800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर हासिल करना आसान नहीं है, लेकिन सही वित्तीय आदतों और लगातार अनुशासन के साथ इस स्तर तक पहुंचना संभव है। इतना मजबूत क्रेडिट स्कोर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाता है और बैंक तथा अन्य लेंडर्स के सामने आपको कम जोखिम वाले ग्राहक के तौर पर पेश करता है। इसका फायदा आपको लोन और क्रेडिट कार्ड लेते समय बेहतर शर्तों के रूप में मिल सकता है।
अगर आप आने वाले समय में होम लोन, कार लोन या प्रीमियम क्रेडिट कार्ड लेने की योजना बना रहे हैं, तो अच्छा क्रेडिट स्कोर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, सिर्फ 800 का आंकड़ा हासिल करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी क्रेडिट हिस्ट्री बनाना है, जो लंबे समय तक मजबूत और भरोसेमंद बनी रहे।
आइए पहले समझते हैं कि क्रेडिट स्कोर की अलग-अलग कैटेगरी क्या होती हैं और 800 का स्कोर आपको किस श्रेणी में रखता है।
क्रेडिट स्कोर क्या होता है और 800 का स्कोर कितना अच्छा है?
भारत में क्रेडिट स्कोर आमतौर पर 300 से 900 के बीच होता है। ट्रांसयूनियन CIBIL की अगस्त 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट ‘Empowering Financial Freedom: The Rise of Credit Self-Monitoring in India’ के मुताबिक क्रेडिट स्कोर को अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है।
- 300 से 680: सबप्राइम
- 681 से 730: नियर प्राइम
- 731 से 770: प्राइम
- 771 से 790: प्राइम प्लस
- 791 से 900: सुपर प्राइम
इस वर्गीकरण के अनुसार 800 का क्रेडिट स्कोर सुपर प्राइम कैटेगरी में आता है। यानी 800 या उससे ज्यादा स्कोर रखने वाला व्यक्ति मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल वाले उधारकर्ताओं में शामिल होता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बैंक सिर्फ क्रेडिट स्कोर देखकर लोन मंजूर नहीं करते। आपकी आय, मौजूदा कर्ज, रोजगार या कारोबार की स्थिरता, लोन की राशि और अन्य वित्तीय जानकारी भी आवेदन के फैसले में भूमिका निभाती है।
800 या उससे ज्यादा क्रेडिट स्कोर के फायदे
एक मजबूत क्रेडिट स्कोर आपको कई तरह के वित्तीय फायदे दिलाने में मदद कर सकता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि लेंडर आपको अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला ग्राहक मान सकते हैं।
लोन और क्रेडिट कार्ड अप्रूवल की संभावना बढ़ सकती है
अच्छे क्रेडिट स्कोर से यह संकेत मिलता है कि आपने पिछले कर्ज और क्रेडिट की जिम्मेदारी ठीक तरह से निभाई है। ऐसे में बैंक या वित्तीय संस्थान आपके नए क्रेडिट आवेदन को सकारात्मक नजरिए से देख सकते हैं।
हालांकि, 800 का स्कोर किसी भी लोन या क्रेडिट कार्ड की मंजूरी की गारंटी नहीं देता।
बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना
मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल का फायदा ब्याज दर में भी मिल सकता है। उदाहरण के लिए, समान प्रोफाइल वाले दो ग्राहकों में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहक को कुछ मामलों में तुलनात्मक रूप से बेहतर लोन शर्तें मिल सकती हैं।
होम लोन जैसे लंबे समय के कर्ज में ब्याज दर का छोटा अंतर भी वर्षों में बड़ी रकम का अंतर पैदा कर सकता है।
ज्यादा क्रेडिट लिमिट मिल सकती है
क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियां भी ग्राहक की क्रेडिट हिस्ट्री और भुगतान व्यवहार को ध्यान में रखती हैं। मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल होने पर कुछ ग्राहकों को ज्यादा क्रेडिट लिमिट या बेहतर कार्ड ऑफर मिल सकते हैं।
बेहतर क्रेडिट कार्ड ऑफर
उच्च क्रेडिट स्कोर आपको कुछ प्रीमियम क्रेडिट कार्ड्स के लिए पात्र बनाने में मदद कर सकता है। ऐसे कार्ड्स में रिवॉर्ड पॉइंट्स, ट्रैवल बेनिफिट्स, कैशबैक और अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं।
800 का क्रेडिट स्कोर कैसे हासिल करें?
800 तक पहुंचने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है। इसके लिए नियमित और जिम्मेदार क्रेडिट मैनेजमेंट जरूरी है। अगर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल अभी कमजोर है, तो नीचे दिए गए कदम लंबे समय में काफी मदद कर सकते हैं।
1. हर EMI और बिल समय पर चुकाएं
क्रेडिट स्कोर के लिए आपका पेमेंट बिहेवियर बेहद महत्वपूर्ण है। लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड बिल में देरी होने पर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इसलिए कोशिश करें कि सभी EMI और क्रेडिट कार्ड भुगतान की तारीख से पहले भुगतान हो जाए। इसके लिए बैंक अकाउंट में ऑटो-पे सेट करना या फोन में रिमाइंडर लगाना उपयोगी हो सकता है।
क्रेडिट रिपोर्टिंग की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में ज्यादा नियमित हो रही है। इसलिए भुगतान में अनुशासन बनाए रखना लंबे समय के लिए महत्वपूर्ण है।
2. क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सीमित रखें
आपके पास जितनी कुल क्रेडिट लिमिट है, उसमें से आप कितने हिस्से का इस्तेमाल करते हैं, उसे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपके क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट ₹1 लाख है और आप हर महीने ₹70,000 का बैलेंस इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपका उपयोग काफी ज्यादा है।
आमतौर पर 30% से कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन रखना बेहतर माना जाता है। हालांकि, सिर्फ 30% को कोई जादुई सीमा न समझें। जितना कम और नियंत्रित उपयोग होगा, उतना बेहतर हो सकता है।
ध्यान रखें कि हर महीने पूरा क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाना भी उतना ही जरूरी है।
3. पुरानी अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री को बेवजह बंद न करें
क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई भी आपकी क्रेडिट प्रोफाइल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुराने क्रेडिट अकाउंट का अच्छा भुगतान रिकॉर्ड आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
इसलिए केवल इसलिए किसी पुराने क्रेडिट कार्ड को बंद न करें क्योंकि आप उसका कम इस्तेमाल करते हैं। कार्ड बंद करने से पहले यह देखें कि उसकी सालाना फीस कितनी है और उसे बनाए रखने का कोई फायदा है या नहीं।
अगर कार्ड पर फीस लग रही है, तो कुछ मामलों में नो-एनुअल-फी वाले विकल्प पर स्विच करना बेहतर हो सकता है। हालांकि, कार्ड बंद या बदलने से पहले उसके संभावित प्रभाव को समझना जरूरी है।
4. जरूरत के मुताबिक क्रेडिट मिक्स रखें
आपकी क्रेडिट प्रोफाइल में अलग-अलग प्रकार के क्रेडिट अकाउंट होने को क्रेडिट मिक्स कहा जाता है। इसमें क्रेडिट कार्ड जैसे रिवॉल्विंग क्रेडिट और होम, ऑटो या अन्य इंस्टॉलमेंट लोन शामिल हो सकते हैं।
विविध क्रेडिट प्रोफाइल कुछ क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है। लेकिन सिर्फ क्रेडिट मिक्स सुधारने के लिए नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना सही रणनीति नहीं है।
सिर्फ स्कोर बढ़ाने के लिए कर्ज लेना हमेशा समझदारी नहीं है। जरूरत होने पर ही नया क्रेडिट लें और उसे समय पर चुकाएं।
5. अपनी क्रेडिट रिपोर्ट नियमित रूप से चेक करें
कई बार क्रेडिट स्कोर खराब होने की वजह आपकी गलती नहीं बल्कि क्रेडिट रिपोर्ट में मौजूद गलत जानकारी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, किसी ऐसे लोन का रिकॉर्ड दिख सकता है जिसे आपने पहले ही बंद कर दिया है, गलत भुगतान स्थिति दर्ज हो सकती है या आपकी जानकारी से जुड़ा कोई ऐसा अकाउंट रिपोर्ट में दिखाई दे सकता है जिसे आपने लिया ही नहीं।
इसलिए समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करें। अगर कोई गलती दिखाई देती है, तो संबंधित लेंडर या क्रेडिट ब्यूरो के पास उसे सुधारने के लिए शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
6. बार-बार नए लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें
कम समय में कई क्रेडिट कार्ड या लोन के लिए आवेदन करने से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में कई हार्ड इन्क्वायरी दिखाई दे सकती हैं। बहुत ज्यादा क्रेडिट आवेदन आपके लिए जोखिम का संकेत बन सकते हैं।
इसलिए हर नए क्रेडिट आवेदन से पहले यह तय करें कि आपको वास्तव में उसकी जरूरत है या नहीं। सिर्फ किसी ऑफर को देखकर लगातार नए कार्ड के लिए आवेदन करने से बचना बेहतर है।
क्रेडिट स्कोर कितनी बार चेक करना चाहिए?
अपने क्रेडिट स्कोर की नियमित निगरानी करने से आपको अपनी क्रेडिट प्रोफाइल में होने वाले बदलावों का पता चलता रहता है। अगर स्कोर अचानक गिरता है, तो आप उसकी वजह तलाश सकते हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्था से संपर्क कर सकते हैं।
ट्रांसयूनियन CIBIL की रिपोर्ट के अनुसार, अपने स्कोर को सक्रिय रूप से मॉनिटर करने वाले लोगों में एक बड़ा हिस्सा साल में कई बार अपना स्कोर चेक करता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नियमित निगरानी करने वाले कई लोगों ने समय के साथ अपने स्कोर में सुधार देखा।
इसलिए क्रेडिट स्कोर को सिर्फ लोन लेने से ठीक पहले चेक करने के बजाय समय-समय पर मॉनिटर करना बेहतर आदत है।
800 क्रेडिट स्कोर बनने में कितना समय लग सकता है?
यह सवाल बहुत से लोगों के मन में रहता है, लेकिन इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। अगर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पहले से अच्छी है, तो स्कोर में सुधार अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है। वहीं, अगर आपकी रिपोर्ट में कई लेट पेमेंट, डिफॉल्ट या ज्यादा क्रेडिट उपयोग दर्ज है, तो सुधार में लंबा समय लग सकता है।
क्रेडिट स्कोर रातोंरात 800 नहीं बनता। इसके लिए लगातार समय पर भुगतान, कम क्रेडिट यूटिलाइजेशन, सीमित क्रेडिट आवेदन और अच्छी वित्तीय आदतों की जरूरत होती है।
क्या 800 का क्रेडिट स्कोर होने पर सबसे कम ब्याज दर मिलेगी?
जरूरी नहीं। 800 या उससे ज्यादा का स्कोर आपकी मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल को दर्शाता है, लेकिन यह सबसे कम ब्याज दर की गारंटी नहीं है।
लोन की ब्याज दर तय करते समय बैंक आपकी आय, रोजगार, मौजूदा देनदारी, लोन की अवधि, लोन-टू-वैल्यू रेशियो और बैंक की अपनी क्रेडिट पॉलिसी जैसे कई दूसरे कारकों को भी देखते हैं।
इसलिए 800 का स्कोर होने के बावजूद अलग-अलग बैंकों और लेंडर्स के ऑफर की तुलना करना जरूरी है।
निष्कर्ष
800 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर हासिल करना एक लंबी प्रक्रिया है, कोई एक दिन में पूरा होने वाला लक्ष्य नहीं। इसके लिए आपको अपनी EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाने, क्रेडिट कार्ड का उपयोग नियंत्रित रखने, पुरानी अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री को संभालकर रखने और अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियों पर नजर रखने की जरूरत होती है।
साथ ही, सिर्फ क्रेडिट स्कोर बढ़ाने के लिए अनावश्यक लोन लेना या जरूरत से ज्यादा क्रेडिट कार्ड खोलना सही रणनीति नहीं है। एक मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल का आधार हमेशा जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार होना चाहिए।
अगर आप लगातार इन आदतों को अपनाते हैं, तो समय के साथ आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर हो सकता है और भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेते समय बेहतर वित्तीय विकल्प मिलने की संभावना बढ़ सकती है।


