Adani Airline News: अडानी ग्रुप अब भारतीय एविएशन सेक्टर में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट ऑपरेटर बनने के बाद अब समूह अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए ग्रुप ने केंद्र सरकार से 2006 से लागू एक महत्वपूर्ण नियम में बदलाव की मांग की है। यदि सरकार मंजूरी देती है तो भारत के एयरलाइन बाजार में इंडिगो और एयर इंडिया के वर्चस्व को चुनौती देने वाला नया खिलाड़ी सामने आ सकता है।
Highlights
- अडानी ग्रुप ने एयरलाइन शुरू करने की तैयारी तेज की
- सरकार से 2006 के एविएशन नियम में बदलाव की मांग
- फिलहाल मुंबई समेत 8 एयरपोर्ट का संचालन करता है अडानी ग्रुप
- Embraer के साथ भारत में विमान निर्माण की योजना
- एयरलाइन बाजार में बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
अब एयरपोर्ट के बाद एयरलाइन बिजनेस पर अडानी की नजर
नई दिल्ली: इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट, एनर्जी, सीमेंट और एयरपोर्ट सेक्टर में अपनी मजबूत मौजूदगी के बाद अडानी ग्रुप अब एविएशन बिजनेस में एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार समूह अपनी खुद की शेड्यूल्ड एयरलाइन लॉन्च करने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
अडानी ग्रुप इस समय देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट ऑपरेटर है। कंपनी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, मंगलुरु और अन्य एयरपोर्ट्स का संचालन करती है। अब एयरलाइन शुरू करने की दिशा में पहला कदम सरकार से नियमों में बदलाव की मांग के रूप में सामने आया है।
कौन-सा नियम बना हुआ है सबसे बड़ी बाधा?
वर्तमान नियम के अनुसार, दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटर किसी भी शेड्यूल्ड एयरलाइन में 10% से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकते।
यह नियम वर्ष 2006 में दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के निजीकरण के समय बनाया गया था ताकि एयरपोर्ट संचालक किसी एयरलाइन को अनुचित लाभ न पहुंचा सकें।
सूत्रों के मुताबिक नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस नियम में बदलाव की कानूनी संभावनाओं पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से राय ले रहा है। यदि बदलाव किया जाता है तो इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
क्यों बदलना चाहती है सरकार यह नियम?
सरकारी सूत्रों का मानना है कि भारतीय घरेलू विमानन बाजार में फिलहाल इंडिगो और एयर इंडिया का लगभग 90% बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा है।
ऐसे में सरकार अधिक प्रतिस्पर्धा चाहती है ताकि यात्रियों को बेहतर सेवाएं और विकल्प मिल सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नए बड़े खिलाड़ी बाजार में आते हैं तो—
- किरायों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
- नए रूट्स पर उड़ानों की संख्या बढ़ सकती है।
- यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं।
- एयरलाइन सेक्टर में निवेश और रोजगार बढ़ सकते हैं।
Embraer के साथ मिलकर भारत में बनाए जाएंगे विमान
अडानी ग्रुप पहले ही ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी Embraer के साथ साझेदारी कर चुका है। दोनों कंपनियां भारत में विमान निर्माण की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
हालांकि Embraer के विमानों में भारतीय एयरलाइंस ने अभी तक ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है। ऐसे में यदि अडानी अपनी एयरलाइन शुरू करता है तो वह अपने ही नेटवर्क में इन विमानों का उपयोग कर सकता है। इससे विमान निर्माण परियोजना को व्यावसायिक सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
जीत अडानी पहले कर चुके थे इनकार
दिलचस्प बात यह है कि पिछले वर्ष दिसंबर में गौतम अडानी के बेटे जीत अडानी ने एयरलाइन बिजनेस में उतरने की संभावना से इनकार किया था। उनका कहना था कि यह समूह की पूंजी आवंटन रणनीति के अनुरूप नहीं है।
लेकिन अब बदलते हालात और विमान निर्माण परियोजना के चलते समूह की रणनीति में बदलाव देखने को मिल रहा है।
घरेलू एयरलाइंस क्यों कर सकती हैं विरोध?
यदि अडानी ग्रुप को एयरलाइन शुरू करने की अनुमति मिलती है तो मौजूदा एयरलाइंस इसका विरोध कर सकती हैं।
उनकी सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि एयरपोर्ट ऑपरेटर होने के कारण अडानी को—
- स्लॉट आवंटन में लाभ मिल सकता है।
- ग्राउंड हैंडलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
- संचालन लागत में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
हालांकि सरकार को ऐसा कोई भी ढांचा तैयार करना होगा जिससे सभी एयरलाइंस के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
क्या जल्द लॉन्च होगी अडानी एयरलाइन?
फिलहाल अडानी ग्रुप की ओर से एयरलाइन लॉन्च करने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। कंपनी ने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी भी नहीं की है।
हालांकि उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि नियमों में संशोधन होता है और समूह को मंजूरी मिलती है तो आने वाले वर्षों में भारत को एक नई फुल-सर्विस या रीजनल एयरलाइन देखने को मिल सकती है।
भारत के एविएशन सेक्टर पर क्या होगा असर?
यदि अडानी ग्रुप एयरलाइन कारोबार में उतरता है तो भारतीय विमानन उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
- एयरलाइन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- इंडिगो और एयर इंडिया के दबदबे को चुनौती मिल सकती है।
- भारत में विमान निर्माण (Make in India) को गति मिलेगी।
- एयरपोर्ट, एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग और एयरलाइन ऑपरेशन का एकीकृत मॉडल विकसित हो सकता है।
ऐसे में आने वाले समय में सरकार के फैसले पर पूरे एविएशन सेक्टर की नजर रहेगी।


