नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में कई महीनों से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज होने की उम्मीदों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 86 डॉलर से नीचे और अमेरिकी WTI क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं कुछ कम हुई हैं।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कम होता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी देखने को मिल सकता है।
Highlights
- अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों से तेल बाजार को राहत।
- ब्रेंट क्रूड 85.84 डॉलर प्रति बैरल तक गिरा।
- अमेरिकी WTI क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंचा।
- लगातार दूसरे दिन कच्चे तेल में 2-3% की गिरावट।
- भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी नजर।
2% से ज्यादा टूटा ब्रेंट क्रूड
मंगलवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 2.27% की गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 85.84 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसमें लगभग 2.58 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह गुरुवार को मिडिल-ईस्ट तनाव बढ़ने के कारण ब्रेंट क्रूड में लगभग 7% की तेजी आई थी और यह 100.65 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
80 डॉलर से नीचे आया अमेरिकी WTI क्रूड
कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च की एवीपी कायनात चेनवाला के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली।
उन्होंने बताया कि:
- अमेरिकी WTI क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
- ब्रेंट क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
- दोनों प्रमुख बेंचमार्क में लगभग 3% तक की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में फिलहाल सप्लाई बाधित होने की आशंकाएं कम होने से निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव बना।
अमेरिका-ईरान बातचीत की उम्मीद से मिला सहारा
विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है।
इसके बावजूद क्षेत्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से क्षेत्रीय स्थिरता और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा की। वहीं ओमान के विदेश मंत्री ने कतर, कुवैत, मिस्र और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ भी संपर्क बनाए रखा है।
भारत में पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर आमतौर पर भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए सकारात्मक माना जाता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम नहीं होते।
इसके पीछे कई कारण होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की खरीद लागत।
- रुपये और डॉलर की विनिमय दर।
- केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स।
- रिफाइनिंग और परिवहन लागत।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और गिरती हैं, तब तेल कंपनियां ईंधन कीमतों में राहत देने पर विचार कर सकती हैं।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
कमोडिटी बाजार की नजर अब पूरी तरह मिडिल-ईस्ट के घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान संबंधों पर बनी रहेगी। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है। वहीं किसी भी नए सैन्य तनाव की स्थिति में कीमतें फिर से तेज उछाल ले सकती हैं।


