First Mover Advantage: किसी बिजनेस कैटेगरी में सबसे पहले उतरना शुरुआती बढ़त जरूर देता है, लेकिन हमेशा सफलता की गारंटी नहीं होता। Google, Facebook, Netflix और Nintendo जैसी कंपनियों ने अपने-अपने बाजार में बाद में एंट्री की, फिर भी बेहतर प्रोडक्ट, मजबूत बिजनेस मॉडल और तेजी से बदलती ग्राहक जरूरतों को समझकर लीडर बन गईं।
बिजनेस की दुनिया में अक्सर माना जाता है कि जो कंपनी किसी नई कैटेगरी में सबसे पहले आती है, उसके पास सबसे बड़ा फायदा होता है। इसे First Mover Advantage कहा जाता है। सबसे पहले आने वाली कंपनी ग्राहकों के बीच पहचान बना सकती है, ब्रांड तैयार कर सकती है और अपने लिए बाजार में जगह सुरक्षित कर सकती है।
लेकिन क्या सबसे पहले आना ही लंबे समय की सफलता की गारंटी है? इसका जवाब है—नहीं।
पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने CNBC-TV18 की Shereen Bhan के साथ बातचीत में इसी ओर इशारा करते हुए कहा था कि किसी कैटेगरी को सबसे पहले बनाना सफलता की गारंटी नहीं है। आर्थिक सफलता आखिरकार उसे मिल सकती है जो उस काम को सबसे बेहतर तरीके से करता है।
किसी नई कैटेगरी को बनाने वाली कंपनी को कई बार ग्राहकों को शिक्षित करने, बाजार तैयार करने और पैसा खर्च करने में वर्षों लग जाते हैं। इसके बाद दूसरी कंपनियां उसी बाजार में प्रवेश करके पहले से तैयार ग्राहक आधार का फायदा उठा सकती हैं और बेहतर प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी या डिस्ट्रीब्यूशन के दम पर आगे निकल सकती हैं।
टेक्नोलॉजी और एंटरटेनमेंट की दुनिया में इसके कई शानदार उदाहरण मौजूद हैं। आइए जानते हैं ऐसी पांच कहानियां, जहां बाद में आने वाली कंपनियों ने शुरुआती खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया।
1. Android vs Apple iOS: बाद में आया Android, लेकिन पहुंच में निकला आगे
जब Apple ने जून 2007 में iPhone लॉन्च किया, तब उसने मोबाइल फोन इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल दिया। टचस्क्रीन, मोबाइल इंटरनेट और ऐप आधारित अनुभव को एक नए स्तर पर ले जाकर iPhone ने आधुनिक स्मार्टफोन के लिए नया मानक तैयार किया।
इसके बाद अक्टूबर 2008 में Google ने पहला कमर्शियल Android फोन बाजार में उतारा। Android का मॉडल Apple से काफी अलग था। Apple अपने हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को खुद नियंत्रित करता था, जबकि Android को अलग-अलग स्मार्टफोन कंपनियों के लिए उपलब्ध कराया गया।
Samsung, HTC और Motorola जैसी कंपनियों ने Android को अपनाया। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि Android केवल महंगे स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग कीमतों और बाजारों में कंपनियां Android फोन लॉन्च करने लगीं।
इस खुले इकोसिस्टम ने Android को तेजी से फैलने में मदद की। कुछ ही वर्षों में यह दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया।
यहां कहानी यह नहीं है कि iPhone असफल हुआ। Apple आज भी प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में बेहद मजबूत है। बल्कि असली सबक यह है कि एक कंपनी ने कैटेगरी को लोकप्रिय बनाया, जबकि दूसरी कंपनी ने ओपन इकोसिस्टम और बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर बाजार हासिल किया।
यानी पहली एंट्री से ज्यादा महत्वपूर्ण यह साबित हुआ कि कौन कंपनी अपने मॉडल को ज्यादा बड़े स्तर तक पहुंचा पाती है।
2. Facebook vs MySpace: बाद में आया Facebook, लेकिन बदल दिया सोशल नेटवर्किंग का खेल
सोशल मीडिया के शुरुआती दौर में MySpace एक बड़ा नाम था। अगस्त 2003 में लॉन्च हुआ MySpace कुछ ही वर्षों में दुनिया के सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया था।
इसके बाद फरवरी 2004 में Facebook की शुरुआत हुई। शुरुआत में यह केवल Harvard University के छात्रों के लिए उपलब्ध था। बाद में इसे दूसरी यूनिवर्सिटीज तक विस्तार दिया गया और सितंबर 2006 में आम इंटरनेट यूजर्स के लिए भी खोल दिया गया।
Facebook ने MySpace की तरह केवल प्रोफाइल और सोशल कनेक्शन पर निर्भर रहने के बजाय यूजर एक्सपीरियंस को अलग तरीके से विकसित किया। साफ इंटरफेस, वास्तविक पहचान पर जोर, न्यूज फीड और बेहतर सोशल कनेक्शन ने इसे तेजी से लोकप्रिय बनाया।
अप्रैल 2008 तक Facebook ने ग्लोबल विजिटर्स के मामले में MySpace को पीछे छोड़ दिया। इसके बाद Facebook का विस्तार लगातार जारी रहा, जबकि MySpace की लोकप्रियता तेजी से कम होती गई।
यह उदाहरण बताता है कि सोशल मीडिया जैसी तेजी से बदलती कैटेगरी में शुरुआती लोकप्रियता हमेशा स्थायी बढ़त नहीं देती। यूजर एक्सपीरियंस, नेटवर्क इफेक्ट और प्लेटफॉर्म को लगातार बेहतर करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
3. Google vs Yahoo: सर्च मार्केट में देर से आया Google, लेकिन बन गया नंबर-1
Google की कहानी First Mover Advantage को समझने का शायद सबसे शानदार उदाहरण है।
इंटरनेट सर्च के शुरुआती दौर में Yahoo, Lycos और AltaVista जैसी कंपनियां काफी लोकप्रिय थीं। Yahoo ने 1994 में शुरुआत की थी, जबकि Google की स्थापना 1998 में हुई।
उस समय इंटरनेट पर जानकारी ढूंढने का तरीका आज के Google से काफी अलग था। कई सर्च इंजन वेब डायरेक्टरी और अलग-अलग वेबसाइटों की लिस्टिंग पर ज्यादा निर्भर थे।
Google ने अपने PageRank सिस्टम के जरिए सर्च को एक नया तरीका दिया। PageRank ने वेब पेजों की अहमियत और दूसरे पेजों से मिलने वाले लिंक जैसे संकेतों के आधार पर सर्च रिजल्ट को रैंक करने की कोशिश की।
इसके अलावा Google का होमपेज भी अपने दौर के कई पोर्टल्स से बिल्कुल अलग था। जहां कई वेबसाइटों पर खबरें, लिंक और कई तरह की जानकारी एक साथ दिखाई जाती थी, वहीं Google का इंटरफेस बेहद सरल था।
यूजर आते थे, सर्च करते थे और सीधे रिजल्ट देखते थे।
Google ने धीरे-धीरे सर्च मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत की। साल 2000 में Yahoo ने Google को अपने सर्च रिजल्ट उपलब्ध कराने वाले पार्टनर के रूप में इस्तेमाल किया। विडंबना यह रही कि जिस कंपनी की तकनीक Yahoo के लिए सर्च उपलब्ध करा रही थी, वही आगे चलकर उसका सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी बन गई।
आज Google का नाम ही इंटरनेट सर्च का पर्याय बन चुका है।
इस कहानी का सबसे बड़ा सबक है—मार्केट पहले से मौजूद होने के बावजूद अगर कोई कंपनी ग्राहक की समस्या को बेहतर तरीके से हल करती है, तो वह बाद में आकर भी बाजार की दिशा बदल सकती है।
4. Netflix vs Blockbuster: DVD से Streaming तक बदल दिया पूरा बिजनेस मॉडल
Netflix और Blockbuster की कहानी सिर्फ दो कंपनियों की प्रतिस्पर्धा नहीं है। यह दिखाती है कि बदलती टेक्नोलॉजी के साथ बिजनेस मॉडल को बदलना कितना जरूरी है।
Blockbuster ने 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक में हजारों फिजिकल स्टोर्स के जरिए वीडियो रेंटल बिजनेस में मजबूत स्थिति बनाई। ग्राहक स्टोर पर जाते थे, फिल्म की DVD या वीडियो लेते थे और वापस लौटाते थे।
Netflix ने 1997 में DVD रेंटल मार्केट में एंट्री की। लेकिन इसका तरीका अलग था। कंपनी ने DVD को डाक के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाने का मॉडल अपनाया और लेट फीस जैसी परेशानी को काफी हद तक खत्म किया।
बाद में Netflix ने अपनी रणनीति को और बदल दिया। 2007 में कंपनी ने वीडियो स्ट्रीमिंग की शुरुआत की। इंटरनेट की स्पीड और डिजिटल डिवाइसों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय होने लगा।
दूसरी ओर, Blockbuster अपने बड़े स्टोर नेटवर्क और पारंपरिक रेंटल मॉडल से जुड़ा रहा। डिजिटल बदलाव के साथ उसके पुराने बिजनेस मॉडल पर दबाव बढ़ता गया।
2010 में Blockbuster ने दिवालियापन के लिए आवेदन किया। दूसरी तरफ Netflix एक ग्लोबल स्ट्रीमिंग कंपनी के रूप में उभर चुका था।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Netflix ने केवल बाजार में देर से एंट्री करके सफलता हासिल नहीं की। उसने ग्राहकों की बदलती आदतों को पहचाना और अपने बिजनेस मॉडल को लगातार बदला।
5. Nintendo vs Atari: वीडियो गेम मार्केट को फिर से खड़ा करने की कहानी
वीडियो गेम कंसोल का बाजार भी इस बात का उदाहरण है कि शुरुआती सफलता हमेशा स्थायी नहीं होती।
Magnavox ने 1972 में Magnavox Odyssey के जरिए पहला होम वीडियो गेम कंसोल पेश किया था। इसके बाद Atari ने 1970 के दशक के आखिर में Atari 2600 के साथ वीडियो गेमिंग को बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाया।
Atari 2600 की सफलता ने होम गेमिंग को तेजी से बढ़ाया। लेकिन 1980 के दशक की शुरुआत में बाजार में बड़ी संख्या में गेम्स और कमजोर क्वालिटी वाले टाइटल आने लगे। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित हुआ और 1983 में उत्तरी अमेरिकी वीडियो गेम इंडस्ट्री में बड़ा संकट आया।
इसके बाद Nintendo ने अक्टूबर 1985 में Nintendo Entertainment System यानी NES को नॉर्थ अमेरिका में लॉन्च किया।
Nintendo ने केवल नया कंसोल बेचने की कोशिश नहीं की। कंपनी ने गेम्स की क्वालिटी पर सख्त नियंत्रण, मजबूत फ्रेंचाइजी और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस पर जोर दिया।
Super Mario Bros. जैसी फ्रेंचाइजी ने NES को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। Nintendo ने डेवलपर्स और गेम्स की क्वालिटी को नियंत्रित करने के लिए भी सख्त नीतियां अपनाईं।
कुछ ही वर्षों में NES ने नॉर्थ अमेरिकन कंसोल बाजार में मजबूत स्थिति बना ली। इस प्रक्रिया में Nintendo ने उस इंडस्ट्री को फिर से लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई, जो कुछ साल पहले संकट से जूझ रही थी।
यह उदाहरण बताता है कि किसी कैटेगरी को पहले लोकप्रिय बनाने वाली कंपनी के बाद आने वाला खिलाड़ी भी बेहतर कंटेंट, क्वालिटी कंट्रोल और मजबूत इकोसिस्टम के जरिए बाजार पर कब्जा कर सकता है।
First Mover Advantage जरूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं
इन पांच उदाहरणों को देखने पर एक बात साफ होती है—बाजार में सबसे पहले आना फायदा जरूर देता है, लेकिन यह सफलता की गारंटी नहीं है।
पहली कंपनी को ग्राहक जागरूकता पैदा करने, बाजार विकसित करने और नई कैटेगरी बनाने का फायदा मिलता है। लेकिन इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी होती है। उसे ऐसे बाजार में पैसा लगाना पड़ता है, जिसका भविष्य अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता।
बाद में आने वाली कंपनियों के पास एक अलग फायदा होता है। वे शुरुआती कंपनियों की गलतियों से सीख सकती हैं, ग्राहकों की प्रतिक्रिया देख सकती हैं और पहले से तैयार बाजार में बेहतर समाधान लेकर उतर सकती हैं।
Google ने Yahoo और दूसरे सर्च इंजनों से अलग सर्च अनुभव दिया। Facebook ने MySpace के मुकाबले अलग सोशल नेटवर्किंग अनुभव तैयार किया। Netflix ने Blockbuster के पारंपरिक मॉडल से आगे जाकर डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन को अपनाया। Android ने Apple के बंद हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर मॉडल के मुकाबले एक खुला इकोसिस्टम बनाया और Nintendo ने वीडियो गेम संकट के बाद क्वालिटी और फ्रेंचाइजी पर जोर दिया।
असली विजेता कौन?
बिजनेस में आखिरकार सवाल यह नहीं होता कि “कौन सबसे पहले आया?”
ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि—
“कौन ग्राहक की जरूरत को सबसे बेहतर तरीके से समझ पाया और बदलते बाजार के साथ खुद को सबसे तेजी से बदल पाया?”
यही वजह है कि किसी कैटेगरी का पहला खिलाड़ी हमेशा अंतिम विजेता नहीं होता। कई बार पहला खिलाड़ी बाजार तैयार करता है और बाद में आने वाला खिलाड़ी उस बाजार को बड़े पैमाने पर विकसित कर देता है।
इसलिए First Mover Advantage को सफलता का टिकट समझने के बजाय इसे सिर्फ एक शुरुआती बढ़त के तौर पर देखना चाहिए। लंबे समय में बेहतर प्रोडक्ट, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन, टेक्नोलॉजी, ब्रांड, इकोसिस्टम और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता ही किसी कंपनी को असली लीडर बना सकती है।


