वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का SEZ निर्यात 11.8% बढ़कर ₹16.36 लाख करोड़ पहुंच गया। गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शीर्ष निर्यातक राज्य रहे। दवा निर्यात भी $31.12 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
भारत की निर्यात क्षमता लगातार मजबूत होती जा रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में देश के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) से होने वाला निर्यात नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, SEZ से कुल निर्यात 11.8% की सालाना वृद्धि के साथ ₹16,36,192 करोड़ तक पहुंच गया है। यह भारत के विनिर्माण, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लोकसभा में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा दिए गए लिखित उत्तर के मुताबिक सरकार SEZ की परिचालन क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और घरेलू सप्लाई चेन के साथ इनके बेहतर एकीकरण पर लगातार काम कर रही है। इसके साथ ही मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का भी भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ मिला है।
Highlights
- SEZ निर्यात बढ़कर ₹16,36,192 करोड़ पहुंचा।
- वित्त वर्ष 2025-26 में 11.8% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई।
- गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शीर्ष निर्यातक राज्य बने।
- भारत का दवा निर्यात बढ़कर 31.12 अरब डॉलर पहुंचा।
- FTA के कारण भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत हुई।
SEZ निर्यात में गुजरात नंबर-1
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में विशेष आर्थिक क्षेत्रों से सबसे अधिक निर्यात गुजरात ने किया। इसके बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान रहा।
| राज्य | SEZ निर्यात |
|---|---|
| गुजरात | ₹4,05,595 करोड़ |
| कर्नाटक | ₹2,69,004 करोड़ |
| महाराष्ट्र | ₹2,43,422.50 करोड़ |
| तमिलनाडु | ₹2,12,288 करोड़ |
इन चार राज्यों का योगदान देश के कुल SEZ निर्यात में सबसे अधिक रहा है।
पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा SEZ निर्यात
भारत का SEZ निर्यात पिछले कुछ वर्षों से लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।
| वित्त वर्ष | कुल SEZ निर्यात |
|---|---|
| 2021-22 | ₹9,90,747 करोड़ |
| 2022-23 | ₹12.63 लाख करोड़ |
| 2023-24 | ₹13.55 लाख करोड़ |
| 2024-25 | ₹14,63,669 करोड़ |
| 2025-26 | ₹16,36,192 करोड़ |
यह आंकड़े बताते हैं कि भारत की निर्यात क्षमता में लगातार विस्तार हो रहा है और SEZ इस वृद्धि का प्रमुख आधार बन चुके हैं।
सरकार का फोकस निवेश और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि सरकार समय-समय पर ऐसे कदम उठा रही है जिनसे:
- SEZ की परिचालन दक्षता बढ़े।
- नए निवेश आकर्षित हों।
- घरेलू उद्योगों और SEZ के बीच बेहतर समन्वय बने।
- निर्यात आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत हो।
सरकार का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल प्रक्रियाओं से आने वाले वर्षों में SEZ निर्यात में और तेजी देखने को मिल सकती है।
दवा निर्यात में भी भारत का रिकॉर्ड प्रदर्शन
भारत का फार्मास्यूटिकल सेक्टर भी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- 2014-15: 15.43 अरब डॉलर
- 2024-25: 30.27 अरब डॉलर
- 2025-26: 31.12 अरब डॉलर
यानी पिछले एक दशक में भारत का दवा निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। इस दौरान औसत 6.6% CAGR की वृद्धि दर्ज की गई।
महाराष्ट्र दवा निर्यात में सबसे मजबूत राज्यों में शामिल
महाराष्ट्र देश के कुल दवा निर्यात में लगभग 19% का योगदान देता है।
राज्य का फार्मा निर्यात:
- 2021-22: 4.48 अरब डॉलर
- 2025-26: 5.94 अरब डॉलर
महाराष्ट्र के प्रमुख फार्मा निर्यातक जिले हैं:
- पुणे
- मुंबई
- ठाणे
- नासिक
- पालघर
- रायगढ़
- छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद)
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से मिला बड़ा फायदा
सरकार के अनुसार भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों ने भारतीय निर्यातकों को कई बड़े बाजारों तक आसान पहुंच दिलाई है। इससे शुल्क संबंधी बाधाएं कम हुई हैं और भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
भारत ने जिन प्रमुख देशों और समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, उनमें शामिल हैं:
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- ऑस्ट्रेलिया
- यूनाइटेड किंगडम (UK)
- ओमान
- न्यूजीलैंड
- EFTA ब्लॉक
भारत-UAE और ऑस्ट्रेलिया समझौते का असर
सरकार के मुताबिक:
- भारत-UAE CEPA लागू होने (1 मई 2022) के बाद 4.45 लाख मूल प्रमाण पत्र (Certificate of Origin) जारी किए जा चुके हैं।
- भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते के तहत दिसंबर 2022 से अब तक 2.73 लाख प्रमाण पत्र जारी हुए हैं।
- भारत-ओमान व्यापार समझौता 1 जून 2026 से लागू होने के बाद अब तक 783 प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
इन प्रमाणपत्रों के जरिए भारतीय निर्यातकों को पार्टनर देशों में रियायती शुल्क का लाभ मिलता है।
आगे क्या है उम्मीद?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार SEZ सुधारों, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल कस्टम प्रक्रिया और नए मुक्त व्यापार समझौतों पर इसी तरह काम करती रही तो आने वाले वर्षों में भारत का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है। विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और आईटी सेक्टर इस वृद्धि के प्रमुख इंजन बने रहेंगे।


