Air India Easy Connect Service: भारत में हवाई यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। एयर इंडिया ने अपनी नई ‘Easy Connect’ सेवा के तहत हब-एंड-स्पोक (Hub-and-Spoke) मॉडल लागू करना शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों को बिना बार-बार चेक-इन और सामान ट्रांसफर की परेशानी के अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ना है। इस नई व्यवस्था की शुरुआत अमृतसर से हो चुकी है, जबकि वाराणसी पहले से इस नेटवर्क का हिस्सा है। आने वाले समय में अहमदाबाद, गोवा और कोच्चि समेत कई अन्य शहर भी इससे जुड़ेंगे।
क्या है हब-एंड-स्पोक मॉडल?
हब-एंड-स्पोक मॉडल एक ऐसा एविएशन नेटवर्क है जिसमें कुछ बड़े एयरपोर्ट ‘हब’ के रूप में काम करते हैं, जबकि छोटे शहरों के एयरपोर्ट ‘स्पोक’ कहलाते हैं।
इस व्यवस्था में छोटे शहरों से आने वाले यात्रियों को पहले हब एयरपोर्ट तक लाया जाता है और वहीं से उन्हें अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ा जाता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यात्री को केवल एक बार चेक-इन करना होता है और उसका सामान सीधे अंतिम गंतव्य तक भेज दिया जाता है।
फिलहाल दिल्ली देश का पहला तय हब एयरपोर्ट है, जबकि वाराणसी और अमृतसर स्पोक एयरपोर्ट के रूप में काम कर रहे हैं। सरकार के अनुसार जल्द ही अहमदाबाद भी इस नेटवर्क में शामिल होगा।
पहले यात्रियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?
अब तक छोटे शहरों से विदेश जाने वाले यात्रियों को दिल्ली पहुंचने के बाद कई मुश्किल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था।
- घरेलू फ्लाइट से दिल्ली पहुंचना
- टर्मिनल बदलकर टर्मिनल-3 जाना
- सामान दोबारा चेक-इन करना
- फिर से सिक्योरिटी जांच
- इमिग्रेशन और कस्टम्स की प्रक्रिया पूरी करना
- कई घंटों तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना
यह प्रक्रिया खासकर बुजुर्ग यात्रियों और परिवारों के लिए काफी थकाऊ साबित होती थी।
अब Easy Connect से क्या बदलेगा?
एयर इंडिया की Easy Connect सेवा के तहत यात्री अपने स्पोक एयरपोर्ट पर ही अधिकांश जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर सकेंगे।
नई सुविधा के तहत:
- केवल एक बार चेक-इन करना होगा।
- सामान सीधे अंतिम अंतरराष्ट्रीय गंतव्य तक भेजा जाएगा।
- इमिग्रेशन की प्रक्रिया स्पोक एयरपोर्ट पर ही पूरी होगी।
- दिल्ली में दोबारा सामान लेने या चेक-इन करने की जरूरत नहीं होगी।
- टर्मिनल बदलने की परेशानी भी खत्म होगी।
- यात्री आसानी से अपनी कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट पकड़ सकेंगे।
अमृतसर से शुरू हुई नई सुविधा
एयर इंडिया ने मंगलवार से अमृतसर एयरपोर्ट पर Easy Connect सेवा शुरू कर दी है।
इस सेवा के तहत:
- रोजाना 2 Easy Connect फ्लाइट्स संचालित होंगी।
- यात्री दिल्ली के जरिए 27 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुंच सकेंगे।
- दिल्ली पहुंचने के चार घंटे के भीतर कनेक्टिंग फ्लाइट उपलब्ध होगी।
इन गंतव्यों में शामिल हैं:
- अमेरिका
- कनाडा
- यूनाइटेड किंगडम (UK)
- यूरोप
- ऑस्ट्रेलिया
- वेस्ट एशिया
- साउथ-ईस्ट एशिया
वाराणसी के बाद दूसरा स्पोक एयरपोर्ट बना अमृतसर
इस योजना की शुरुआत 25 जून को वाराणसी से की गई थी।
अब अमृतसर इस नेटवर्क का दूसरा स्पोक एयरपोर्ट बन गया है। एयर इंडिया ने बताया कि आने वाले हफ्तों में यह सुविधा:
- अहमदाबाद
- गोवा
- कोच्चि
- अन्य प्रमुख शहरों
तक भी विस्तारित की जाएगी।
क्या सीधी इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद होंगी?
नहीं।
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि अमृतसर से पहले से संचालित सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इस नई व्यवस्था का कोई असर नहीं पड़ेगा। वे पहले की तरह जारी रहेंगी।
Easy Connect केवल उन यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधा है जो दिल्ली के रास्ते विदेश यात्रा करते हैं।
क्या इस सिस्टम की कुछ सीमाएं भी हैं?
हालांकि यह व्यवस्था यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक है, लेकिन फिलहाल इसकी कुछ सीमाएं भी हैं।
- भारत लौटने वाले यात्रियों को अभी भी दिल्ली में इमिग्रेशन और कस्टम्स की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
- सामान लेकर दोबारा घरेलू फ्लाइट के लिए चेक-इन करना होगा।
- हर एयर इंडिया टिकट या यात्रा योजना (Itinerary) Easy Connect के लिए पात्र नहीं होगी।
सरकार की क्या है बड़ी योजना?
नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि सरकार पूरे देश में इस मॉडल का विस्तार करने की तैयारी कर रही है।
योजना के तहत:
- 4 हब एयरपोर्ट
- 40 स्पोक एयरपोर्ट
यानी कुल 44 एयरपोर्ट इस नेटवर्क का हिस्सा बनाए जाएंगे।
वहीं नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि अगले 10 वर्षों में 100 एयरपोर्ट और 200 हेलीपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि भारत वैश्विक एविएशन हब के रूप में उभर सके।
यात्रियों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?
Easy Connect सेवा शुरू होने के बाद छोटे शहरों से विदेश यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज होगी।
मुख्य लाभ:
- एक बार चेक-इन
- सामान सीधे अंतिम गंतव्य तक
- टर्मिनल बदलने की जरूरत नहीं
- समय की बचत
- कम भागदौड़
- बुजुर्ग और परिवारों के लिए अधिक सुविधा
- बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी
यदि यह मॉडल देशभर में सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारत के छोटे शहरों के यात्रियों को भी बड़े महानगरों जैसी सहज अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा का अनुभव मिलेगा।


