वायरल वीडियो को पंजाब का बताकर किया गया शेयर, भाजपा सांसद हरभजन सिंह ने भी नशे की समस्या से जोड़ा; बाद में पुलिस ने बताया- वीडियो राजस्थान के श्रीगंगानगर का है
सोशल मीडिया पर दो युवकों का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दोनों सड़क पर लड़खड़ाते और झूमते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में सुनाई दे रहे पंजाबी ऑडियो की वजह से इसे पंजाब का बताया जाने लगा। देखते ही देखते यह क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। भाजपा के राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए पंजाब में नशे की समस्या पर चिंता जताई।
हालांकि, वीडियो की लोकेशन को लेकर बाद में एक अहम जानकारी सामने आई। पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का है। इसके बाद वीडियो को लेकर किए जा रहे दावों और हरभजन सिंह की पोस्ट पर सवाल उठने लगे।
वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
The video being circulated is from Sri Ganganagar, Rajasthan—not Punjab—and has no connection with Punjab Police.
A Punjabi audio track does not make an incident a Punjab incident.
We urge users and social media accounts to verify the facts and location before posting… https://t.co/bNHwjXVXsC
— Punjab Police India (@PunjabPoliceInd) August 10, 2026 वायरल क्लिप में पगड़ी पहने दो युवक सड़क पर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। दोनों ठीक से चल नहीं पा रहे हैं और लड़खड़ाते हुए नजर आते हैं। वीडियो देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी हालत सामान्य नहीं है। इसी वजह से सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे नशे से जोड़कर शेयर करना शुरू कर दिया।
वीडियो में पंजाबी भाषा का ऑडियो सुनाई दे रहा है। यही वजह रही कि कई लोगों ने बिना किसी स्वतंत्र पुष्टि के इसे पंजाब का वीडियो मान लिया। सोशल मीडिया पर इसे पंजाब में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की समस्या के उदाहरण के तौर पर पेश किया जाने लगा।
लेकिन किसी वीडियो में पंजाबी भाषा या पंजाबी गाना सुनाई देना उसकी लोकेशन साबित नहीं करता। पंजाब के अलावा राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में भी पंजाबी बोलने वाले लोग रहते हैं और पंजाबी संगीत का इस्तेमाल आम है।
हरभजन सिंह ने वीडियो शेयर कर जताई चिंता
वायरल वीडियो को भाजपा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया। उन्होंने वीडियो को पंजाब में नशे की स्थिति से जोड़ते हुए चिंता जाहिर की।
हरभजन सिंह ने अपने पोस्ट में पंजाब की पुरानी पहचान और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि जिस पंजाब को मेहनत, हिम्मत और तरक्की के लिए जाना जाता था, वहां युवाओं के नशे की चपेट में आने की तस्वीरें सामने आ रही हैं।
उनकी पोस्ट के बाद वीडियो को और ज्यादा लोगों ने देखा और शेयर किया। इसके साथ ही यह क्लिप पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस का हिस्सा बन गई।
पंजाब पुलिस ने बताई वीडियो की असली लोकेशन
मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब पंजाब पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दिया। पुलिस के मुताबिक, जिस वीडियो को पंजाब का बताकर शेयर किया जा रहा था, वह वास्तव में राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का है।
इस जानकारी के सामने आने के बाद वीडियो के साथ किए जा रहे पंजाब से जुड़े दावे पर सवाल खड़े हो गए। यानी वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की स्थिति चाहे जैसी भी हो, लेकिन उपलब्ध पुलिस जानकारी के मुताबिक इसे पंजाब की घटना बताना सही नहीं था।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि सोशल मीडिया पर किसी वायरल वीडियो की वास्तविक लोकेशन की पुष्टि किए बिना उसे किसी राज्य या शहर से जोड़ना कितना भ्रामक हो सकता है।
पंजाबी ऑडियो बना भ्रम की बड़ी वजह
इस वायरल वीडियो में पंजाबी ऑडियो सुनाई देना इसके गलत लोकेशन दावे की एक बड़ी वजह माना जा सकता है। सोशल मीडिया पर अक्सर वीडियो के बैकग्राउंड में चल रहे गाने, भाषा या कैप्शन के आधार पर लोग उसकी जगह का अनुमान लगा लेते हैं।
लेकिन वीडियो की भाषा और वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की जगह दो अलग-अलग चीजें हैं। कोई पंजाबी गाना राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली या किसी अन्य राज्य में भी चल सकता है। इसी तरह किसी वीडियो में हिंदी, भोजपुरी या दूसरी भाषा सुनाई देने का मतलब यह नहीं होता कि वीडियो उसी भाषा वाले राज्य में रिकॉर्ड किया गया है।
इस मामले में भी यही गलती हुई। पंजाबी ऑडियो को देखकर वीडियो को पंजाब से जोड़ दिया गया, जबकि पुलिस के मुताबिक इसकी लोकेशन श्रीगंगानगर, राजस्थान थी।
सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह की पोस्ट पर उठे सवाल
वीडियो की असली लोकेशन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह की पोस्ट को लेकर भी बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि किसी वायरल वीडियो को साझा करने से पहले उसकी लोकेशन और दावे की पुष्टि करना जरूरी है।
दूसरी ओर, इस मामले ने सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली सामग्री की विश्वसनीयता को लेकर भी चर्चा छेड़ दी। किसी सार्वजनिक व्यक्ति के अकाउंट से कोई वीडियो शेयर होने पर उसकी पहुंच तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में अगर वीडियो के साथ जुड़ा दावा गलत हो, तो गलत जानकारी भी बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है।
वायरल वीडियो को शेयर करने से पहले क्या जांचें?
सोशल मीडिया पर किसी भी वायरल वीडियो को देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। खासकर तब, जब वीडियो के साथ किसी खास शहर, राज्य या समुदाय से जुड़ा दावा किया जा रहा हो।
किसी वायरल वीडियो की सत्यता जांचने के लिए सबसे पहले उसके मूल स्रोत का पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए। वीडियो कब रिकॉर्ड हुआ, किस जगह रिकॉर्ड हुआ और क्या किसी स्थानीय पुलिस या प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है, इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी है।
इसके अलावा केवल ऑडियो, भाषा, कपड़े या वीडियो के कैप्शन के आधार पर लोकेशन तय नहीं की जानी चाहिए। पुराने वीडियो को भी कई बार नए घटनाक्रम के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर शेयर किया जाता है।
क्या है इस पूरे मामले का निष्कर्ष?
दो युवकों का नशे की हालत में दिखाई देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर पंजाब का बताकर वायरल हुआ और हरभजन सिंह ने भी इसे पंजाब में नशे की समस्या से जोड़ते हुए शेयर किया। लेकिन बाद में पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया कि वायरल क्लिप राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की है।
इसलिए इस वीडियो को पंजाब की घटना के तौर पर पेश करना सही नहीं है। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की वास्तविक स्थिति और घटना से जुड़े अन्य विवरणों की अलग से पुष्टि जरूरी है।
यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल दावों की जांच करने की जरूरत को भी सामने लाता है। किसी वीडियो में पंजाबी ऑडियो होना उसकी लोकेशन का प्रमाण नहीं है। ऐसे कंटेंट को शेयर करने से पहले पुलिस, प्रशासन या विश्वसनीय स्थानीय स्रोत से इसकी पुष्टि करना ज्यादा जिम्मेदार तरीका है।


