5 AM Club Vs Night Owl: आजकल सफलता का फॉर्मूला अक्सर सुबह 5 बजे उठने और सख्त मॉर्निंग रूटीन को माना जाता है। लेकिन IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और ‘लिकशियस’ (Lickcious) के फाउंडर ईशान जिंदल इस सोच से बिल्कुल अलग हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति की बॉडी क्लॉक अलग होती है और उनके लिए सबसे ज्यादा क्रिएटिव और प्रोडक्टिव समय रात 9 बजे के बाद शुरू होता है। यही वजह है कि वह सुबह करीब 11:30 बजे उठते हैं और देर रात तक काम करते हैं। उनका कहना है कि असली सफलता घंटों की गिनती से नहीं, बल्कि काम के नतीजों से तय होती है।
5 AM क्लब से अलग है ईशान जिंदल की दिनचर्या
जहां कई स्टार्टअप फाउंडर सुबह सूर्योदय से पहले अपना दिन शुरू करते हैं, वहीं 30 वर्षीय ईशान जिंदल का शेड्यूल पूरी तरह अलग है। उन्होंने बताया कि उनकी सुबह आमतौर पर 11:30 बजे होती है और ऑफिस का काम दोपहर 12:30 या 1 बजे के आसपास शुरू होता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि वह सुबह तक पूरी तरह ऑफलाइन रहते हैं। ऑफिस पहुंचने से पहले भी वह जरूरी कॉल, मीटिंग और टीम के साथ समन्वय करते रहते हैं।
रात 9 बजे के बाद चलता है असली दिमाग
ईशान जिंदल का कहना है कि उनके लिए सबसे ज्यादा फोकस और क्रिएटिविटी का समय रात में आता है। जब ज्यादातर कर्मचारी ऑफिस से जा चुके होते हैं और माहौल शांत हो जाता है, तब वह बिना किसी रुकावट के अपने सबसे महत्वपूर्ण काम करते हैं।
उनके मुताबिक,
“रात का समय पूरी तरह आपका अपना होता है। उस दौरान कोई डिस्टर्ब नहीं करता और आप किसी एक काम पर पूरी तरह फोकस कर सकते हैं।”
उनका कहना है कि कई बड़े आइडिया और बिजनेस से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले उन्होंने देर रात के शांत माहौल में ही लिए हैं।
IIT दिल्ली में पड़ी देर रात तक काम करने की आदत
ईशान जिंदल ने बताया कि उनकी यह आदत IIT दिल्ली में पढ़ाई के दौरान बनी। उन्होंने याद करते हुए कहा कि पहले साल में हॉस्टल का इंटरनेट रात 1 बजे बंद हो जाता था। इसलिए छात्र इंटरनेट बंद होने से पहले देर रात तक अपने असाइनमेंट और प्रोजेक्ट पूरे करने की कोशिश करते थे।
बाद में जब इंटरनेट की यह पाबंदी हटी, तब देर रात तक पढ़ने और काम करने की आदत और मजबूत हो गई। इसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि आधी रात के बाद का समय सबसे ज्यादा शांत और एकाग्रता वाला होता है।
नींद से कभी समझौता नहीं करते
हालांकि ईशान देर रात तक काम करते हैं, लेकिन वह कम नींद लेने को सफलता का मंत्र नहीं मानते। उनका कहना है कि वह रोजाना पर्याप्त नींद लेते हैं और अपनी बॉडी की जरूरत के हिसाब से ही उठते हैं।
आमतौर पर वह रात 2 बजे से 4 बजे के बीच सोते हैं और उसके अनुसार सुबह उठते हैं। उनका मानना है कि कम नींद लेकर खुद को जबरदस्ती 5 बजे उठाना हर किसी के लिए सही नहीं हो सकता।
ऑफिस में भी लागू है ‘रिजल्ट फर्स्ट’ कल्चर
ईशान जिंदल सिर्फ अपनी लाइफस्टाइल में ही नहीं बल्कि अपनी कंपनी की वर्क कल्चर में भी इसी सोच को अपनाते हैं। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी का मूल्यांकन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह ऑफिस कितने बजे आया या कितने घंटे बैठा रहा।
उनके अनुसार, किसी भी टीम की सफलता इस बात पर निर्भर होनी चाहिए कि उसने तय लक्ष्य हासिल किए या नहीं।
उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि कंपनी का काम किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी पर निर्भर न रहे, बल्कि मजबूत सिस्टम के जरिए चलता रहे।
क्या हर किसी के लिए सही है Night Owl रूटीन?
विशेषज्ञों का मानना है कि सफलता के लिए कोई एक तय टाइमटेबल नहीं होता। कुछ लोग सुबह के समय बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जबकि कुछ लोगों की उत्पादकता रात में ज्यादा होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति अपनी बॉडी क्लॉक, पर्याप्त नींद और लगातार उत्पादकता के बीच संतुलन बनाए रखे।
ईशान जिंदल की दिनचर्या यह दिखाती है कि सफलता केवल सुबह जल्दी उठने से नहीं मिलती, बल्कि सही समय पर पूरी एकाग्रता और बेहतर प्रदर्शन करने से मिलती है।
निष्कर्ष
5 AM क्लब और Night Owl की बहस के बीच ईशान जिंदल का उदाहरण यह बताता है कि हर व्यक्ति का काम करने का तरीका अलग हो सकता है। उन्होंने IIT दिल्ली में बनी अपनी आदत को कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाया और उसी के आधार पर अपना बिजनेस खड़ा किया। उनका संदेश साफ है—घड़ी नहीं, बल्कि आपका प्रदर्शन और परिणाम आपकी सफलता तय करते हैं।


