही। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 करीब 0.5 फीसदी गिरा, जबकि हांगकांग का Hang Seng करीब 0.8 फीसदी नीचे रहा। शंघाई कंपोजिट में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा।
इस तरह एशियाई बाजारों से भारतीय बाजार को कोई मजबूत सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहा है।
वॉल स्ट्रीट में भी दबाव
मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने को लेकर उम्मीदें कमजोर पड़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी।
ईरान की ओर से दिए गए संकेतों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने की आशंका है।
मंगलवार के कारोबार में S&P 500 में 0.32 फीसदी, Nasdaq Composite में 0.60 फीसदी और Dow Jones Industrial Average में 0.34 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजार में कमजोरी और बढ़ते क्रूड की कीमतें भारतीय इक्विटी बाजार के लिए भी चुनौती बन सकती हैं।
Brent Crude $90 के करीब
भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंताओं में से एक कच्चे तेल की बढ़ती कीमत है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सप्लाई बाधित होने की आशंका से क्रूड में तेजी बनी हुई है।
बुधवार को Brent Crude Futures करीब 0.81 फीसदी बढ़कर 89.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं US West Texas Intermediate (WTI) Crude करीब 0.85 फीसदी बढ़कर 83.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
इससे पहले मंगलवार को दोनों प्रमुख बेंचमार्क एक डॉलर से ज्यादा चढ़े थे और 31 जुलाई के बाद के अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग स्तर पर पहुंचे थे। सोमवार को भी क्रूड में करीब 5 फीसदी की तेज बढ़त देखने को मिली थी।
क्रूड महंगा हुआ तो भारतीय बाजार पर क्या असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमत में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
महंगा कच्चा तेल रुपये पर भी दबाव डाल सकता है और इससे महंगाई, मार्जिन और कॉरपोरेट कमाई प्रभावित होने की आशंका रहती है। खासतौर पर एविएशन, पेंट, केमिकल, टायर और कुछ अन्य तेल-निर्भर सेक्टरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
दूसरी तरफ, तेल एवं गैस क्षेत्र की कुछ कंपनियों को ऊंची कीमतों से अलग-अलग परिस्थितियों में फायदा भी मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को केवल इंडेक्स ही नहीं, बल्कि अलग-अलग सेक्टरों पर क्रूड के प्रभाव को भी समझना होगा।
आज बाजार में किन संकेतों पर नजर रखें?
बुधवार के कारोबार में निवेशकों के लिए चार प्रमुख संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। पहला, GIFT Nifty की चाल यह बताएगी कि घरेलू बाजार किस दिशा में खुल सकता है। दूसरा, Brent Crude का 90 डॉलर के आसपास कारोबार बाजार की चिंता बढ़ा सकता है।
तीसरा, FIIs की कैश और फ्यूचर्स पोजीशन बाजार में विदेशी निवेशकों के रुख का संकेत देगी। चौथा, US CPI आंकड़े आने वाले दिनों में ग्लोबल इक्विटी बाजारों की दिशा प्रभावित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, GIFT Nifty में मामूली बढ़त के बावजूद बाजार के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। क्रूड की तेजी और पश्चिम एशिया का तनाव तेजी को सीमित कर सकते हैं, जबकि मजबूत एशियाई टेक शेयर और घरेलू स्तर पर खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है।
निवेशकों के लिए आज का फोकस: बाजार में किसी भी तेजी को केवल शुरुआती GIFT Nifty संकेत के आधार पर नहीं देखना चाहिए। क्रूड, FIIs की गतिविधि, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और ग्लोबल बाजारों की दिशा को साथ में देखकर ही बाजार का रुख समझना बेहतर होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार से जुड़े उपलब्ध संकेतों और सूचनाओं पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


