Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच रहने वाला है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए थे। अब निवेशकों की नजर एशियाई बाजारों के रुख, अमेरिका के जुलाई महंगाई आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इसके अलावा कई कंपनियों के तिमाही नतीजे और बड़ी ब्लॉक डील भी आज कुछ शेयरों में हलचल बढ़ा सकती हैं।
ग्लोबल स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में कम होती आवाजाही ने कच्चे तेल की कीमतों को 90 डॉलर के करीब बनाए रखा है। दूसरी ओर, अमेरिकी बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए। ऐसे में भारतीय बाजार की शुरुआत से पहले निवेशकों को इन प्रमुख घटनाक्रमों पर नजर रखना जरूरी है।
मंगलवार को कैसी रही बाजार की चाल?
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं, वित्तीय शेयरों में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 फीसदी गिरकर 78,154.25 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 फीसदी की गिरावट के साथ 24,471.70 अंक पर रहा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 0.2 फीसदी की तेजी रही।
आज बाजार के लिए ग्लोबल संकेत कैसे हैं?
भारतीय बाजार के लिए बुधवार को संकेत पूरी तरह मजबूत नहीं हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त दिखाई दे रही है, जबकि एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है।
निवेशकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिका के जुलाई के महंगाई आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से अमेरिका के फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा या कम रहने पर वैश्विक इक्विटी बाजारों में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
एशियाई बाजारों में सतर्कता
बुधवार को एशियाई बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। निक्केई में करीब 0.07 फीसदी की बढ़त दिखी। स्ट्रेट टाइम्स में 0.26 फीसदी की कमजोरी रही।
हैंगसेंग करीब 1.14 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा। इसके विपरीत ताइवान के बाजार में 0.63 फीसदी की तेजी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3.34 फीसदी ऊपर कारोबार करता नजर आया। शंघाई कंपोजिट में भी करीब 0.07 फीसदी की मामूली बढ़त रही।
एशियाई बाजारों का यह मिला-जुला रुख भारतीय बाजार की शुरुआती धारणा को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट
मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों का फोकस पश्चिम एशिया में संभावित समझौते और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर रहा।
S&P 500 में 0.32 फीसदी की गिरावट आई और यह 7,728.20 अंक पर बंद हुआ। नैस्डैक 0.60 फीसदी गिरकर 26,445.45 अंक पर रहा। वहीं डाओ जोंस 0.34 फीसदी की गिरावट के साथ 53,791.85 अंक पर बंद हुआ।
अमेजन और अल्फाबेट जैसे बड़े टेक शेयरों में कमजोरी ने भी अमेरिकी बाजार की धारणा पर असर डाला।
डॉलर इंडेक्स पर भी नजर
एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में डॉलर में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। करेंसी मार्केट की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर बनी हुई है।
फिलहाल डॉलर इंडेक्स करीब 99.82 के आसपास कारोबार करता दिख रहा है। महंगाई के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आने पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
US बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी निवेशकों के रडार पर हैं। शुरुआती कारोबार में 10 साल की US बॉन्ड यील्ड करीब 4.70 फीसदी, जबकि 2 साल की यील्ड करीब 4.22 फीसदी के आसपास रही।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी आम तौर पर इक्विटी बाजारों के लिए दबाव का संकेत मानी जाती है, खासकर तब जब निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों के अगले कदम का अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हों।
एशियाई करेंसी में क्या हुआ?
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई करेंसी में कमजोरी रही। इंडोनेशियाई रुपिया में करीब 0.59 फीसदी की गिरावट सबसे ज्यादा रही।
फिलीपींस पेसो में 0.15 फीसदी और थाई बहत में करीब 0.10 फीसदी की कमजोरी रही। दक्षिण कोरियाई वॉन, जापानी येन और सिंगापुर डॉलर में भी मामूली गिरावट देखने को मिली।
वहीं ताइवानी डॉलर, चीनी रेनमिनबी और मलेशियाई रिंगित में करीब 0.07 फीसदी तक की मामूली मजबूती रही।
FII और DII फंड फ्लो
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं।
11 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में करीब 258 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस तरह वे नेट बायर बने रहे।
घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII भी खरीदार रहे और उन्होंने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 25 करोड़ रुपये का निवेश किया।
हालांकि कैश मार्केट में विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बावजूद वायदा बाजार में उनकी बिकवाली और नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट में बढ़ोतरी बाजार के लिए सावधानी का संकेत देती है।
SEBI का FPIs को लेकर बड़ा कदम
नॉन-एग्री कमोडिटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की भागीदारी को लेकर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।
प्रस्ताव में क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, गोल्ड, सिल्वर और बेस मेटल्स जैसे कमोडिटी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत FPIs को फिजिकल डिलीवरी लेने की अनुमति नहीं होगी।
SEBI का यह कदम कमोडिटी डेरिवेटिव्स में विदेशी निवेशकों की भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे सकता है।
आज करीब 5,100 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील
बाजार में बुधवार को कई बड़ी ब्लॉक डील भी देखने को मिल सकती हैं। इससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में सामान्य कारोबार के मुकाबले अधिक वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
डॉ. अग्रवाल हेल्थकेयर में करीब 2,000 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील की चर्चा है। टेमासेक और TPG करीब 500 रुपये प्रति शेयर के भाव पर लगभग 13 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती हैं।
इसके अलावा थायरोकेयर में करीब 1,000 करोड़ रुपये और टेनेको क्लीन एयर में करीब 2,100 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर इन प्रमुख सौदों का आकार करीब 5,100 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
मणप्पुरम फाइनेंस के नतीजे अनुमान से बेहतर
मणप्पुरम फाइनेंस के पहली तिमाही के नतीजे बाजार के अनुमान से बेहतर रहे। कंपनी का मुनाफा चार गुना से ज्यादा बढ़ा है।
कंपनी की NII यानी नेट इंटरेस्ट इनकम में करीब 25 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं कंपनी का AUM 57 फीसदी बढ़कर 69,635 करोड़ रुपये पहुंच गया।
मजबूत AUM ग्रोथ और ब्याज आय में बढ़ोतरी के कारण आज इस शेयर पर बाजार की नजर रह सकती है।
PI Industries के नतीजे कमजोर, NBCC का मुनाफा बढ़ा
PI Industries के पहली तिमाही के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे। कंपनी के मुनाफे में करीब 39 फीसदी की गिरावट आई, जबकि रेवेन्यू करीब 10 फीसदी घटा।
कंपनी के मार्जिन में भी करीब 570 बेसिस प्वाइंट की गिरावट देखने को मिली। इसलिए आज शेयर में दबाव देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर NBCC का पहली तिमाही का मुनाफा करीब 17 फीसदी बढ़ा। हालांकि कंपनी की आय में लगभग 5 फीसदी की कमी आई है। ऐसे में निवेशक मुनाफे में वृद्धि और रेवेन्यू के आंकड़ों को साथ रखकर शेयर की प्रतिक्रिया देख सकते हैं।
Godrej Consumer में बड़ा मैनेजमेंट बदलाव
Godrej Consumer Products (GCPL) में टॉप मैनेजमेंट स्तर पर बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी के MD & CEO सुधीर सीतापति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
उनकी जगह आसिफ मलबारी आज से अगले पांच साल के लिए जिम्मेदारी संभालेंगे।
कंपनी के नेतृत्व में यह बदलाव निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में आज GCPL के शेयर में वॉल्यूम और कीमत के स्तर पर हलचल देखने को मिल सकती है।
Apollo Hospitals और Grasim के नतीजों पर नजर
नतीजों के लिहाज से भी बुधवार का दिन महत्वपूर्ण है। निफ्टी की दो प्रमुख कंपनियां Apollo Hospitals और Grasim Industries अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी।
बाजार अनुमान के मुताबिक Apollo Hospitals का मुनाफा करीब 35 फीसदी बढ़ सकता है, जबकि रेवेन्यू में लगभग 18 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है।
इसके अलावा HAL और GMR Airports समेत फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट की कुछ अन्य कंपनियों के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी चिंता
पश्चिम एशिया में तनाव और संभावित समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए सबसे अहम जोखिमों में शामिल हैं।
कतर के विदेश मंत्रालय की ओर से ईरान और ओमान के बीच बातचीत को अहम मोड़ पर बताया गया है। दूसरी ओर समुद्री मार्गों पर तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में कम आवाजाही ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।
कच्चा तेल करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने से भारत के लिए आयात बिल, रुपये और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर खासतौर पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एविएशन और कुछ अन्य सेक्टरों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है।
आज ट्रेड लेने से पहले इन संकेतों पर रखें नजर
बुधवार के कारोबार में निवेशकों के लिए कुछ प्रमुख ट्रिगर बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिका के जुलाई महंगाई आंकड़े ग्लोबल बाजारों की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत, डॉलर इंडेक्स, US बॉन्ड यील्ड और एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार की चाल को प्रभावित करेगा।
घरेलू स्तर पर FII-DII फ्लो, बड़ी ब्लॉक डील, SEBI का FPIs से जुड़ा कंसल्टेशन पेपर और कंपनियों के तिमाही नतीजे स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन बढ़ा सकते हैं।
ऐसे में किसी भी शेयर में ट्रेड लेने से पहले केवल बाजार की शुरुआती चाल के बजाय इन सभी संकेतकों को साथ में देखना जरूरी होगा। खासकर ऐसे समय में जब कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर है और ग्लोबल बाजार अमेरिकी महंगाई आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल बाजार से जुड़ी जानकारी और प्रमुख घटनाक्रमों को समझाने के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश या ट्रेडिंग की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


