Crude Oil Price Today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बुधवार को लगातार छठे कारोबारी दिन कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब $90 प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी मजबूत होकर $84 के करीब पहुंच गया।
तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब बाजार में पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार बढ़ने के संकेत भी मिले हैं। इसके बावजूद भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
ब्रेंट क्रूड और WTI में कितनी तेजी आई?
बुधवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट यानी 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस तरह ब्रेंट में लगातार छठे दिन तेजी जारी रही।
दूसरी ओर, US West Texas Intermediate (WTI) क्रूड 71 सेंट यानी 0.85% की बढ़त के साथ $83.91 प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले चार कारोबारी सत्रों में WTI की कीमत में करीब 11% की तेजी आ चुकी है।
इससे पहले मंगलवार के कारोबारी सत्र में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में $1 से अधिक की बढ़त दर्ज की गई थी। दोनों ही अपने 31 जुलाई के बाद के सबसे ऊंचे क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गए थे।
सोमवार को भी कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 5% की तेजी आई थी। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता जल्द होने की उम्मीद फिलहाल कमजोर पड़ रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या है?
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में इस समय सबसे बड़ा फोकस पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz पर है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
बाजार को चिंता है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या यहां से जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से निवेशक संभावित सप्लाई शॉक के जोखिम को कीमतों में शामिल कर रहे हैं। दूसरी तरफ, जब भी बातचीत में प्रगति की खबर आती है, तो कीमतों पर दबाव देखने को मिलता है। यानी फिलहाल तेल बाजार में शांति की उम्मीद और सप्लाई बाधित होने का डर, दोनों आमने-सामने हैं।
Strait of Hormuz को लेकर क्या हो रहा है?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा है कि अमेरिका और ईरान Strait of Hormuz को लेकर किसी समझौते के करीब पहुंच सकते हैं। वहीं, कतर के विदेश मंत्रालय की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है।
हालांकि, बाजार अभी इन कूटनीतिक प्रयासों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। बातचीत में किसी भी तरह की देरी या तनाव बढ़ने की खबर कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊपर धकेल सकती है।
Strait of Hormuz की अहमियत इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है। ऐसे में इस रूट पर किसी भी तरह की बड़ी बाधा का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
दो जहाजों पर हमले से भी बढ़ी बाजार की चिंता
तेल बाजार में तनाव उस समय और बढ़ गया जब एक पनामा-फ्लैग वाले कार्गो जहाज पर अमेरिकी नौसेना के हेलीकॉप्टर द्वारा कार्रवाई किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था।
इस घटना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और समुद्री परिवहन पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
तेल बाजार आमतौर पर ऐसे घटनाक्रमों पर तुरंत प्रतिक्रिया करता है, क्योंकि कच्चे तेल की वास्तविक सप्लाई प्रभावित होने से पहले ही ट्रेडर्स संभावित जोखिम को कीमतों में शामिल करना शुरू कर देते हैं।
Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही में गिरावट
रिपोर्टों के अनुसार, Strait of Hormuz से शिपिंग गतिविधियों में काफी गिरावट आई है। हालांकि, फारस की खाड़ी से कुछ मात्रा में कच्चे तेल की आवाजाही अभी भी जारी है।
कई टैंकरों के ट्रांसपोंडर बंद करके चलने की खबरों ने भी बाजार में पारदर्शिता को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में तेल की वास्तविक आवाजाही और उपलब्ध सप्लाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य से हर दिन करीब 9 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही हो रही है।
हालांकि, बाजार का ध्यान इस बात पर है कि क्या यह आवाजाही आने वाले दिनों में सामान्य स्तर पर लौट पाएगी या नहीं।
इस साल 40% से ज्यादा बढ़ चुका है कच्चा तेल
पश्चिम एशिया के तनाव ने इस साल कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी को जन्म दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।
रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों में कुछ मामलों में तेजी और भी ज्यादा रही है। इसका कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत नहीं है, बल्कि परिवहन, बीमा, शिपिंग और सप्लाई रूट से जुड़ा जोखिम भी कीमतों पर असर डाल रहा है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण पहले से प्रभावित ऊर्जा बाजार पर पश्चिम एशिया का तनाव अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। खासकर डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।
US में बढ़ रहे क्रूड स्टॉक का भी बाजार पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच अमेरिका से एक अलग संकेत मिला है। इंडस्ट्री के आंकड़ों में अमेरिकी क्रूड ऑयल इन्वेंट्री में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं।
सामान्य परिस्थितियों में अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक बढ़ना कीमतों के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि इससे उपलब्ध सप्लाई पर्याप्त होने का संकेत मिलता है।
लेकिन फिलहाल भू-राजनीतिक जोखिम इतना बड़ा है कि स्टॉक बढ़ने के संकेत भी तेल की कीमतों में तेजी को रोक नहीं पाए हैं। इसका मतलब है कि बाजार इस समय अमेरिकी इन्वेंट्री से ज्यादा पश्चिम एशिया की घटनाओं पर ध्यान दे रहा है।
2027 तक सप्लाई में बनी रह सकती है कमी
अमेरिकी Energy Information Administration (EIA) की Short-Term Energy Outlook रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान के साथ जारी टकराव के कारण 2027 के अंत तक तेल की सप्लाई में औसतन करीब 6 लाख बैरल प्रतिदिन की बाधा रह सकती है।
यदि यह अनुमान लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई और मांग के बीच संतुलन पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
पाकिस्तान कर रहा है तनाव कम करने की कोशिश
पाकिस्तान भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। बाजार के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कूटनीतिक बातचीत वास्तव में किसी ठोस समझौते तक पहुंचती है या नहीं।
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और Strait of Hormuz पर शिपिंग गतिविधियां सामान्य होती हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसके उलट, तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें $90 के ऊपर भी टिक सकती हैं।
आगे कच्चे तेल की कीमतों पर क्या रहेगा असर?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा मुख्य रूप से तीन बड़े कारकों पर निर्भर करेगी।
पहला, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कितनी आगे बढ़ती है। दूसरा, Strait of Hormuz से तेल टैंकरों की आवाजाही किस गति से सामान्य होती है। तीसरा, अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों में कच्चे तेल के स्टॉक और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग कैसी रहती है।
यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और समुद्री परिवहन सामान्य होता है, तो हाल की तेज तेजी के बाद कीमतों में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर सैन्य तनाव बढ़ता है या तेल की वास्तविक सप्लाई प्रभावित होती है, तो कीमतों में एक और तेज उछाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल के बेहद करीब है और लगातार छठे दिन तेजी ने बाजार का ध्यान खींचा है। आने वाले सत्रों में Strait of Hormuz और अमेरिका-ईरान बातचीत से जुड़ी हर खबर कच्चे तेल की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक महंगा क्रूड रहने से देश के आयात बिल, रुपये की चाल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतों में बदलाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
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