Tata Steel Tax Dispute: देश की प्रमुख स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) एक बार फिर बड़े टैक्स विवाद को लेकर सुर्खियों में है। कंपनी से जुड़े ₹25,185.51 करोड़ के टैक्स मामले को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोबारा बहाल कर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी। यह विवाद फाइनेंस एक्ट 2026 में किए गए रेट्रोस्पेक्टिव (पिछली तारीख से लागू) संशोधन के बाद फिर से सक्रिय हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर रहेगी और इसका असर कंपनी के शेयरों की चाल पर भी दिखाई दे सकता है।
Highlights
- ₹25,185.51 करोड़ का टैक्स विवाद फिर से बॉम्बे हाई कोर्ट में बहाल।
- अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।
- टाटा स्टील फाइनेंस एक्ट 2026 के रेट्रोस्पेक्टिव संशोधन को चुनौती देगी।
- मामला AY 2019-20 और टाटा स्टील BSL के लोन वेवर से जुड़ा है।
- शुक्रवार को Tata Steel का शेयर 0.85% गिरकर 185 रुपये पर बंद हुआ।
क्या है पूरा ₹25,185 करोड़ का टैक्स विवाद?
यह मामला आकलन वर्ष (Assessment Year) 2019-20 से जुड़ा हुआ है। उस समय आयकर विभाग ने टाटा स्टील बीएसएल लिमिटेड (जो अब टाटा स्टील में विलय हो चुकी है) को ₹25,185.51 करोड़ के लोन वेवर (Loan Waiver) के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
आयकर विभाग का कहना था कि कर्ज माफी से कंपनी को आर्थिक लाभ हुआ है, इसलिए इस राशि को कर योग्य आय (Taxable Income) माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, टाटा स्टील का तर्क था कि यह नोटिस कानून के दायरे से बाहर जारी किया गया था और इसे जारी करने वाले अधिकारी के पास आवश्यक अधिकार नहीं थे।
इसी आधार पर कंपनी ने मार्च 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पहले हाई कोर्ट ने टाटा स्टील को दी थी राहत
अगस्त 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने टाटा स्टील के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग का नोटिस रद्द कर दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि नोटिस फेसलेस असेसमेंट ऑफिसर (Faceless Assessment Officer) की बजाय ज्यूरिस्डिक्शनल असेसमेंट ऑफिसर द्वारा जारी किया गया था, जबकि उस समय की व्यवस्था के अनुसार ऐसा करना नियमों के अनुरूप नहीं था। इसलिए नोटिस को तकनीकी आधार पर अमान्य घोषित कर दिया गया था।
फाइनेंस एक्ट 2026 के बाद कैसे बदला पूरा मामला?
बाद में केंद्र सरकार ने फाइनेंस एक्ट 2026 के जरिए आयकर कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किया। इस संशोधन को रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव दिया गया, यानी इसे पिछली तारीख से लागू माना गया।
इस बदलाव के बाद ज्यूरिस्डिक्शनल असेसमेंट ऑफिसर्स को ऐसे मामलों में नोटिस जारी करने का अधिकार फिर से मिल गया। इसी कानूनी संशोधन के आधार पर मामला दोबारा खुला और सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसलों को देखते हुए संबंधित मामलों को पुनर्विचार के लिए हाई कोर्ट भेज दिया।
अब बॉम्बे हाई कोर्ट में क्या होगा?
20 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने टाटा स्टील की याचिका को फिर से बहाल कर दिया।
साथ ही अदालत ने कंपनी को यह अनुमति भी दी है कि वह फाइनेंस एक्ट 2026 के रेट्रोस्पेक्टिव संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दे सके।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी, जहां अदालत यह भी देखेगी कि कानून में किया गया संशोधन संविधान के अनुरूप है या नहीं।
टाटा स्टील का क्या कहना है?
कंपनी का कहना है कि उसके कानूनी तर्क पहले की तरह मजबूत हैं और फाइनेंस एक्ट 2026 में हुए संशोधन से उसके मूल दावों पर कोई असर नहीं पड़ता।
टाटा स्टील का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी नहीं बल्कि कानूनी व्याख्या और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मामला है, इसलिए वह अदालत में पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।
शेयर बाजार पर क्या पड़ सकता है असर?
इस घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को टाटा स्टील का शेयर 0.85% गिरकर 185 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि फिलहाल यह केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और कंपनी पर किसी अतिरिक्त टैक्स देनदारी का अंतिम फैसला नहीं आया है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक निवेशकों की नजर इस मामले से जुड़ी हर सुनवाई और अपडेट पर बनी रहेगी। यदि फैसला कंपनी के पक्ष में आता है तो अनिश्चितता कम हो सकती है, जबकि विपरीत स्थिति में निवेशकों की धारणा पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
टाटा स्टील देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में शामिल है और उसके खिलाफ चल रहा यह टैक्स विवाद आकार के लिहाज से बेहद बड़ा है। हालांकि अभी मामला न्यायालय में विचाराधीन है और किसी भी तरह की टैक्स देनदारी पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। इसलिए केवल इस खबर के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। NewsJagran किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


