AMFI Mutual Fund Data July 2026: भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जुलाई 2026 में बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। हालांकि, इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की रफ्तार कमजोर पड़ी है। जुलाई में इक्विटी फंड्स में नेट इनफ्लो घटकर 24,697 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 28,973 करोड़ रुपये था। यानी महीने-दर-महीने आधार पर इक्विटी फंड इनफ्लो में करीब 15% की गिरावट आई है। इसके बावजूद स्मॉल कैप फंड निवेशकों की पसंद बने रहे और इस कैटेगरी में रिकॉर्ड इनफ्लो देखने को मिला।
मुंबई: एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने जुलाई 2026 के लिए म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के आंकड़े जारी कर दिए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि बाजार में इक्विटी म्यूचुअल फंड को लेकर निवेशकों का उत्साह पिछले महीने की तुलना में कुछ कम हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ स्मॉल कैप और मिडकैप फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
जुलाई के आंकड़ों में एक खास बात यह रही कि इक्विटी फंड की 11 कैटेगरी में स्मॉल कैप फंड्स में सबसे ज्यादा इनफ्लो आया। इस कैटेगरी में 7,767 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो बताया गया है।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपये
AMFI के जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM महीने-दर-महीने आधार पर करीब 4.3% बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपये हो गया।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल AUM में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इक्विटी फंड्स में नया निवेश कुछ धीमा पड़ा है। बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की लगातार खरीदारी और डेट फंड्स में बड़े निवेश ने कुल AUM को सपोर्ट दिया।
इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का म्यूचुअल फंड में भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, लेकिन इक्विटी के अलग-अलग सेगमेंट में निवेश का रुझान बदल रहा है।
स्मॉल कैप फंड्स ने बनाया नया रिकॉर्ड
जुलाई में सबसे ज्यादा ध्यान स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड्स ने खींचा। AMFI के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉल कैप फंड्स में जुलाई के दौरान कुल 7,767 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया।
यह इस कैटेगरी में अब तक का सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो है। इससे पता चलता है कि बाजार में जोखिम उठाने वाले निवेशकों की दिलचस्पी छोटी कंपनियों के शेयरों पर केंद्रित फंड्स में बनी हुई है।
महीने-दर-महीने आधार पर स्मॉल कैप फंड्स का इनफ्लो करीब 39% बढ़ा। हालांकि, स्मॉल कैप फंड में निवेश करते समय निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि छोटी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। इसलिए सिर्फ हालिया इनफ्लो देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता।
मिडकैप फंड्स भी निवेशकों की पसंद
स्मॉल कैप के बाद मिडकैप म्यूचुअल फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश आया। जुलाई में इस कैटेगरी में 6,192 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया।
इसके बाद फ्लेक्सी-कैप फंड्स का नंबर रहा। इन फंड्स में जुलाई के दौरान 4,709 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
वहीं, लार्ज एंड मिड-कैप फंड्स में 3,425 करोड़ रुपये और मल्टी-कैप फंड्स में 3,227 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया।
इससे साफ है कि जुलाई में निवेशकों का झुकाव केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। स्मॉल कैप और मिडकैप जैसे सेगमेंट में भी निवेश की अच्छी मांग बनी रही।
जुलाई 2026 में प्रमुख इक्विटी कैटेगरी का इनफ्लो
| म्यूचुअल फंड कैटेगरी | जुलाई 2026 इनफ्लो |
|---|---|
| स्मॉल कैप | ₹7,767 करोड़ |
| मिडकैप | ₹6,192 करोड़ |
| फ्लेक्सी कैप | ₹4,709 करोड़ |
| लार्ज एंड मिडकैप | ₹3,425 करोड़ |
| मल्टी कैप | ₹3,227 करोड़ |
लार्ज कैप फंड्स से सबसे ज्यादा निकासी
जहां स्मॉल कैप और मिडकैप फंड्स में निवेश बढ़ा, वहीं कुछ इक्विटी कैटेगरी में निवेशकों ने पैसा निकाला।
जुलाई में लार्ज कैप फंड्स से सबसे ज्यादा निकासी हुई। इस कैटेगरी से करीब 1,321 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया।
इसके बाद ELSS फंड्स का नंबर रहा, जहां से 959 करोड़ रुपये की निकासी हुई। डिविडेंड यील्ड फंड्स में 169 करोड़ रुपये और वैल्यू/कॉन्ट्रा फंड्स में 144 करोड़ रुपये का आउटफ्लो देखने को मिला।
यह आंकड़ा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने इक्विटी के भीतर अपने पोर्टफोलियो को लेकर कुछ बदलाव किए और अपेक्षाकृत ज्यादा ग्रोथ क्षमता वाले सेगमेंट की तरफ रुख किया।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में कुल इनफ्लो 15% घटा
जुलाई 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में कुल 24,697 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया। जून में यह आंकड़ा 28,973 करोड़ रुपये था।
इस तरह एक महीने में इक्विटी फंड्स का इनफ्लो करीब 15% कम हुआ।
हालांकि, इसे पूरी तरह निवेशकों के इक्विटी से मोहभंग के तौर पर नहीं देखा जा सकता। क्योंकि कुल इक्विटी इनफ्लो घटने के बावजूद स्मॉल कैप, मिडकैप और फ्लेक्सी-कैप जैसी कई कैटेगरी में मजबूत निवेश देखने को मिला।
यानी निवेशक इक्विटी से पूरी तरह दूर जाने के बजाय अलग-अलग कैटेगरी में अपने निवेश का पुनर्संतुलन करते नजर आए।
डेट फंड्स में आया 1.87 लाख करोड़ रुपये का निवेश
जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए डेट फंड्स भी महत्वपूर्ण रहे। इस दौरान डेट फंड्स में कुल 1.87 लाख करोड़ रुपये का इनफ्लो आया।
खास बात यह है कि इससे पहले के दो महीनों में डेट फंड्स में कुल 2.06 लाख करोड़ रुपये का आउटफ्लो देखने को मिला था। जुलाई में बड़ा इनफ्लो आने से इस सेगमेंट में निवेश की तस्वीर काफी बदली।
जुलाई 2025 में भी डेट फंड्स में करीब 1.06 लाख करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ था। इस लिहाज से सालाना आधार पर भी जुलाई 2026 का आंकड़ा काफी मजबूत रहा।
लिक्विड फंड्स में सबसे ज्यादा पैसा आया
डेट फंड्स की 16 सब-कैटेगरी में से सात में जुलाई के दौरान इनफ्लो दर्ज किया गया।
इनमें लिक्विड फंड्स सबसे आगे रहे। जुलाई में लिक्विड फंड्स में करीब 1.19 लाख करोड़ रुपये का इनफ्लो आया।
इसके बाद ओवरनाइट फंड्स में 40,412 करोड़ रुपये और मनी मार्केट फंड्स में 21,180 करोड़ रुपये का निवेश आया।
वहीं, कुछ डेट कैटेगरी में निवेशकों ने पैसा निकाला। कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स में सबसे ज्यादा 784 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके बाद लॉन्ग ड्यूरेशन फंड्स से 618 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
जुलाई के AMFI आंकड़ों से क्या संकेत मिलता है?
AMFI के जुलाई आंकड़ों को देखें तो म्यूचुअल फंड बाजार की तस्वीर मिली-जुली रही। एक तरफ इक्विटी फंड्स का कुल इनफ्लो घटा, वहीं दूसरी तरफ स्मॉल कैप और मिडकैप फंड्स में मजबूत निवेश जारी रहा।
स्मॉल कैप फंड में रिकॉर्ड 7,767 करोड़ रुपये का इनफ्लो यह संकेत देता है कि निवेशकों का एक वर्ग अभी भी ज्यादा ग्रोथ क्षमता वाले सेगमेंट में अवसर तलाश रहा है। दूसरी तरफ लार्ज कैप फंड से निकासी बताती है कि निवेशकों की प्राथमिकता केवल अपेक्षाकृत स्थिर बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।
डेट फंड्स में 1.87 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश भी जुलाई के आंकड़ों की एक अहम विशेषता है। इसके चलते म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी एक महीने के इनफ्लो या आउटफ्लो के आधार पर किसी म्यूचुअल फंड कैटेगरी की भविष्य की रिटर्न क्षमता तय नहीं की जा सकती। फंड चुनते समय निवेश अवधि, जोखिम क्षमता, फंड का ट्रैक रिकॉर्ड और पोर्टफोलियो जैसे कई पहलुओं को देखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह लें।


