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Reading: Rare Earth Supply: अब नहीं चलेगी चीन की दादागिरी! भारत को पड़ोस में मिला रेयर अर्थ का बड़ा खजाना, EV और डिफेंस सेक्टर को मिलेगा बूस्ट
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Rare Earth Supply: अब नहीं चलेगी चीन की दादागिरी! भारत को पड़ोस में मिला रेयर अर्थ का बड़ा खजाना, EV और डिफेंस सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

Namam Sharma
Last updated: 2026/07/23 at 12:27 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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6 Min Read
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नई दिल्ली: दुनिया में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, विंड टर्बाइन और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) की अहमियत लगातार बढ़ रही है। अभी तक इस रणनीतिक संसाधन की सप्लाई चेन पर चीन का लगभग एकाधिकार रहा है, जिसके कारण वह समय-समय पर इसे वैश्विक राजनीति और व्यापार में दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। लेकिन अब भारत को इस चुनौती का बड़ा विकल्प अपने पड़ोस में मिलता दिखाई दे रहा है।

Contents
रेयर अर्थ सप्लाई चेन पर चीन का दबदबाभारत को म्यांमार में मिला बड़ा विकल्पराष्ट्रपति की भारत यात्रा में भी हुई अहम चर्चाम्यांमार क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?चीन ने एक्सपोर्ट रोककर बढ़ाई थी दुनिया की मुश्किलेंउत्पादन में चीन सबसे आगेभारत को क्या होगा फायदा?भारत की रणनीति क्या है?

भारत और म्यांमार के बीच रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। यदि यह साझेदारी मजबूत होती है तो आने वाले वर्षों में भारत की चीन पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।

रेयर अर्थ सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा

दुनिया भर में रेयर अर्थ तत्वों की माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण के क्षेत्र में चीन की मजबूत पकड़ है। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक कारों, स्मार्टफोन, मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट, ड्रोन, रोबोटिक्स, मेडिकल उपकरण और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में रेयर अर्थ मिनरल्स की मांग कई गुना बढ़ने वाली है। ऐसे में इनकी सप्लाई पर नियंत्रण रखने वाले देशों की रणनीतिक ताकत भी बढ़ेगी।

भारत को म्यांमार में मिला बड़ा विकल्प

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत और म्यांमार के बीच रेयर अर्थ सेक्टर में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हाल ही में भारतीय प्रतिनिधिमंडलों ने म्यांमार का दौरा कर वहां उपलब्ध रेयर अर्थ संसाधनों और संभावित साझेदारी पर चर्चा की।

म्यांमार में भारत के राजदूत अभय ठाकुर ने मांडले में आयोजित एक माइनिंग फोरम के दौरान बताया कि पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के बीच खनन क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच भारत के दो उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने म्यांमार का दौरा कर रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर विस्तृत बातचीत की।

राष्ट्रपति की भारत यात्रा में भी हुई अहम चर्चा

राजदूत अभय ठाकुर के अनुसार, मई-जून 2026 में म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के बीच रेयर अर्थ सहयोग प्रमुख एजेंडा रहा। इससे संकेत मिलता है कि भारत इस क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी विकसित करना चाहता है।

म्यांमार क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?

म्यांमार का काचिन (Kachin) क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े हेवी रेयर अर्थ भंडारों में शामिल माना जाता है। अनुमान है कि वैश्विक हेवी रेयर अर्थ सप्लाई का लगभग आधा हिस्सा इसी क्षेत्र से निकलता है।

अब तक इन खनिजों को म्यांमार से चीन भेजा जाता रहा है, जहां उनकी प्रोसेसिंग कर उच्च गुणवत्ता वाले मैग्नेट बनाए जाते हैं। यही मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन, रक्षा उपकरण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत हैं।

यदि भारत इस सप्लाई चेन का हिस्सा बनता है तो उसे भविष्य में बड़े रणनीतिक और आर्थिक फायदे मिल सकते हैं।

चीन ने एक्सपोर्ट रोककर बढ़ाई थी दुनिया की मुश्किलें

पिछले वर्ष अप्रैल में चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद भारत, अमेरिका सहित कई देशों की ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के सामने कच्चे माल की उपलब्धता का संकट खड़ा हो गया था।

इस घटना ने दुनिया को यह एहसास कराया कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में बड़े औद्योगिक संकट का कारण बन सकती है। इसके बाद कई देशों ने वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया।

उत्पादन में चीन सबसे आगे

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में दुनिया का कुल रेयर अर्थ उत्पादन लगभग 3.91 लाख मीट्रिक टन रहा।

इसमें—

  • चीन: 2,70,000 मीट्रिक टन (करीब 69%)
  • अमेरिका: 45,000 मीट्रिक टन (करीब 11%)
  • म्यांमार: 31,000 मीट्रिक टन (करीब 8%)

इन आंकड़ों से साफ है कि चीन अभी भी वैश्विक बाजार का सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है, लेकिन म्यांमार भी तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

भारत को क्या होगा फायदा?

यदि भारत और म्यांमार के बीच रेयर अर्थ सहयोग मजबूत होता है तो इसके कई बड़े फायदे सामने आ सकते हैं।

  • चीन पर निर्भरता कम होगी।
  • इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को स्थिर सप्लाई मिलेगी।
  • रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी।
  • ‘मेक इन इंडिया’ और क्रिटिकल मिनरल मिशन को गति मिलेगी।
  • भविष्य में भारत रेयर अर्थ वैल्यू चेन में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

भारत की रणनीति क्या है?

भारत केवल रेयर अर्थ की खरीद तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार का फोकस पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर है, जिसमें खनन, प्रोसेसिंग, मैग्नेट निर्माण और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं। म्यांमार के साथ बढ़ता सहयोग इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय रहते रेयर अर्थ सप्लाई के वैकल्पिक स्रोत विकसित कर लेता है तो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता काफी मजबूत हो सकती है।

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TAGGED: China, critical minerals, Defence, electric vehicle, EV, INDIA, Mining, Myanmar, Rare Earth, Rare Earth Minerals, Rare Earth Supply, Semiconductor
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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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