UPI Merchant Fee: यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर संभावित मर्चेंट फीस (MDR) को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और मजबूत करने की एक लागत होती है, जिसे आखिरकार किसी न किसी को वहन करना पड़ता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस विषय पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी और भारतीय रिजर्व बैंक का प्राथमिक फोकस UPI नेटवर्क को और अधिक मजबूत तथा व्यापक बनाना है।
UPI पर फीस लगाने की चर्चा क्यों तेज हुई?
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में एक विधेयक पेश किया, जिसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि सरकार UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति दे सकती है।
प्रस्तावित बदलाव के तहत उस कानूनी प्रावधान में संशोधन की बात सामने आई है, जो वर्तमान में UPI ट्रांजैक्शन पर किसी भी प्रकार की मर्चेंट फीस लगाने पर रोक लगाता है। माना जा रहा है कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के बिजनेस या मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.40% तक MDR की अनुमति देने पर विचार कर सकती है।
क्या बोले RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा?
बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस समय UPI पर फीस लागू करने को लेकर कोई अंतिम राय बनाना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा,
“अभी इस बारे में बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। लागत तो किसी न किसी को उठानी ही होगी। यह एक सार्वजनिक सेवा है। हम चाहते हैं कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत तथा अधिक प्रभावी बने। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान इसी पर है। आगे क्या होता है, यह समय के साथ तय होगा।”
क्या अभी भी उपभोक्ता लागत चुका रहे हैं?
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भले ही उपभोक्ताओं से सीधे तौर पर कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा हो, लेकिन UPI नेटवर्क को चलाने की लागत किसी न किसी रूप में अर्थव्यवस्था के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि,
“आखिरकार उपभोक्ता किसी न किसी तरीके से पहले से ही इसकी लागत चुका रहा है। यह जरूरी नहीं कि वही उपभोक्ता सीधे भुगतान करे, लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था के माध्यम से यह लागत पहले से मौजूद है।”
RBI का फोकस फिलहाल क्या है?
RBI गवर्नर के अनुसार फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता UPI सिस्टम में लगातार निवेश सुनिश्चित करना और इसके लिए टिकाऊ राजस्व (Revenue) का स्रोत तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान लगातार बढ़ रहा है और केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रोजाना लगभग 80 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन तक पहुंचना है। ऐसे में फीस से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि उसका डिजिटल भुगतान के उपयोग पर क्या प्रभाव पड़ता है।
बड़े ट्रांजैक्शन पर फीस के पक्ष में रहे हैं अधिकारी
RBI के कई अधिकारी पहले भी बड़े मूल्य वाले UPI ट्रांजैक्शन पर सीमित MDR लगाने का समर्थन कर चुके हैं। उनका मानना है कि इससे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी।
वर्तमान में UPI पर शून्य MDR होने के कारण कई बैंकों ने इस क्षेत्र में निवेश सीमित कर दिया है, जबकि फिनटेक कंपनियों ने तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।
UPI यूजर्स पर क्या होगा असर?
यदि भविष्य में सरकार 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का फैसला करती है, तो इसका असर मुख्य रूप से व्यापारियों पर पड़ सकता है। हालांकि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त है और इस संबंध में सरकार या RBI की ओर से कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
निष्कर्ष
UPI पर संभावित मर्चेंट फीस को लेकर अभी केवल चर्चा और नीति-स्तर पर विचार चल रहा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया है कि फिलहाल प्राथमिकता डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और UPI के विस्तार को जारी रखना है। ऐसे में MDR पर कोई भी फैसला लेने से पहले उसके उपभोक्ताओं, व्यापारियों और पूरे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा.


