नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों को एक बार फिर 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला किया है। RBI के इस फैसले का सीधा मतलब है कि फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है और इसका असर होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज की EMI पर तत्काल बदलाव के रूप में नहीं पड़ेगा।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों में ब्याज दरों में कितना बड़ा अंतर है? कुछ देशों में महंगाई को नियंत्रित करने और अपनी करेंसी को संभालने के लिए ब्याज दरें काफी ऊंची रखी गई हैं, जबकि कुछ देशों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दरें बेहद कम हैं।
दुनिया के प्रमुख देशों की ब्याज दरों पर नजर डालें तो तुर्की सबसे ऊपर दिखाई देता है। वहीं दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड में ब्याज दर शून्य है। जापान में भी यह महज 1 फीसदी है।
तुर्की में सबसे ज्यादा ब्याज दर
दुनिया के प्रमुख देशों में सबसे ज्यादा नीतिगत ब्याज दर तुर्की में 37 फीसदी है। यह भारत की 5.25 फीसदी दर से कई गुना अधिक है।
तुर्की लंबे समय से महंगाई और अपनी मुद्रा लीरा में कमजोरी जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना करता रहा है। महंगाई पर काबू पाने और करेंसी पर दबाव कम करने के लिए वहां के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को काफी ऊंचे स्तर पर रखा है।
इतनी ऊंची ब्याज दर का मतलब यह भी है कि वहां कंपनियों और आम लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। हालांकि, केंद्रीय बैंक का उद्देश्य महंगाई के दबाव को कम करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना होता है।
अर्जेंटीना दूसरे नंबर पर
सबसे ज्यादा ब्याज दर वाले देशों की सूची में अर्जेंटीना दूसरे स्थान पर है। यहां नीतिगत ब्याज दर 29 फीसदी है।
अर्जेंटीना लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता और महंगाई की समस्या से जूझ रहा है। देश की मुद्रा पर भी काफी दबाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में ऊंची ब्याज दरों का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में महंगाई और मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
नाइजीरिया में 26.5 फीसदी ब्याज
अफ्रीकी देश नाइजीरिया भी ऊंची ब्याज दर वाले देशों में शामिल है। वहां नीतिगत ब्याज दर 26.5 फीसदी है।
इसके बाद ब्राजील और रूस में ब्याज दर 14 फीसदी बताई गई है। कोलंबिया में यह 12 फीसदी है। वहीं आयरलैंड में 7.75 फीसदी और दक्षिण अफ्रीका में 7 फीसदी की दर है।
मेक्सिको में ब्याज दर 6.5 फीसदी है, जबकि हंगरी और इंडोनेशिया में यह 5.75 फीसदी है।
प्रमुख देशों की ब्याज दर
| देश | ब्याज दर |
|---|---|
| तुर्की | 37% |
| अर्जेंटीना | 29% |
| नाइजीरिया | 26.5% |
| ब्राजील | 14% |
| रूस | 14% |
| कोलंबिया | 12% |
| आयरलैंड | 7.75% |
| दक्षिण अफ्रीका | 7% |
| मेक्सिको | 6.5% |
| हंगरी | 5.75% |
| इंडोनेशिया | 5.75% |
| भारत | 5.25% |
किन देशों में भारत से कम ब्याज दर?
दुनिया के कई बड़े देशों में नीतिगत ब्याज दर भारत से कम है। ऑस्ट्रेलिया में यह 4.35 फीसदी, जबकि सऊदी अरब में 4.25 फीसदी है।
ब्रिटेन और अमेरिका में ब्याज दर 3.75 फीसदी बताई गई है। चीन में यह 3 फीसदी है। दक्षिण कोरिया में 2.75 फीसदी और न्यूजीलैंड में 2.5 फीसदी है।
एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में जापान की ब्याज दर सबसे कम स्तरों में है। जापान में यह 1 फीसदी है।
वहीं स्विट्जरलैंड में ब्याज दर शून्य फीसदी है। यानी वहां केंद्रीय बैंक की नीतिगत दर फिलहाल जीरो के स्तर पर है।
| देश | ब्याज दर |
|---|---|
| ऑस्ट्रेलिया | 4.35% |
| सऊदी अरब | 4.25% |
| अमेरिका | 3.75% |
| ब्रिटेन | 3.75% |
| चीन | 3% |
| दक्षिण कोरिया | 2.75% |
| न्यूजीलैंड | 2.5% |
| जापान | 1% |
| स्विट्जरलैंड | 0% |
आखिर देशों में ब्याज दर इतनी अलग क्यों होती है?
हर देश की ब्याज दर वहां की आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है। केंद्रीय बैंक महंगाई, आर्थिक विकास, रोजगार, मुद्रा की स्थिति और वित्तीय स्थिरता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर नीतिगत दर तय करता है।
अगर किसी देश में महंगाई बहुत ज्यादा है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में मांग को कम करने की कोशिश कर सकता है। इससे कर्ज महंगा होता है और लोगों तथा कंपनियों के खर्च पर दबाव पड़ता है।
इसके उलट जब अर्थव्यवस्था सुस्त होती है और महंगाई नियंत्रण में होती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इससे कर्ज सस्ता होता है और निवेश तथा खपत को बढ़ावा मिल सकता है।
यही वजह है कि तुर्की और अर्जेंटीना जैसे देशों में ब्याज दरें बहुत ऊंची हैं, जबकि जापान और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में ये बेहद कम हैं।
अमेरिका में अगली समीक्षा पर नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर पर भी पूरी दुनिया की नजर रहती है, क्योंकि अमेरिका की मौद्रिक नीति का असर वैश्विक बाजारों, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर पड़ सकता है।
अमेरिका में अगली ब्याज दर समीक्षा पर निवेशकों की नजर रहेगी। अगर फेड दरों में बदलाव करता है तो इसका असर दुनियाभर के वित्तीय बाजारों पर देखने को मिल सकता है।
भारत की स्थिति क्या है?
भारत की नीतिगत ब्याज दर 5.25 फीसदी है। यह तुर्की, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, ब्राजील और रूस जैसे देशों की तुलना में काफी कम है, लेकिन अमेरिका, चीन, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे कई बड़े देशों की तुलना में अधिक है।
RBI का ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। फिलहाल इसका मतलब यह है कि मौजूदा नीतिगत दर में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है और कर्ज लेने वाले ग्राहकों को भी तुरंत किसी नई दर का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नोट: अलग-अलग देशों की ब्याज दरें समय के साथ बदलती रहती हैं। इसलिए किसी देश की मौजूदा दर को समझने के लिए संबंधित केंद्रीय बैंक के नवीनतम फैसले को आधार बनाना चाहिए।


