EPS Pension Hike 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों और EPS-95 पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मिलने वाली न्यूनतम ₹1,000 मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 करने की मांग की जा रही है। इस मुद्दे पर अब सरकार ने संसद में अपना आधिकारिक जवाब दे दिया है। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार के पास यह मांग पहुंची है, लेकिन फिलहाल इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
EPS Pension Hike: संसद में क्या पूछा गया?
लोकसभा में सरकार से सवाल किया गया कि क्या केंद्र सरकार EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम ₹1,000 पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की योजना बना रही है।
इस पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने जवाब देते हुए कहा कि ट्रेड यूनियनों, जनप्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की ओर से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
अभी कितनी मिलती है EPS पेंशन?
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) का लाभ उन कर्मचारियों को मिलता है जो EPFO के सदस्य हैं और जिन्होंने कम से कम 10 वर्ष की पात्र सेवा पूरी की है।
वर्तमान व्यवस्था इस प्रकार है:
- न्यूनतम मासिक पेंशन: ₹1,000
- अधिकतम पेंशन (वेतन और सेवा अवधि के आधार पर): करीब ₹7,500 तक
- पात्रता: कम से कम 10 वर्ष की सेवा
- पेंशन शुरू होने की सामान्य आयु: 58 वर्ष
EPS में पैसा कैसे जमा होता है?
प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए EPF एक अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा योजना है।
इसमें:
- कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 12% EPF में जमा करता है।
- नियोक्ता (Employer) भी 12% योगदान देता है।
- नियोक्ता के योगदान में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है।
- शेष राशि EPF खाते में जमा होती है।
यही EPS योगदान भविष्य में कर्मचारी की मासिक पेंशन तय करने का आधार बनता है।
सरकार ने क्या कहा?
राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद में कहा कि केंद्र सरकार EPS-95 पेंशनर्स को न्यूनतम ₹1,000 मासिक पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय सहायता देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार EPFO सदस्यों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी पेंशन वृद्धि का फैसला करते समय पेंशन फंड की वित्तीय स्थिरता (Sustainability) और भविष्य की देनदारियों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।
यानी फिलहाल ₹7,500 न्यूनतम पेंशन लागू करने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
12 साल से नहीं बढ़ी न्यूनतम पेंशन
EPS के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन में पिछले कई वर्षों से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- 2014: केंद्र सरकार ने न्यूनतम पेंशन ₹250 से बढ़ाकर ₹1,000 प्रति माह की।
- 2020: श्रम मंत्रालय ने इसे ₹2,000 करने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिली।
- 2026: संसद में फिर से ₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग उठाई गई, लेकिन सरकार ने अभी निर्णय नहीं लिया है।
₹7,500 पेंशन की मांग क्यों हो रही है?
ट्रेड यूनियनों और EPS-95 पेंशनर्स का कहना है कि मौजूदा समय में ₹1,000 मासिक पेंशन महंगाई के दौर में बेहद कम है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- न्यूनतम EPS पेंशन ₹7,500 प्रति माह की जाए।
- महंगाई राहत (Dearness Relief/DA) भी जोड़ी जाए।
- वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स को बेहतर सामाजिक सुरक्षा दी जाए।
इसी आधार पर संसद की एक समिति ने भी न्यूनतम पेंशन को ₹7,500 करने की सिफारिश की थी।
क्या जल्द बढ़ेगी EPS पेंशन?
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यूनतम EPS पेंशन बढ़ाने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, सरकार ने यह जरूर स्वीकार किया है कि विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से यह मांग लगातार उठाई जा रही है।
ऐसे में आने वाले समय में यदि सरकार इस विषय पर कोई निर्णय लेती है, तो इसका लाभ करोड़ों EPFO सदस्यों और लाखों EPS-95 पेंशनर्स को मिल सकता है।
निष्कर्ष
EPS-95 पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की मांग एक बार फिर संसद में गूंजी है, लेकिन फिलहाल सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी है। सरकार का कहना है कि पेंशन बढ़ाने का फैसला पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति और भविष्य की जिम्मेदारियों को देखते हुए ही लिया जाएगा। इसलिए अभी तक EPS की न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह ही लागू है।


