FASTag Annual Pass: देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) व्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी कि जून 2026 तक 77 लाख से अधिक Annual FASTag Pass जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के टोल प्लाजा पर 63 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं। सरकार का कहना है कि FASTag सिस्टम से टोल वसूली अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनी है, जबकि भविष्य में AI और ANPR आधारित नई टोल प्रणाली लागू होने से वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
Highlights
- जून 2026 तक 77 लाख से अधिक Annual FASTag Pass जारी
- नेशनल हाईवे पर 63 करोड़ से ज्यादा टोल ट्रांजैक्शन दर्ज
- कुल ETC ट्रांजैक्शन में Annual Pass की हिस्सेदारी लगभग 33%
- 98% टोल कलेक्शन FASTag के माध्यम से हो रहा
- AI और ANPR आधारित नई टोल प्रणाली लागू करने की तैयारी
77 लाख से ज्यादा Annual FASTag Pass जारी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि जून 2026 तक देशभर में 77 लाख से अधिक Annual FASTag Pass जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर 63 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए गए हैं।
सरकार के अनुसार, कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) लेनदेन में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी Annual FASTag Pass की है। इससे बार-बार टोल भुगतान की झंझट कम हुई है और यात्रियों को अधिक सुविधा मिली है।
FASTag से 98% टोल कलेक्शन
सरकार ने बताया कि नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले कुल टोल शुल्क संग्रह का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा FASTag के जरिए किया जा रहा है।
इस डिजिटल व्यवस्था से टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें कम हुई हैं, यात्रा का समय बचा है और ईंधन की खपत में भी कमी आई है।
शिकायतों के समाधान के लिए कई व्यवस्थाएं
नितिन गडकरी ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने टोल शुल्क से संबंधित शिकायतों के निपटारे के लिए कई शिकायत निवारण तंत्र विकसित किए हैं।
इसके अलावा FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम के जरिए टोल वसूली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा रही है।
ऐसे सुरक्षित रहता है FASTag ट्रांजैक्शन
सरकार के अनुसार, FASTag से होने वाला प्रत्येक लेनदेन एक सुरक्षित डिजिटल सिस्टम के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसमें कई संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, जिनमें शामिल हैं—
- टोल मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर
- टोल प्लाजा का अक्वायरर बैंक
- NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) केंद्रीय क्लियरिंग हाउस के रूप में
- FASTag जारी करने वाला बैंक
लेनदेन पूरा होते ही वाहन मालिक को तुरंत टोल कटने की सूचना भेजी जाती है और प्रत्येक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड केंद्रीय डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाता है।
बिना बैंक और NPCI के संभव नहीं कोई ट्रांजैक्शन
सरकार ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि अक्वायरर बैंक, NPCI और FASTag जारी करने वाले बैंक की भागीदारी के बिना कोई भी FASTag ट्रांजैक्शन संभव नहीं है। इससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, प्रमाणिक और पारदर्शी बनी रहती है।
जल्द आएगी AI आधारित नई टोल प्रणाली
सरकार ने बताया कि देश में टोल व्यवस्था को और आधुनिक बनाने के लिए Automatic Number Plate Recognition (ANPR), Artificial Intelligence (AI) आधारित Analytics और RFID आधारित FASTag तकनीक पर आधारित Multi Lane Free Flow (MLFF) टोल प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने, गति कम करने या किसी विशेष लेन में इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरे और सेंसर वाहन की नंबर प्लेट तथा FASTag की पहचान कर स्वतः टोल शुल्क काट देंगे, जिससे सफर पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगा।
FASTag प्रणाली से क्या होगा फायदा?
नई और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक टोल व्यवस्था से कई बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है—
- टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम में कमी
- यात्रा का समय और ईंधन की बचत
- डिजिटल और पारदर्शी टोल भुगतान
- नकद भुगतान की आवश्यकता खत्म
- AI आधारित स्मार्ट टोलिंग से निर्बाध यात्रा


