ओडिशा के किसान उपेंद्र कुमार प्रधान ने आर्थिक तंगी, पढ़ाई छूटने और जमीन गिरवी रखने जैसी मुश्किलों के बावजूद अमरूद और आम की खेती से 17 लाख रुपये सालाना टर्नओवर का सफल कारोबार खड़ा किया। जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी।
Success Story: संघर्षों से निकलकर बनाई सफलता की नई कहानी
कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता की राह जरूर निकलती है। ओडिशा के देवगढ़ जिले के रतनापाली गांव के किसान उपेंद्र कुमार प्रधान इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। कभी परिवार की आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुए उपेंद्र आज अमरूद और आम की आधुनिक खेती से करीब 17 लाख रुपये सालाना टर्नओवर हासिल कर रहे हैं। उनके फार्म पर झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी ग्राहक फल खरीदने पहुंचते हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
उपेंद्र का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। वर्ष 2004 और 2007 में बीमारी के चलते उनके दोनों बड़े भाइयों का निधन हो गया। इलाज का खर्च उठाने के लिए उनके पिता हिमाद्री प्रधान को अपनी दो एकड़ धान की जमीन मात्र 25 हजार रुपये में गिरवी रखनी पड़ी।
घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि उपेंद्र को बारकोट कॉलेज में प्लस-टू की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। उस समय परिवार के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था।
दोस्त की सलाह बनी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट
साल 2017 में उनके बचपन के दोस्त और भारतीय सेना में कार्यरत टिकेश्वर प्रधान ने उन्हें पारंपरिक खेती छोड़कर फलों की खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने देशभर के सफल फल किसानों के उदाहरण देकर उपेंद्र को आधुनिक बागवानी की संभावनाओं के बारे में बताया।
दोस्त की इस सलाह ने उपेंद्र की सोच बदल दी और उन्होंने जोखिम उठाते हुए अमरूद और आम की खेती शुरू करने का फैसला किया।
धान बेचकर जुटाए 3 लाख रुपये
खेती शुरू करने के लिए उपेंद्र ने करीब 3 लाख रुपये निवेश किए। यह रकम उन्होंने लगभग 15 एकड़ में उगाई गई धान की फसल बेचकर धीरे-धीरे बचाई थी।
इसके बाद उन्होंने करीब 1.2 एकड़ जमीन पर अमरूद और आम के पौधे लगाए और आधुनिक तकनीक से बागवानी की शुरुआत की।
221 रुपये का पौधा बना लाखों की कमाई का जरिया
उपेंद्र ने छत्तीसगढ़ के रायपुर से VNR बिही (VNR Bihi) किस्म के 250 अमरूद के पौधे खरीदे। परिवहन सहित एक पौधे की कीमत लगभग 221 रुपये पड़ी।
इसके साथ ही उन्होंने लेंगड़ा, दशहरी, हिमसागर और अम्रपाली किस्म के कुल 130 आम के पौधे भी लगाए।
अमरूद के पौधों में लगभग छह महीने के भीतर फल आने लगे। शुरुआती दौर में उन्होंने स्थानीय बाजार में 30 से 35 रुपये प्रति किलो के भाव से अमरूद बेचना शुरू किया, जिससे सालाना लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये का कारोबार होने लगा।
हर साल बढ़ती गई आय
समय के साथ उनकी खेती का दायरा और उत्पादन दोनों बढ़ते गए।
- वर्ष 2020 तक अमरूद से सालाना कारोबार लगभग 3.5 लाख रुपये पहुंच गया।
- वर्तमान में अमरूद से करीब 12 लाख रुपये का सालाना टर्नओवर होता है।
- आम की बिक्री से 1.5 से 2 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
- अमरूद और आम के पौधे बेचकर हर साल लगभग 1.5 लाख रुपये की कमाई होती है।
इन सभी स्रोतों को मिलाकर उनका कुल सालाना टर्नओवर अब करीब 17 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
पत्नी भी निभा रही हैं अहम भूमिका
उपेंद्र की सफलता में उनकी पत्नी कुनी प्रधान का भी बड़ा योगदान है। कुनी प्रधान केल्डा पंचायत की पूर्व सरपंच रह चुकी हैं। वह घर की जिम्मेदारियों के साथ पूरे फार्म की देखरेख भी करती हैं, जबकि उपेंद्र खेती और मार्केटिंग का काम संभालते हैं।
उनके फार्म पर चार स्थायी मजदूर दंपती भी कार्यरत हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
आधुनिक खेती से बदली किस्मत
उपेंद्र कुमार प्रधान की कहानी बताती है कि खेती केवल पारंपरिक आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय भी बन सकती है। सही फसल का चयन, आधुनिक तकनीक, बाजार की समझ और लगातार मेहनत के दम पर किसान भी लाखों रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं।
आज उपेंद्र न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुके हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि सही योजना और दृढ़ संकल्प के साथ खेती की जाए, तो कृषि क्षेत्र में भी शानदार भविष्य बनाया जा सकता है।


