Market Outlook: पिछले कारोबारी हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। हालांकि लॉर्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा रौनक रही। 7 अगस्त को समाप्त हुए कारोबारी हफ्ते में जहां Nifty 50 में करीब 0.8 फीसदी की तेजी आई, वहीं Nifty Midcap और Nifty Smallcap इंडेक्स ने इससे बेहतर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ स्मॉलकैप शेयरों में महज पांच कारोबारी दिनों में 10 से 20 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली।
पिछले हफ्ते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में भी ₹7 लाख करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। विदेशी निवेशकों यानी FPI/FII का रुख भी लगातार दूसरे हफ्ते सकारात्मक रहा। ऐसे में बाजार में तेजी के बीच अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि Nifty आगे किस दिशा में जाता है और इसके लिए अहम सपोर्ट व रेजिस्टेंस लेवल कौन से हैं।
Nifty, Sensex ने भी दिया पॉजिटिव रिटर्न
7 अगस्त को समाप्त हुए पिछले कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए। Sensex 404.53 अंक यानी 0.51 फीसदी की तेजी के साथ 78,499.17 अंक पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 187.05 अंक यानी 0.76 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और यह 24,570.65 के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि बाजार में पूरे हफ्ते उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन अर्निंग्स सीजन के दौरान कई इंडिविजुअल शेयरों में आई तेजी ने व्यापक बाजार को सपोर्ट दिया। खास बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी ज्यादा दिखाई दी।
विदेशी निवेशकों ने पिछले कारोबारी हफ्ते ₹2,887.69 करोड़ की नेट खरीदारी की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने इससे कहीं ज्यादा ₹7,767.37 करोड़ की नेट खरीदारी की। संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट को सपोर्ट दिया।
Midcap और Smallcap में Nifty 50 से ज्यादा तेजी
ब्रॉडर मार्केट के प्रदर्शन की बात करें तो पिछले कारोबारी हफ्ते Nifty Midcap 100 इंडेक्स करीब 0.9 फीसदी मजबूत हुआ। वहीं Nifty Smallcap 100 में करीब 2.7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
इससे साफ है कि पिछले हफ्ते निवेशकों का फोकस केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और खासकर स्मॉलकैप सेगमेंट में चुनिंदा शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
Midcap Index को इन शेयरों से मिला सपोर्ट
Nifty Midcap 100 इंडेक्स को KEI Industries, Jubilant FoodWorks, Exide Industries, National Aluminium Company (NALCO), APL Apollo Tubes, Paytm और Godfrey Phillips India जैसे शेयरों से सपोर्ट मिला।
इन शेयरों में मजबूती के चलते मिडकैप इंडेक्स में तेजी को सहारा मिला। हालांकि दूसरी तरफ Blue Star, BSE, UPL, Container Corporation of India, LIC Housing Finance, Oil India और Voltas जैसे शेयरों में कमजोरी ने इंडेक्स की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया।
इससे यह संकेत मिलता है कि मिडकैप स्पेस में भी तेजी व्यापक नहीं बल्कि चुनिंदा शेयरों तक अधिक केंद्रित रही।
इन Smallcap Stocks ने 5 दिनों में दिखाई दमदार तेजी
स्मॉलकैप सेगमेंट में पिछले हफ्ते कुछ शेयरों ने निवेशकों का खास ध्यान खींचा। Newland Laboratories, Devyani International, Ather Energy, Tata Technologies, Welspun Corp, Pine Labs, Urban Company और Redington के शेयरों में करीब 10 से 20 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई।
इन शेयरों में आई जोरदार खरीदारी का असर Nifty Smallcap 100 इंडेक्स पर भी दिखाई दिया। यही वजह रही कि स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 2.7 फीसदी की तेजी आई, जो Nifty 50 की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन था।
हालांकि स्मॉलकैप इंडेक्स के सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। Nuvama Wealth Management, Firstsource Solutions, Narayana Hrudayalaya, Inventurus Knowledge Solutions, Star Health and Allied Insurance Company और CreditAccess Grameen में गिरावट ने इंडेक्स पर दबाव बनाया।
इस तरह स्मॉलकैप सेगमेंट में एक तरफ जहां कुछ शेयरों ने बहुत मजबूत प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी तरफ कुछ स्टॉक्स में बिकवाली भी देखने को मिली।
सेक्टरों का कैसा रहा प्रदर्शन?
पिछले कारोबारी हफ्ते सेक्टरों में भी मिला-जुला रुझान रहा। Nifty PSU Bank इंडेक्स करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टरों में रहा।
जुलाई में बेहतर बिक्री के आंकड़ों के चलते Nifty Auto में करीब 3 फीसदी की तेजी आई। वहीं बेहतर तिमाही नतीजों के बीच Nifty IT में करीब 2.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
इसके अलावा Nifty FMCG में 0.6 फीसदी और Nifty Oil & Gas में 0.5 फीसदी की तेजी रही।
दूसरी तरफ कमजोरी वाले सेक्टरों में Nifty Media में करीब 4 फीसदी की गिरावट सबसे ज्यादा रही। इसके बाद Nifty Capital Markets में करीब 2 फीसदी और Nifty Realty में लगभग 1.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
इससे पता चलता है कि बाजार में एकतरफा तेजी के बजाय स्टॉक और सेक्टर आधारित खरीदारी देखने को मिल रही है।
Nifty के लिए अभी कहां हैं Support और Resistance?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले कारोबारी सत्रों में Nifty किस दिशा में जा सकता है। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक इंडेक्स फिलहाल एक अहम दायरे में कारोबार कर रहा है और कुछ खास स्तरों पर बाजार की दिशा तय हो सकती है।
24,450-24,350 का सपोर्ट जोन अहम
Angel One के इक्विटी एंड डेरिवेटिव्स टेक्निकल एनालिस्ट हितेश राठी के मुताबिक Nifty के लिए 24,450-24,350 का स्तर अहम सपोर्ट जोन की तरह काम कर रहा है।
अगर इंडेक्स इस जोन के ऊपर बना रहता है तो बाजार में तेजी का रुझान कायम रह सकता है। इसके बाद 24,000 का स्तर मनोवैज्ञानिक सपोर्ट के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं ऊपर की तरफ 24,650-24,750 का क्षेत्र Nifty के लिए शुरुआती रेजिस्टेंस जोन हो सकता है। इस जोन के ऊपर मजबूती मिलने पर 24,800-24,850 का स्तर अगला अहम रेजिस्टेंस बन सकता है।
24,770 और 25,000 पर नजर
HDFC Securities के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह के मुताबिक Nifty पिछले तीन कारोबारी दिनों से करीब 24,400 से 24,700 के दायरे में कंसोलिडेट कर रहा है।
डेली चार्ट पर इंडेक्स लोअर हाई और हायर लो का पैटर्न बना रहा है। उनके मुताबिक Nifty अभी भी अपने सभी अहम मूविंग एवरेजेज के ऊपर कारोबार कर रहा है, इसलिए इसका मुख्य रुझान फिलहाल बुलिश बना हुआ है।
नंदीश शाह के मुताबिक ऊपर की तरफ 24,770 और 25,000 Nifty के लिए महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल हैं। वहीं नीचे की तरफ 24,430 से 23,380 का क्षेत्र अहम सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
पिछले हफ्ते के आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल ब्रॉडर मार्केट यानी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। खासकर चुनिंदा स्मॉलकैप शेयरों में 10-20 फीसदी तक की तेजी ने बाजार की मजबूती को उजागर किया है।
हालांकि इतनी तेज तेजी वाले शेयरों में जोखिम भी अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। इसलिए केवल पिछले कुछ दिनों के रिटर्न को देखकर किसी शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स, वैल्यूएशन, तिमाही नतीजों और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का आकलन करना जरूरी है।
वहीं Nifty के मामले में 24,350-24,450 का सपोर्ट जोन और 24,650-24,850 का रेजिस्टेंस क्षेत्र आने वाले कारोबारी सत्रों के लिए महत्वपूर्ण रह सकता है। इन स्तरों के ऊपर या नीचे टिकाऊ ब्रेकआउट/ब्रेकडाउन से बाजार की अगली दिशा को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है।
फिलहाल विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी, कंपनियों के तिमाही नतीजे और ग्लोबल मार्केट संकेत भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख ट्रिगर बने रहेंगे।
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