अमेरिका ने भारत सहित कई देशों से आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 301 के तहत उठाया गया है, जिसमें जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े आरोपों की जांच के आधार पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाता है। राहत की बात यह है कि भारत को 10% के सबसे निचले अतिरिक्त टैरिफ स्लैब में रखा गया है, जबकि चीन, रूस, ब्राजील सहित 38 देशों पर 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। इसके बावजूद भारत सरकार इस फैसले को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और अमेरिका के साथ लगातार बातचीत जारी रखे हुए है।
भारत पर कितना टैरिफ लगाया गया?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने 23 जुलाई को अंतिम आदेश जारी करते हुए भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10% अतिरिक्त एड-वैलोरम (Ad Valorem) ड्यूटी लगाने की घोषणा की। यह दर पहले प्रस्तावित 12.5% से कम है, जिसे 2 जून 2026 को प्रस्तावित किया गया था।
भारत सरकार के लगातार कूटनीतिक प्रयासों और USTR के साथ हुई कई दौर की बैठकों, लिखित प्रस्तुतियों और सार्वजनिक सुनवाई में भागीदारी के बाद भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया।
भारत के 45% निर्यात पर नहीं पड़ेगा असर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का लगभग 45% हिस्सा इस अतिरिक्त 10% ड्यूटी से पूरी तरह बाहर रहेगा।
इनमें शामिल हैं:
- जेनेरिक दवाइयां (Generic Medicines)
- स्मार्टफोन
- कुछ विशेष औद्योगिक उत्पाद
- वे उत्पाद जो पहले से सेक्शन 232 के तहत आते हैं
इसका मतलब है कि भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर नए टैरिफ का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
बाकी 55% निर्यात पर लगेगी अतिरिक्त ड्यूटी
हालांकि शेष 55% भारतीय निर्यात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लागू होगा। इसमें मुख्य रूप से ऐसे उत्पाद शामिल हैं जो सेक्शन 301 जांच के दायरे में आए हैं।
सरकार का कहना है कि अन्य देशों की तुलना में भारत पर लगाया गया शुल्क कम होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी रहेगी।
चीन, रूस और ब्राजील पर ज्यादा टैरिफ
अमेरिका ने चीन, रूस, ब्राजील सहित 38 देशों के लिए 12.5% अतिरिक्त टैरिफ तय किया है।
ऐसे में भारत को 10% स्लैब में रखना भारतीय निर्यातकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय सामान की कीमत प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम प्रभावित होगी।
फिर भी भारत क्यों चिंतित है?
कम टैरिफ मिलने के बावजूद भारत की सबसे बड़ी चिंता टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर को लेकर है।
अमेरिका ने बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया को टेक्सटाइल टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) में विशेष छूट दी है, जबकि भारत को यह लाभ नहीं मिला।
इन देशों को अमेरिकी कॉटन और फाइबर का उपयोग करने वाले तय मात्रा के कपड़ा निर्यात पर विशेष रियायत मिलेगी, जिससे भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
वित्त वर्ष 2026 में कितना रहा भारत का निर्यात?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में अमेरिका को भारत का वस्तुओं का कुल निर्यात लगभग 87.3 अरब डॉलर रहा।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है। इसलिए किसी भी अतिरिक्त आयात शुल्क का असर भारतीय निर्यातकों और कई उद्योगों पर पड़ सकता है।
सरकार का आगे क्या प्लान है?
वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि टेक्सटाइल से जुड़ा नया तंत्र अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।
सरकार की प्राथमिकताएं हैं:
- भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को जल्द अंतिम रूप देना।
- टेक्सटाइल सेक्टर को बेहतर बाजार पहुंच दिलाना।
- भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा करना।
- भविष्य में टैरिफ से जुड़ी बाधाओं को कम करने के लिए अमेरिका के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाना।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जोर
भारत सरकार ने दोहराया है कि 2 फरवरी 2026 को घोषित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से व्यापार संबंध और मजबूत होंगे तथा भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए सेक्शन 301 टैरिफ में भारत को अन्य कई देशों की तुलना में राहत जरूर मिली है, लेकिन टेक्सटाइल सेक्टर को अपेक्षित छूट न मिलने से सरकार सतर्क है। भारत फिलहाल अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखे हुए है ताकि भविष्य में व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके और भारतीय निर्यातकों के हित सुरक्षित रह सकें।


