नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान पैकेज्ड फूड में इस्तेमाल होने वाले पाम ऑयल (Palm Oil) को लेकर अहम बहस देखने को मिली। लोकसभा में एक सांसद ने सवाल उठाया कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां विकसित देशों में अपने स्नैक्स, बिस्कुट और अन्य पैकेज्ड खाद्य उत्पादों में सूरजमुखी या अन्य बेहतर गुणवत्ता वाले खाद्य तेलों का उपयोग करती हैं, जबकि भारत और दूसरे विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है।
इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत में पाम ऑयल का उपयोग पूरी तरह से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के तहत वैध और मानकीकृत है। सरकार ने यह भी कहा कि कंपनियों के लिए उत्पाद के लेबल पर इस्तेमाल किए गए तेल की जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ता सोच-समझकर खरीदारी कर सकें।
संसद में क्या उठा सवाल?
लोकसभा में पूछा गया कि आखिर क्यों कई वैश्विक कंपनियां विकसित देशों में अपने उत्पादों के लिए सूरजमुखी, कैनोला या अन्य खाद्य तेलों का उपयोग करती हैं, जबकि भारत जैसे देशों में उन्हीं उत्पादों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है।
सवाल के जरिए यह भी जानना चाहा गया कि क्या सरकार इस अंतर की जांच करेगी और क्या उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोई नई नीति बनाई जाएगी।
सरकार ने क्या दिया जवाब?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए कहा कि भारत में पाम ऑयल का उपयोग पूरी तरह से FSSAI द्वारा निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप है।
उन्होंने बताया कि FSSAI खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात के लिए वैज्ञानिक आधार पर मानक तय करता है ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
सरकार के अनुसार, Food Safety and Standards Regulations, 2011 के तहत पाम ऑयल को एक Standardized Edible Oil के रूप में मान्यता प्राप्त है और खाद्य उत्पादों में इसके उपयोग की अनुमति है।
स्नैक्स और पैकेज्ड फूड में पाम ऑयल का उपयोग क्यों होता है?
पाम ऑयल दुनिया के सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेलों में शामिल है। खाद्य उद्योग में इसका उपयोग कई कारणों से किया जाता है—
- यह लंबे समय तक उत्पाद की शेल्फ लाइफ बनाए रखने में मदद करता है।
- उच्च तापमान पर भी इसकी गुणवत्ता अपेक्षाकृत स्थिर रहती है।
- इसकी लागत अन्य कई खाद्य तेलों की तुलना में कम होती है।
- बिस्कुट, नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट फूड और बेकरी उत्पादों की बनावट बनाए रखने में यह उपयोगी माना जाता है।
हालांकि, विभिन्न देशों में कंपनियां स्थानीय बाजार, उपभोक्ता मांग, उपलब्धता, लागत और नियामकीय मानकों के आधार पर अलग-अलग प्रकार के खाद्य तेलों का चयन करती हैं।
लेबल पर तेल की जानकारी देना अनिवार्य
सरकार ने स्पष्ट किया कि Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations, 2020 के तहत सभी खाद्य कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने उत्पाद की Ingredients List में इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल का स्पष्ट उल्लेख करें।
यानी यदि किसी पैकेज्ड फूड में पाम ऑयल का उपयोग किया गया है, तो उसकी जानकारी पैकेट पर लिखी होना जरूरी है। इससे उपभोक्ता अपनी पसंद और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार उत्पाद चुन सकते हैं।
FSSAI की क्या भूमिका है?
FSSAI देश में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने वाली प्रमुख संस्था है। यह विभिन्न खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता मानक तय करती है और यह सुनिश्चित करती है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पाद निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।
सरकार के अनुसार, खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों की साझा जिम्मेदारी है। राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित रूप से निरीक्षण और सैंपलिंग की प्रक्रिया भी संचालित करते हैं।
क्या पाम ऑयल पर कोई प्रतिबंध है?
सरकार ने अपने जवाब में कहीं भी पाम ऑयल पर प्रतिबंध लगाने या इसके उपयोग को सीमित करने की बात नहीं कही है। सरकार का कहना है कि जब तक किसी खाद्य उत्पाद में पाम ऑयल का उपयोग FSSAI के निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाता है और इसकी जानकारी लेबल पर स्पष्ट रूप से दी जाती है, तब तक इसका उपयोग नियमों के तहत वैध है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ को खरीदने से पहले उसका Ingredients Label और Nutrition Information जरूर पढ़ना चाहिए। इससे यह पता चल जाता है कि उत्पाद में कौन-सा खाद्य तेल, कितनी मात्रा में वसा, चीनी और नमक मौजूद है। संतुलित आहार और सीमित मात्रा में प्रोसेस्ड फूड का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।


