Ravneet Singh Bittu Resignation: केंद्र सरकार में रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में इसकी पुष्टि की गई है। हालांकि, अभी तक उनके इस्तीफे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया इस्तीफा
President Droupadi Murmu, as advised by the Prime Minister, has accepted the resignation of Ravneet Singh from the Union Council of Ministers, with immediate effect
(File pic of Ravneet Singh) pic.twitter.com/YuqroBzOi9
— ANI (@ANI) July 24, 2026 शुक्रवार को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने रेल मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री (Minister of State) के पद से अपना कार्यभार छोड़ दिया।
फिलहाल केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से इस्तीफे के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। ऐसे में इस फैसले को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पंजाब विधानसभा चुनाव से जोड़ी जा रही है इस्तीफे की टाइमिंग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा हो सकता है। भाजपा पंजाब में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने और राज्य स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
बिट्टू का राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो चुका था। इसके बाद उनके इस्तीफे ने इस संभावना को और मजबूत किया है कि उन्हें पंजाब की राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। बेअंत सिंह की वर्ष 1995 में आतंकवादी हमले में हत्या कर दी गई थी।
रवनीत सिंह बिट्टू का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ। उन्होंने लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
उनका संसदीय सफर इस प्रकार रहा—
- 2009: आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने।
- 2014: लुधियाना लोकसभा सीट से जीत दर्ज की।
- 2019: लगातार दूसरी बार लुधियाना से सांसद चुने गए।
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले छोड़ी कांग्रेस
2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें लुधियाना लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।
हालांकि चुनाव में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी।
केंद्र सरकार में निभाई अहम जिम्मेदारी
रवनीत सिंह बिट्टू केंद्र सरकार में दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों से जुड़े रहे। वह—
- रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
के रूप में कार्य कर रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रेलवे परियोजनाओं, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और पंजाब से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
भाजपा के पंजाब मिशन पर जताया था भरोसा
रवनीत सिंह बिट्टू पहले भी सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुके हैं कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा था कि पार्टी का लक्ष्य पंजाब में डबल इंजन सरकार बनाना है ताकि विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा का पूरा संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को पंजाब के हर विधानसभा क्षेत्र और हर कार्यकर्ता तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस्तीफे के बाद क्या हो सकते हैं राजनीतिक मायने?
रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि भाजपा पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक बदलाव कर सकती है और बिट्टू को राज्य की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। हालांकि, जब तक पार्टी या सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इन संभावनाओं की पुष्टि नहीं की जा सकती।


