Infosys Share Price: भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी इंफोसिस (Infosys) के शेयर शुक्रवार, 24 जुलाई को दबाव में कारोबार करते दिखे। कंपनी के जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी होने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे BSE पर शेयर करीब 2.5% गिरकर ₹1,023.30 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। नतीजों के बाद कई विदेशी ब्रोकरेज हाउस ने भी कंपनी को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। खासकर जेपी मॉर्गन (JPMorgan) और HSBC ने अपनी रेटिंग डाउनग्रेड कर दी, जिसके चलते स्टॉक पर दबाव और बढ़ गया।
Q1 FY27 में कैसा रहा इंफोसिस का प्रदर्शन?
इंफोसिस ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) में ₹7,769 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹6,921 करोड़ के मुकाबले 12.3% अधिक है।
हालांकि, तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी का मुनाफा ₹8,501 करोड़ से घटकर ₹7,769 करोड़ रह गया, यानी करीब 8.6% की गिरावट दर्ज हुई।
वहीं, कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹48,211 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 14% और पिछली तिमाही की तुलना में 3.9% अधिक है। कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) आधार पर रेवेन्यू में 2.4% YoY और 1% QoQ की वृद्धि दर्ज की गई।
गाइडेंस में कटौती से बढ़ी निवेशकों की चिंता
हालांकि कंपनी के मुनाफे और रेवेन्यू में बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन निवेशकों को सबसे ज्यादा निराशा FY27 के रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में कटौती से हुई।
इंफोसिस ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस का ऊपरी स्तर 3.5% से घटाकर 3% कर दिया। अब कंपनी को 1.5% से 3% के बीच ग्रोथ की उम्मीद है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम वैश्विक आईटी खर्च में कमजोरी और बड़े क्लाइंट्स की धीमी डिमांड का संकेत देता है।
ब्रोकरेज फर्मों की क्या है राय?
HSBC ने ‘Buy’ से ‘Hold’ किया
HSBC ने इंफोसिस पर अपनी रेटिंग “Buy” से घटाकर “Hold” कर दी है। साथ ही टारगेट प्राइस ₹1,340 से घटाकर ₹1,110 कर दिया।
ब्रोकरेज का कहना है कि गाइडेंस में कटौती बाजार की उम्मीद से ज्यादा रही। हालांकि मौजूदा वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहा है, लेकिन अगले कुछ क्वार्टर कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।
JPMorgan ने किया ‘Neutral’
जेपी मॉर्गन ने भी इंफोसिस की रेटिंग “Overweight” से घटाकर “Neutral” कर दी है और ₹1,050 का टारगेट प्राइस तय किया है।
ब्रोकरेज के अनुसार कंपनी की ग्रोथ पर कई दबाव बने हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- वैश्विक आईटी डिमांड में कमजोरी
- AI के कारण बढ़ता प्राइस प्रेशर
- डेमलर प्रोजेक्ट से जुड़ी चुनौतियां
- Energy, Utilities, Resources & Services (EURS) कॉन्ट्रैक्ट का समाप्त होना
जेपी मॉर्गन का मानना है कि नए ऑर्गेनिक ग्रोथ अनुमान से निकट भविष्य में तेज रिकवरी की उम्मीद कम हो गई है।
CLSA ने रखा ‘Outperform’
CLSA ने इंफोसिस पर “Outperform” रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹1,109 का टारगेट प्राइस दिया है।
ब्रोकरेज का कहना है कि गाइडेंस में कटौती जरूर निराशाजनक रही, लेकिन कंपनी का EBIT मार्जिन मजबूत रहा है और ऑर्डर बुक भी स्थिर बनी हुई है।
CLSA ने यह भी कहा कि आशीष कुमार दाश की CEO-Designate के रूप में नियुक्ति कंपनी के इतिहास में पहली बार है, जब किसी इनसाइडर लेकिन नॉन-फाउंडर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नोमुरा ने बनाए रखा ‘Buy’
नोमुरा ने इंफोसिस पर अपनी “Buy” रेटिंग बरकरार रखी है और ₹1,290 का टारगेट प्राइस दिया है।
ब्रोकरेज का मानना है कि रेवेन्यू में कमजोरी कुछ बड़े क्लाइंट्स से जुड़े विशेष कारणों की वजह से आई है और मौजूदा स्तर पर स्टॉक आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध है।
कंपनी में होगा बड़ा नेतृत्व बदलाव
इंफोसिस ने यह भी घोषणा की कि मौजूदा MD एवं CEO सलिल पारेख अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ देंगे। उनकी जगह 1 अप्रैल 2027 से आशीष कुमार दाश कंपनी के नए MD और CEO का कार्यभार संभालेंगे।
यह नेतृत्व परिवर्तन भी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
इंफोसिस के तिमाही नतीजे पूरी तरह कमजोर नहीं रहे, क्योंकि कंपनी ने मुनाफे और रेवेन्यू दोनों में सालाना वृद्धि दर्ज की है। लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में कटौती और वैश्विक आईटी सेक्टर में सुस्ती की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी वजह से शेयर में दबाव देखने को मिला और अधिकांश ब्रोकरेज हाउस ने निकट अवधि के लिए सतर्क रुख अपनाया है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा वैल्यूएशन आकर्षक हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। NewsJagran किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


