आईटीसी (ITC) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 27% गिरकर 3,579 करोड़ रुपये रह गया, जो बाजार के अनुमान से भी कमजोर रहा। हालांकि, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 28% बढ़कर 26,943 करोड़ रुपये पहुंच गया, जिससे कंपनी की बिक्री में मजबूती देखने को मिली। कंपनी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में आई बाधाओं को कारोबारी प्रदर्शन पर दबाव की बड़ी वजह बताया।
31 जुलाई को बाजार बंद होने के बाद जारी इन नतीजों का असर अब 3 अगस्त (सोमवार) को शेयर बाजार में ITC के शेयर पर देखने को मिल सकता है।
बाजार के अनुमान से कमजोर रहा मुनाफा
जून तिमाही में ITC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 3,579 करोड़ रुपये रहा, जबकि बाजार को करीब 3,990 करोड़ रुपये के मुनाफे की उम्मीद थी। यानी कंपनी का वास्तविक प्रदर्शन अनुमान से कमजोर रहा।
वहीं दूसरी ओर कंपनी का रेवेन्यू 28% बढ़कर 26,943 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो कारोबार में मजबूत वृद्धि का संकेत देता है।
EBITDA और मार्जिन में आई बड़ी गिरावट
कंपनी का EBITDA 27.9% घटकर 4,514 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 6,262 करोड़ रुपये था।
साथ ही EBITDA Margin घटकर 26.7% रह गया, जबकि एक साल पहले यह 31.7% था। इससे साफ है कि बढ़ती लागत और दबाव वाले कारोबारी माहौल का असर कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ा।
पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों का असर
ITC ने अपने बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कारोबारी माहौल काफी अनिश्चित बना रहा।
कंपनी के अनुसार:
- कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव रहा।
- वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
- इन परिस्थितियों का कई कारोबारों पर प्रतिकूल असर पड़ा।
ग्रामीण और शहरी बाजारों में मांग बनी मजबूत
कंपनी ने कहा कि जून तिमाही के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में उपभोक्ता मांग मजबूत रही। हालांकि आने वाली तिमाहियों में कुछ चुनौतियों पर नजर रखना जरूरी होगा।
ITC के मुताबिक आगे इन कारकों पर विशेष ध्यान रहेगा:
- महंगाई (Inflation)
- मानसून की प्रगति
- खरीफ फसलों की बुवाई
- पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति
कंपनी ने बताया कि अभी तक मानसून सामान्य से कमजोर रहा है और पिछले वर्ष की तुलना में खरीफ बुवाई भी कम हुई है।
FMCG कारोबार में दोहरे अंक की ग्रोथ
ITC के FMCG बिजनेस में सालाना आधार पर 12% की वृद्धि दर्ज की गई।
इसके अलावा कंपनी का डिजिटल-फर्स्ट और ऑर्गेनिक पोर्टफोलियो भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसका वार्षिक आवर्ती राजस्व (Annual Recurring Revenue) लगभग 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इस पोर्टफोलियो में शामिल प्रमुख ब्रांड हैं:
- YogaBar
- 24 Mantra Organic
- Prasuma
- Meatigo
- Mother Sparsh
बेवरेज बिजनेस ने दिखाई मजबूत बढ़त
गर्मी के मौसम का फायदा ITC के बेवरेज कारोबार को मिला। कंपनी ने बताया कि जून तिमाही में बेवरेज कैटेगरी में मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई, जिससे FMCG कारोबार को अच्छा समर्थन मिला।
एग्री बिजनेस और पेपर सेगमेंट का प्रदर्शन
ITC के एग्रीकल्चर बिजनेस का रेवेन्यू 353 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी ने बताया कि वैल्यू-एडेड एग्री पोर्टफोलियो, जिसमें मसाले, फल और सब्जियां शामिल हैं, ने बेहतर प्रदर्शन किया।
वहीं पेपर और पैकेजिंग बिजनेस का रेवेन्यू सालाना आधार पर 9% बढ़ा, जिससे इस सेगमेंट ने भी कंपनी की कुल आय में सकारात्मक योगदान दिया।
शेयर प्रदर्शन
31 जुलाई को ITC का शेयर 1.4% की गिरावट के साथ 281 रुपये पर बंद हुआ। पिछले एक वर्ष में कंपनी के शेयर में करीब 32% की गिरावट दर्ज की गई है। अब निवेशकों की नजर 3 अगस्त को बाजार खुलने पर रहेगी, जहां जून तिमाही के नतीजों के आधार पर शेयर की दिशा तय हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- नेट प्रॉफिट 27% घटकर ₹3,579 करोड़।
- रेवेन्यू 28% बढ़कर ₹26,943 करोड़।
- EBITDA घटकर ₹4,514 करोड़, मार्जिन 26.7%।
- FMCG कारोबार में 12% की ग्रोथ।
- बेवरेज और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स का प्रदर्शन मजबूत।
- पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव।
- 3 अगस्त को शेयर पर नतीजों का असर देखने को मिल सकता है।


