Crude Oil Price Today: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने और फारस की खाड़ी से तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद ने बाजार का रुख बदल दिया है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 5% से ज्यादा गिरकर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी दबाव में कारोबार कर रहा है। बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य-पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।
5% से ज्यादा टूटा ब्रेंट क्रूड
बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 5% से ज्यादा गिरकर 79.14 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.9% की गिरावट के साथ 75.06 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में भी दोनों बेंचमार्क में 10% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी थी।
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों ने फिलहाल मध्य-पूर्व में तनाव कम होने की संभावना को कीमतों में शामिल करना शुरू कर दिया है, जिससे तेल पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यह मार्ग बंद होता है तो वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
अब बाजार में यह उम्मीद बनी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और तेल परिवहन बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझौता हो सकता है। इसी संभावना ने कच्चे तेल की कीमतों को नीचे खींचा है।
अमेरिका और ईरान वार्ता से बढ़ी उम्मीद
मंगलवार को कतर ने जानकारी दी कि एक अंतरिम प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से भी होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत में प्रगति के संकेत दिए गए हैं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर संभावित नए सैन्य हमलों को फिलहाल टाल दिया है ताकि कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। इसी बयान के बाद से तेल बाजार में तनाव कुछ कम हुआ और कीमतों में नरमी देखने को मिली।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अस्थायी समझौता भी हो जाता है तो इससे मध्य-पूर्व का संकट पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिका की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं।
पिछले संघर्ष-विराम का क्या हुआ था?
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ पिछला संघर्ष-विराम एक महीने से भी कम समय तक टिक पाया था। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के चलते वह समझौता टूट गया और हालात फिर बिगड़ गए।
बीते महीने इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड में लगभग 32 डॉलर प्रति बैरल का उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। संघर्ष रेड सी (Red Sea) तक फैलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता बनी रही।
कतर, ओमान और यूरोप भी कर रहे मध्यस्थता
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच भी तनाव कम करने को लेकर बातचीत हुई। व्हाइट हाउस ने इस वार्ता की पुष्टि की है, हालांकि विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।
इसी बीच, यूरोपीय देशों के साथ बातचीत में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटाने की अनुमति देने पर भी विचार शुरू किया है। ईरान के सरकारी मीडिया IRIB News के अनुसार, ओमान के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही और रणनीतिक जलमार्ग में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर फोकस किया गया।
सऊदी अरब भी सक्रिय
सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए ओमान के माध्यम से यमन के हूथी विद्रोहियों से भी बातचीत की है। साथ ही, यदि बातचीत विफल होती है तो संभावित सैन्य स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं।
अमेरिकी भंडार बढ़ने से भी दबाव
आपूर्ति के मोर्चे पर भी बाजार को राहत देने वाली खबर आई है। पिछले सप्ताह अमेरिका के कच्चे तेल का भंडार 2.7 मिलियन बैरल बढ़ा, जबकि कुशिंग, ओक्लाहोमा में स्टॉक 2.4 मिलियन बैरल बढ़ गया।
यदि आधिकारिक सरकारी आंकड़ों में इसकी पुष्टि होती है तो यह मार्च के बाद कुशिंग में सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी होगी। इससे कुल भंडार फिर 20 मिलियन बैरल के ऊपर पहुंच जाएगा, जिसे तेल बाजार के सुचारू संचालन के लिए महत्वपूर्ण स्तर माना जाता है।
भारत पर क्या होगा असर?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों को इसका लाभ मिल सकता है। इससे तेल आयात बिल कम हो सकता है और आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर अंतिम फैसला तेल कंपनियां और सरकारी नीतियां तय करती हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। कमोडिटी और वित्तीय बाजारों में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश या ट्रेडिंग से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।


