भारत में सॉफ्ट ड्रिंक की दुनिया में Thums Up और Limca ऐसे नाम हैं, जिनसे करोड़ों भारतीयों की यादें जुड़ी हुई हैं। आज ये दोनों ब्रांड दुनिया की सबसे बड़ी पेय कंपनियों में से एक Coca-Cola के पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। लेकिन एक समय ऐसा था जब ये पूरी तरह भारतीय ब्रांड थे और इन्हें भारतीय कंपनी Parle ने खड़ा किया था।
Thums Up और Limca की कहानी सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं, बल्कि भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों की वापसी, रणनीति और ब्रांड वैल्यू की दिलचस्प कहानी है।
1977 में Parle ने लॉन्च किया था Thums Up
साल 1977 में भारत के सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में बड़ा बदलाव आया। उस समय विदेशी कंपनी Coca-Cola ने भारत छोड़ दिया था। दरअसल, 1974 में लागू हुए Foreign Exchange Regulation Act (FERA) के तहत विदेशी कंपनियों को भारत में अपनी हिस्सेदारी कम करने और कुछ नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था।
Coca-Cola ने अपने फॉर्मूले और संचालन से जुड़े नियमों को लेकर असहमति जताई और भारतीय बाजार से बाहर निकलने का फैसला किया। इसके बाद बाजार में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया।
इसी मौके को देखते हुए Parle के मालिक रमेश चौहान ने 1977 में Thums Up लॉन्च किया। यह भारतीय स्वाद और बाजार को ध्यान में रखकर बनाया गया था।
Thums Up ने बनाया अपना अलग मुकाम
Coca-Cola के जाने के बाद भारतीय बाजार में कई घरेलू सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड सामने आए। इनमें Thums Up, Campa Cola और Double Seven जैसे नाम प्रमुख थे।
लेकिन मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, आक्रामक मार्केटिंग और अलग स्वाद की वजह से Thums Up तेजी से लोकप्रिय हो गया। कुछ ही वर्षों में यह भारत का सबसे बड़ा फिजी ड्रिंक ब्रांड बन गया।
1990 के दशक की शुरुआत तक Thums Up का भारतीय बाजार में दबदबा इतना मजबूत था कि इसका मार्केट शेयर करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
1993 में Coca-Cola की भारत में वापसी
नियमों में बदलाव के बाद Coca-Cola ने 1993 में एक बार फिर भारतीय बाजार में प्रवेश किया। लेकिन इस बार कंपनी के सामने बड़ी चुनौती थी।
भारत में पहले से ही Thums Up एक मजबूत ब्रांड बन चुका था और दूसरी तरफ Pepsi भी तेजी से अपनी पकड़ बना रही थी।
Coca-Cola के लिए भारतीय बाजार में दो बड़ी चुनौतियां थीं:
- Thums Up जैसा मजबूत घरेलू ब्रांड
- Pepsi जैसी वैश्विक प्रतिस्पर्धी कंपनी
इसी रणनीति के तहत Coca-Cola ने Parle से उसके सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो को खरीदने का फैसला किया।
Coca-Cola ने खरीदे Thums Up, Limca समेत कई ब्रांड
साल 1993 में Coca-Cola ने Parle से कई लोकप्रिय भारतीय ब्रांड खरीद लिए। इस डील में शामिल थे:
- Thums Up
- Limca
- Gold Spot
- Citra
- Maaza
उस समय Parle का भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में करीब 60 प्रतिशत हिस्सा था। Coca-Cola के लिए यह अधिग्रहण भारतीय बाजार में अपनी मजबूत वापसी का बड़ा कदम माना गया।
कैसे Parle को ब्रांड बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Coca-Cola ने भारतीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम उठाया। कंपनी ने Thums Up की सप्लाई चेन और बॉटलिंग नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया।
Thums Up की बोतलें तैयार करने वाले कई बॉटलिंग प्लांट Coca-Cola के नियंत्रण में आ गए। इससे Parle के सामने उत्पादन और सप्लाई को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
बाजार में ब्रांड की मांग बनी हुई थी, लेकिन सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी। ऐसे हालात में Parle के पास अपने सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड पोर्टफोलियो को बेचने का विकल्प बचा।
आखिरकार 1993 में Coca-Cola ने करीब 6 करोड़ डॉलर में Parle के एरेटेड ड्रिंक पोर्टफोलियो का अधिग्रहण कर लिया।
Coca-Cola ने Thums Up को बंद क्यों नहीं किया?
जब Coca-Cola ने Thums Up खरीदा, तब माना जा रहा था कि कंपनी अपने ग्लोबल ब्रांड Coca-Cola को बढ़ावा देने के लिए Thums Up को खत्म कर सकती है।
लेकिन कंपनी ने जल्द ही समझ लिया कि Thums Up सिर्फ एक सॉफ्ट ड्रिंक नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद और पहचान का हिस्सा बन चुका है।
इसलिए Coca-Cola ने इसे बंद करने के बजाय एक अलग ब्रांड के रूप में आगे बढ़ाया। कंपनी ने Thums Up की पहचान को बनाए रखा और इसे युवाओं के बीच एक मजबूत ब्रांड के तौर पर पेश किया।
आज Thums Up भारत के सबसे सफल सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड्स में शामिल है और यह Coca-Cola के सबसे बड़े बाजारों में से एक भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Limca भी बना Coca-Cola का हिस्सा
Thums Up की तरह Limca भी भारतीय बाजार में बेहद लोकप्रिय ब्रांड था। खासतौर पर नींबू स्वाद वाली इस ड्रिंक ने भारतीय ग्राहकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई थी।
Coca-Cola ने Parle से Limca को भी खरीदा और बाद में इसे अपने पोर्टफोलियो में शामिल रखा। साल 2024 में Limca ने करीब 2800 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का आंकड़ा पार किया, जो इसकी मजबूत लोकप्रियता को दिखाता है।
भारतीय ब्रांड से ग्लोबल सफलता तक का सफर
Thums Up और Limca की कहानी बताती है कि किसी ब्रांड की सफलता सिर्फ उसके मालिक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी पहचान, ग्राहक जुड़ाव और बाजार में पकड़ भी अहम होती है।
एक समय भारतीय कंपनी Parle द्वारा बनाए गए ये ब्रांड आज Coca-Cola जैसे वैश्विक दिग्गज का हिस्सा हैं। हालांकि मालिक बदल गया, लेकिन इन ब्रांड्स की भारतीय पहचान और लोकप्रियता आज भी कायम है।


