Jharkhand Students Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन रविवार को 16वें दिन भी जारी है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। इसी गतिरोध के बीच झारखंड सरकार ने रविवार, 9 अगस्त को एक बार फिर छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत करने का फैसला किया है।
इस बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत शनिवार देर रात अचानक बिगड़ गई। करीब एक सप्ताह से अनशन कर रहे महतो का ब्लड शुगर लेवल 53 तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति पर निगरानी रखी। आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर फैलते ही चिंता का माहौल बन गया।
सरकार और छात्रों के बीच आज फिर बातचीत
झारखंड सरकार और छात्र संगठनों के बीच शुक्रवार रात से बातचीत का दौर चल रहा है। शुक्रवार को सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की थी। इसके बाद शनिवार को अलग-अलग छात्र संगठनों के साथ चार दौर की बैठक हुई।
इन बैठकों में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि, शनिवार को हुई बैठकों के बाद भी आंदोलन खत्म करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी।
शनिवार शाम सरकारी समिति और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच करीब चार घंटे तक बैठक हुई। इसके बाद रविवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ एक और दौर की बातचीत का निर्णय लिया गया है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है और छात्रों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने लगाया राजनीतिक चाल का आरोप
सरकार द्वारा अलग-अलग छात्र संगठनों से बातचीत किए जाने पर जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने नाराजगी जताई है। मंच के नेता रविंद्र पासवान ने सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने के लिए छात्रों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया।
पासवान के मुताबिक, उनके मंच ने शुक्रवार रात पांच सदस्यीय सरकारी समिति के सामने अपनी सभी प्रमुख मांगें रख दी थीं। उनका आरोप है कि सरकार अब ऐसे संगठनों से बातचीत कर रही है, जिनकी मौजूदा आंदोलन में भूमिका नहीं रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों की मुख्य मांगों से ध्यान हटाने के बजाय सरकार को उन मुद्दों पर फैसला लेना चाहिए जिनके लिए प्रतियोगी अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
सरकार ने कहा- बातचीत जारी रहेगी
सरकार की समिति में शामिल मंत्रियों ने कहा है कि छात्रों की मांगों और चिंताओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि छात्र प्रतिनिधिमंडलों के साथ हुई बातचीत में सामने आए मुद्दों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है।
वहीं मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में सुधार की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के साथ बातचीत जारी रहेगी।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर छात्रों से सुझाव मांगे हैं। सरकार ने अभ्यर्थियों के सुझाव प्राप्त करने के लिए एक ईमेल आईडी जारी करने की जानकारी दी है।
हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र संगठनों की क्या हैं प्रमुख मांगें?
आंदोलन में शामिल अलग-अलग छात्र संगठनों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखी हैं। झारखंड छात्र मोर्चा की प्रमुख मांगों में 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करना शामिल है।
एनएसयूआई ने भी कई मांगें रखी हैं। इनमें संदेह के घेरे में आने वाली जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच कराने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी बनाने की मांग प्रमुख है।
आदिवासी छात्र संघ ने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य योग्यता वाले विषयों में शामिल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं, उन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
इन मांगों को लेकर छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा और उन्हें सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय चाहिए।
10 अगस्त को विधानसभा मार्च की तैयारी
छात्र संगठनों ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया है। प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि यदि 10 अगस्त तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो विधानसभा मार्च निकाला जाएगा।
इस बीच अखिल भारतीय छात्र संघ यानी आइसा ने भी प्रदर्शन स्थल पर अपना अलग मंच बनाया। हालांकि संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि इसे अलग आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। इससे पहले शुक्रवार को बिरसा चौक के पास विधानसभा मार्च के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई थी। रांची इकाई के प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि संगठन के सदस्य 10 अगस्त के मार्च में शामिल होंगे, लेकिन आइसा के बैनर के बिना।
एबीवीपी भी प्रदर्शन में शामिल
आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्य भी प्रदर्शन करते नजर आए हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के पास बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बनी थी।
उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अजय आर्यन के अनुसार, इस दौरान एबीवीपी के करीब आठ से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
एबीवीपी ने अब 11 अगस्त को अलग विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा की है।
जेपीएससी मामले में 19 गिरफ्तारियां
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पूर्व परीक्षा पैनल अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है।
छात्र संगठन इस पूरे मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भरोसे को बहाल करना जरूरी है।
कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने छात्रों के हथियार
झारखंड के छात्र इस आंदोलन को केवल नारों और प्रदर्शन तक सीमित नहीं रख रहे हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने कविता, व्यंग्य, पोस्टर और प्रतीकों के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया है।
प्रदर्शन स्थल पर कहीं सरकारी नौकरियों का काल्पनिक ‘रेट कार्ड’ नजर आता है तो कहीं सरकार पर कटाक्ष करते पोस्टर लगाए गए हैं। एक स्थान पर 500 रुपये के नोट जैसी दिखने वाली गड्डियों से भरा तराजू रखा गया है, जिसे कथित ‘नौकरी रेट कार्ड’ से जोड़कर प्रदर्शित किया गया है।
छात्रों के बीच रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां भी सुनाई जा रही हैं। खास तौर पर ‘कृष्ण की चेतावनी’ खंड के जरिए छात्र अपने लंबे संघर्ष और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
परीक्षा की तैयारी में वर्षों लगा रहे अभ्यर्थी इन पंक्तियों के माध्यम से अपने संघर्ष की तुलना महाभारत के पांडवों के संघर्ष से करते नजर आ रहे हैं।
‘नौकरी बिक्री केंद्र’ के जरिए सरकार पर व्यंग्य
प्रदर्शन स्थल पर कुछ छात्रों ने व्यंग्यात्मक तरीके से ‘नौकरी बिक्री केंद्र’ भी बनाया है। इसमें सहायक शिक्षक के पद की काल्पनिक कीमत 15 लाख रुपये, पुलिस उपाधीक्षक की 1.2 करोड़ रुपये, प्रखंड विकास अधिकारी की 90 लाख रुपये और अंचल अधिकारी की एक करोड़ रुपये बताई गई है।
इन आंकड़ों का उद्देश्य किसी वास्तविक नौकरी की कीमत बताना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर व्यंग्य करना है।
कुछ पोस्टरों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ काल्पनिक ‘मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना’ लिखकर भी सरकार पर कटाक्ष किया गया है। पोस्टर पर व्यंग्यात्मक नारा लिखा गया है- ‘पेमेंट करो आराम से, नौकरी पाओ सम्मान से।’
एक प्रदर्शनकारी छात्र विवेक ने अपनी सफेद टी-शर्ट पर लिखा है- ‘व्यवस्था ने हमें निराश किया है।’
एक अन्य दृश्य में एक छात्रा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के दिवंगत संस्थापक शिबू सोरेन के पोस्टर के सामने सिर झुकाकर उनके बेटे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों के साथ कथित अन्याय करने वालों पर कार्रवाई की अपील करती नजर आई।
अब आंदोलन की दिशा क्या होगी?
झारखंड में छात्र आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां रविवार की बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र संगठन अपनी मांगों पर ठोस निर्णय की मांग पर कायम हैं।
अगर रविवार की बातचीत में सहमति नहीं बनती है, तो 10 अगस्त का प्रस्तावित विधानसभा मार्च आंदोलन को और बड़ा रूप दे सकता है। इसके बाद 11 अगस्त को एबीवीपी के अलग विधानसभा मार्च की घोषणा भी की गई है।
फिलहाल सभी की नजर रविवार को होने वाली बातचीत पर है। सरकार छात्रों की मांगों में से किन मुद्दों पर सहमति जताती है और क्या आंदोलनकारी संगठन सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, इससे झारखंड के इस लंबे छात्र आंदोलन की अगली दिशा तय होगी।


